Himachal Elections: चुराह सीट पर BJP का है कब्जा, इस बार कांग्रेस प्रत्याशी यशवंत सिंह दे रहे कड़ी चुनौती
Himachal Elections: चुराह सीट पर BJP का है कब्जा, इस बार कांग्रेस प्रत्याशी यशवंत सिंह दे रहे कड़ी चुनौती
Himachal Elections 2022: हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में आने वाली चुराह विधानसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा है। यहां से मौजूदा विधायक है विधानसभा डिप्टी स्पीकर हंसराज। हंसराज पिछले साल सुर्खियों में भी रहे थे और इनका विवादों से पुराना नाता रहा है। इसके बावजूद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने हंसराज को तीसरी बार चुनाव मैदान में उतारा है। वहीं, हंसराज के सामने कांग्रेस ने इस बार यशवंत सिंह खन्ना को मैदान में उतारा है। बता दें कि कांग्रेस प्रत्याशी इस बार हंसराज को कड़ी चुनौती दे रहे है।

चुराह विधानसभा के जातीय समीकरण की बात करें तो यहां अनुसूचित जाति के वोटरों का प्रभाव अधिक है। लेकिन यहां के मुस्लिम मतदाताओं ने हर बार चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाई है। हालांकि, इस बार हालात बदले हैं और यहां हिंदू मतदाताओं में भाजपा प्रत्याशी हंसराज के प्रति गहरी नाराजगी देखी जा रही है। तो वहीं, मुस्लिम मतदाता बीजेपी को अपना समर्थन दे रहे हैं। यहां दलित मतदाता कांग्रेस का साथ देते रहे हैं। यही वजह है कि हिंदू मतदाताओं की नाराजगी हंसराज पर भारी पड रही है।
हिमाचल प्रदेश की सीट नंबर 1 चुराह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। यह क्षेत्र साल 2008 में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया था। इससे पहले इसे राजनगर निर्वाचन क्षेत्र के रूप में जाना जाता था। डिलिमिटेशन के दौरान चंबा जिला की चुराह तहसील व चंबा तहसील का राजनगर कानूनगो सर्कल का मिलाकर नया चुराह विधानसभा चुनाव क्षेत्र बना। इस सीट पर 2012 में हुए चुनावों में चुराह के पहले विधायक भाजपा के हंसराज चुनाव जीते थे। उसके बाद 2017 में भी हंसराज दोबारा चुने गए। अबकी तीसरी बार भाजपा ने हंसराज को ही टिकट दिया है।
कांगड़ा व चंबा जिला के भरमौर को छोड़कर कांगड़ा चंबा संसदीय चुनाव क्षेत्र बनाया गया है। यही वजह है कि इसे कांगड़ा चंबा संसदीय चुनाव क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। इससे पहले राजनगर से 2007 में कांग्रेस के सुरेंद्र भारद्वाज व 2003 में कांग्रेस के चुनावों में भी सुरेंद्र भारद्वाज चुनाव जीते थे। साल 1998 में यहां से भाजपा के मोहन लाल चुनाव जीते। इससे पहले राजनगर में कांग्रेस के विद्या धर विधायक व मंत्री रहे। चुराह विधानसभा सीट आज भी बेहद पिछड़ी हुई है। इस सीट पर जम्मू-कश्मीर से सटी सीमा तक लोग रहते हैं। लेकिन अंदरूनी इलाके में सडक़ मार्ग का अभाव है।
लोगों की यहां अपनी अलग जिंदगी है। यहां अनसूचित जाति के अलावा मुस्लिम, गुज्जर, गद्दी व दूसरी जातियों के लोग भी रहते हैं। यहां करीब 26 प्रतिशत अनुसूचित जाति के मतदाता हैं। जबकि, 9 प्रतिशत मुसलमान व पांच प्रतिशत गुज्जर मतदाता भी हैं। इलाके की भौगोलिक परिस्थितियां ऐसी हैं कि बर्फबारी के दौरान यहां जिंदगी थम सी जाती है। साक्षरता दर में कई राज्यों से बढ़त बनाने वाले हिमाचल प्रदेश की दुर्गम इलाके चुराह में आज भी कई बच्चे स्कूल ही नहीं जा रहे। कईयों ने स्कूल जाना छोड़ दिया है। चुराह तहसील के अधिकतर लोग खेती-बाड़ी करते है या पशुपालन।
चुराह तीसा ब्लाक में आता है और यहां करीब 42 पंचायतों के 264 गांव हैं। यहां हिंदी व पहाड़ी भाषा बोली जाती है। तीसरी बार मैदान में उतरे राज्य विधानसभा में डिप्टी स्पीकर हंसराज आईपीएच विभाग के पाईप फिटर के बेटे हैं। राजनीति उन्हें विरासत में नहीं मिली, लेकिन उन्होंने सुरेंद्र भारद्वाज जैसे दिगज को धूल चटाई। सुरेंद्र भारद्वाज के पिता विद्या धर प्रदेश के मंत्री रहे थे और खुद भारद्वाज राजनगर से दो बार विधायक रह चुके है। लेकिन, 2012 में यहां बदलाव आया और एक साधारण परिवार का बेटा विधायक बन गया। हंसराज समाजशास्त्र में एमफिल हैं। गिम्मी हाइड्रो प्रोजेक्ट का आंदोलन हंसराज के जीवन में एक नया मोड़ लेकर आया था। जिसके बाद वो जिला परिषद में चुने गए और दो बार विधायक भी बने। तीसरी बार मैदान में उतरे हंसराज के लिए इस बार चुनाव जीतना आसान नहीं है।
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