रोहतांग सुरंग को वाजपेयी जी को सर्मिपत करेगी हिमाचल सरकार, जानें इसके पीछे की कहानी
शिमला। हिमाचल सरकार सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण निर्माणाधीन रोहतांग सुरंग को अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित करेगी। यह सुरंग एक ओर लेह लद्दाख तो दूसरी ओर लाहौल घाटी के लोगों को मनाली से जोड़े रखेगी। अभी तक करीब छह माह रोहतांग में भारी बर्फबारी होने की वजह से सारा इलाका कटा रहता है। वहां के लोग आर-पार नहीं जा पाते हैं। इस सुरंग का निर्माण अंतिम चरण में है। अगले साल तक इसे यातायात के लिये खोल दिया जाएगा।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने बताया कि रोहतांग में सुरंग बनाने में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का अहम योगदान रहा है। लिहाजा अब हिमाचल सरकार उनके इस योगदान की याद को जिंदा रखने के लिये सुरंग का नामकरण उनके नाम पर करेगी। इसके लिये जल्द ही केन्द्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजा जायेगा। इसके लिये उन्होंने अधिकारियों से ड्राफ्ट तैयार करने को कहा है। उन्होंने कहा कि इससे पहले केबिनेट में इसे लाया जायेगा। यूं तो हिमाचल के लिये वाजपेयी जी ने कई कुछ दिया, लेकिन रोहतांग में बनने वाली सुरंग किसी वरदान से कम नहीं है। करीब 9 किलोमीटर लम्बी यह सुरंग अब लगभग बनकर तैयार है और इसे अगले साल आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। इस पर कुल 4000 करोड़ खर्च हुआ है।
दरअसल, इस सुरंग के निर्माण की कहानी भी खासी दिलचस्प रही है। यह वाजपेयी जी का अपने एक कबाईली दोस्त को तोहफा था जो आज इस अटूट दोस्ती का मिसाल बन गया है। पूरे चार हजार करोड़ का तोहफा। यह कोई कहानी नहीं बल्कि हकीकत है। उन दिनों की बात है जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे। गर्मी की छुट्टियां बिताने वे मनाली के प्रीणी गांव में अपने घर पहुंचे थे। वह जब भी यहां आते उन्हें एक खास शख्स के आने का इंतज़ार रहता। उसका नाम था टशी दावा। जो रोहतांग दर्रे के उस पार लाहौल-स्पीति के ठोलंग गांव का रहने वाला था।
बताया जाता है कि दोनों ने 1942 में बड़ोदरा में आरएसएस के विशेष प्रशिक्षण शिविर से ओटीसी सेकेंड ईयर किया था। वैचारिक दोस्ती इस कदर परवान चढ़ी कि कालांतर में जब अटल जी प्रधानमंत्री बने तो दोनों की दोस्ती को ओर मजबूती मिली। यह उस दौर की दोस्ती ही थी कि अटल जी को मनाली प्रवास में ख़ास तौर पर टशी के आने का इंतजार रहता था।












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