हिमाचल प्रदेश चुनाव 2017: सीट नंबर 40 नादौन (अनारक्षित ) विधानसभा क्षेत्र के बारे में जानिये

शिमला। नादौन विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सीट नंबर 40 है। हमीरपुर जिला में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र अनारक्षित है। 2012 में इस क्षेत्र में कुल 80,482 मतदाता थे। 2012 के विधानसभा चुनाव में विजय अगिनहोत्री इस क्षेत्र के विधायक चुने गए।रियासत काल से ही नादौन का गौरवशाली इतिहास रहा है। कटोच राजाओं की कर्मभूमि नादौन का प्राचीन किला आज भी कटोच वंश के इतिहास का साक्षी है। कटोच वंश के महाराजा संसार चंद का किला आज भी देश भर से पर्यटकों को आकर्षित करता है।

वहीं गुरुद्वारा गोबिंद सिंह का गुरुद्वारा, सिखों के लिए एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यह ब्यास नदी के किनारे पर स्थित है। इस गुरुद्वारे को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति अमृतसर, पंजाब द्वारा देखा जाता है। यह गुरद्धारा उसी जगह पर बनाया गया है जहाँ सिखों के 10वें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह ने मुगलों को एक युद्ध में हराने के बाद आठ दिनों के लिए रुके थे। उन्होंने 500 सिख सैनिकों के साथ मुगल नेता अल्फा खान हुसैन के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। लड़ाई 4 अप्रैल, 1891 को लड़ी गयी थी। गुरु गोबिंद सिंह ने सिखों के पवित्र पुस्तक दस्सम ग्रंथ, के नादौन जंग अध्याय में इस लड़ाई को वर्णित किया है।

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 पीर बाबा की मजार भी प्रमुख पर्यटन स्थल है

पीर बाबा की मजार भी प्रमुख पर्यटन स्थल है

दूसरी ओर भरमोटी में पीर बाबा की मजार भी प्रमुख पर्यटन स्थल है। लोककथाओं के अनुसार, इस क्षेत्र के एक प्रसिद्ध संत, साई फजल शाह, अपने जीवन काल के दौरान कई रहस्यमय चीज़े छोड़ दिये जिससे वे लोगों के बीच लोकप्रिय बन गए। मजार को कटोच वंश के एक राजा, संसार चंद द्वारा बनाया गया था जो उनकी शक्ति से चकित थे।

राजनैतिक तौर पर नादौन ने नारयण चंद पराशर जैसे धुरंधर नेता दिये। आज नादौन में ब्राहम्ण मतदाताओं की तादाद सबसे अधिक है। उसके बाद राजपूत मतदाता आते हैं। वहीं ओबीसी मतदाता भी यहां खासी तादाद में हैं। शुरू में यहां ओबीसी व ब्राहम्ण मतदाता एक होकर राजनिति की दिशा बदलते रहे हैं। नारायण चंद पराशर की मौत के बाद नादौन में ओबीसी नेतृत्व उभर नहीं पाया है। हालांकि यहां प्रभात चौधरी का अपना प्रभाव रहा है। बिरादरी में उनका दबदबा है। उन्होंने निर्दलीय चुनाव तो लड़ा। लेकिन किसी भी पार्टी के प्रत्याशी नहीं बन पाये। पिछले चुनावों में विजय अगिनहोत्री की जीत की वजह भी ओबीसी व ब्राहम्ण मतदाओं का गठजोड़ बना। नादौन जहां एक ओर प्रमुख व्यापारिक केन्द्र के रूप में उभरा है। वहीं ग्रामीण इलाके में खेती बाड़ी को खूब बढ़ावा मिला है। एक तरह से यहां सबसे अधिक सब्जियां उगाई जाती हैं। जो कि लोगों के राजेगार का प्रमुख साधन भी है।

नादौन से अभी तक चुने गये विधायक

नादौन से अभी तक चुने गये विधायक

2012 -विजय अग्निहोत्री -भाजपा
2007- सुखविंदर सिंह सुक्खू -कांग्रेस
2003 -सुखविंदर सिंह -कांग्रेस
1998 -बाबु राम मंडियाल -भाजपा
1993 -नारायण चंद पराशर- कांग्रेस
1990 -नारायण चंद पराशर -कांग्रेस
1985 -प्रेम दस पखरोल्वी -कांग्रेस
1982 -धनी राम- भाजपा
1977 -नारायण चन्द -कांग्रेस

विजय अगिनहोत्री ने तय कि या वकालत से राजनिति में आने तक का सफर

विजय अगिनहोत्री ने तय कि या वकालत से राजनिति में आने तक का सफर

नादौन के विधायक विजय अगिनहोत्री एमएम ला ग्रेजूयेट हैं। उनका एक बेटा व एक बेटी है। उन्होंने वकालत से होकर अपना राजनैतिक सफर तय किया। 50 वर्षीय विजय अगिनहोत्री भाजपा में युवा मोर्चा से आये। व उससे पहले जिला हमीरपुर भाजपा लीगल सेल के अध्यक्ष रहे। और 2012 में पहली बार विधायक चुने गये।

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