हिमाचल प्रदेश चुनाव 2017: सीट नंबर 37 सुजानपुर (अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र के बारे में जानिए

शिमला। सुजानपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सीट नंबर 37 है। हमीरपुर जिला में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र अनारक्षित है। 2012 में इस क्षेत्र में कुल 65,006 मतदाता थे। यह क्षेत्र साल 2008 में, विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के अनुसरण में अस्तित्व में आया। इससे पहले इसे बमसन नाम से जाना जाता था। पुराने बमसन का आधा हिस्सा हमीरपुर में चला गया व बाकी सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र के नाम से नया क्षेत्र बन गया।

2012 के विधानसभा चुनाव में राजेन्दर सिंह इस क्षेत्र के विधायक चुने गए। उन्होंने दो साल बाद इस्तीफा दे दिया तो उप चुनाव में नरेन्दर ठाकुर यहां से चुने गये। यह राजपूत मतदाताओं के प्रभाव वाला क्षेत्र है। जो शुरू से ही भाजपा के प्रति झुकाव रखते आये हैं। बमसन भाजपा का गढ़ रहा है। बमसन विस क्षेत्र समाप्त होने के पश्चात नए बने सुजानपुर विस क्षेत्र में करीब डेढ़ दर्जन पंचायतों के 42 मतदान केंद्र शामिल हुए हैं। मतदान केंद्रों के तहत करीब 23-24 हजार मतदाता हैं। पिछले चुनावी आंकड़ों के अनुसार 75 से 95 प्रतिशत मतदान भाजपा के पक्ष में होता रहा है। छंब, मैहलड़ू सहित कुछ मतदान केंद्र तो ऐसे हैं, जहां विरोधी पार्टी को एक या दो प्रतिशत मत ही पड़े हैं।

sujanpur

सुजानपुर एक जमाने में कटोक्ष वंश की राजधानी थी

सुजानपुर एक जमाने में कटोक्ष वंश की राजधानी थी

सुजानपुर एक जमाने में कटोक्ष वंश की राजधानी थी। यहां बने एक प्राचीन किले को देखने के लिए लोगों का नियमित आना जाना लगा रहता है। यहां एक विशाल मैदान है जिसमें चार दिन तक होली पर्व आयोजित किया जाता है। यहां एक सैनिक स्कूल भी स्थित है। धार्मिक केन्द्र के रूप में भी यह स्थान खासा लोकप्रिय है और यहां नरबदेश्वर, गौरी शंकर और मुरली मनोहर मंदिर बने हुए हैं। सुजानपुर किले का निर्माण 1758 में कांगड़ा के शासक रजा अभय सिंह ने कराया था। ये किला हमीरपुर के सुन्दर भवनों में से एक है। इस किले की आकर्षक पेंटिंग इसे और भी मनमोहक बनती है जो इसकी लोकप्रियता में चार चाँद लगता है जब कांगड़ा के शासक अंग्रेजों से हार गए थे तो उन्होंने अपने पूरे परिवार के साथ इसी किले में शरण ली थी। इस किले की सबसे बड़ी खासियत ये है की यहाँ पर अलग अलग हिस्सों से आने वाले राजाओं के लिए अलग अलग खण्डों का निर्माण कराया गया था ताकि उनके आराम में कोई कमी न हो ये किला ब्यास नदी के किनारे स्थित है जहाँ पर राज्य के अलग अलग मामलों की सुनवाई का आयोजन किया जाता था ।साथ ही इस किले के विशाल बरामदे में होली पर्व का आयोजन किया जाता था इस जगह के अन्य आकर्षण नरबदेश्वर गौरीशंकर और मुरली मनोहर मंदिर हैं।

सुजानपुर में स्थापित भारत का 18 वां सैनिक स्कूल आज देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में शुमार हो चुका है। इस समय भारत में कुल 23 सैनिक स्कूल हैं, जो कि केंद्रीय रक्षा मंत्रालय के तहत आते हैं। 2 नवम्बर 1978 को स्थापित सैनिक स्कूल सुजानपुर टीहरा एनडीए परीक्षा में लगातार शानदार परिणाम देता रहा है। इस कारण यह संस्थान रक्षा मंत्रालय द्वारा कई बार सम्मानित किया जा चुका है। स्कूल का उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ॰ नीलम संजीव रेड्डी ने किया था। शांति काल का सवोच्र्च वीरता पुरस्कार, अशोक चक्र (मरणोपरांत) पाने वाले मेजर सुधीर वालिया इस स्कूल के दूसरे बैच के छात्र थे। कारगिल युद्ध में वीर चक्र पाने वाले मेजर संजीव जाम्वाल इसी स्कूल के नौवें बैच के छात्र रहे हैं। यह स्कूल हिमाचल के महाराजा संसार चंद की याद भी दिलाता है, जो अठारहवीं सदी में सुजानपुर के मैदान में अपने सैनिकों को ट्रेनिंग देते थे।

सुजानपुर से अभी तक चुने गये विधायक

सुजानपुर से अभी तक चुने गये विधायक


वर्ष चुने गये विधायक पार्टी संबद्धता
2012 -राजिंदर सिंह -निर्दलीय
2014 -नरेन्दर ठाकुर -भाजपा

नरेन्द्र ठाकुर को विरासत में मिली राजनिति

नरेन्द्र ठाकुर को विरासत में मिली राजनिति

पूर्व मंत्री ठाकुर जगदेव चंद के बेटे नरेन्द्र ठाकुर ला ग्रेजूयेट के साथ उन्होंने एम काम किया है। कृषक होने के साथ पेशावर वकील भी हैं। उनके एक बेटा व दो बेिटयां हैं। 16 मई 2014 को हुये उप चुनाव में पहली बार विधायक चुने गये।

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