Himachal: कांग्रेस का दामन छोड़ बीजेपी ज्वाइन करना नेताओं को पड़ा भारी, अब टिकट मिलने पर भी छाया संकट
Himachal: कांग्रेस का दामन छोड़ बीजेपी ज्वाइन करना नेताओं को पड़ा भारी, अब टिकट मिलने पर भी छाया संकट
हिमाचल (Himachal) कांग्रेस के कुछ बागी नेताओं ने बीते माह जिस जोश और जुनून के साथ कांग्रेस का दामन छोड़ भाजपा ज्वाइन की थी। उन्हीं नेताओं का राजनीतिक भविष्य भाजपा के स्थानीय नेताओं के विरोध के चलते खतरे में पड गया है। यही वजह है कि कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं के लिए बदले हालातों में टिकट मिलना मुश्किल होता जा रहा है। वहीं, भाजपा नेतृत्व भी इस मामले में कोई ठोस निर्णय नहीं ले पा रहा है। यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) हिमाचल में अभी तक अपने प्रत्याशियों के नाम तय नहीं कर पाई है।

आम तौर पर चुनावों में टिकट ने मिलने की सूरत में नेता एक पार्टी को छोड दूसरे दल में शामिल हो जाते हैं। लेकिन, हिमाचल प्रदेश में इस बार नेता चुनाव की घोषणा से पहले ही भाजपा ज्वाइन करने लगे, तो भाजपा का आम कार्यकर्ता हैरान व परेशान हो गया। कई विधानसभा क्षेत्रों में तो बगावत का महौल तैयार हो गया है और पुराने कार्यकर्ता दल बदल कर आये नेता को अपनाने के लिए तैयार नहीं हो पा रहे हैं। हालांकि, अभी भाजपा नेताओं को लगता है कि कुछ और कांग्रेस विधायक पार्टी में आ सकते हैं।
कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष व कांगड़ा से विधायक पवन काजल और कांग्रेस उपाध्यक्ष विधायक लखविंदर राणा भाजपा ज्वाइन कर चुके हैं। इसी तरह एक ओर कार्यकारी अध्यक्ष हर्ष महाजन भी कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इसी तरह भाजपा तीन बार के सांसद सुरेश चंदेल को कांग्रेस से वापिस भाजपा में लाने में कामयाब हो चुकी है। सुरेश चंदेल बिलासपुर से कांग्रेस टिकट की रेस में थे। वहीं, पूर्व केंद्रीय संचार मंत्री पंडित सुखराम के पोते आश्रय शर्मा का भी कांग्रेस से मोहभंग हो चुका है और वो सोमवार 10 अक्तूबर को जेपी नड्डा की मौजूदगी में भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं।
बता दें, आश्रय शर्मा पिछले लोकसभा चुनावों में मंडी से कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी रहे हैं। लेकिन वीरभद्र परिवार से उनकी पुरानी खुन्नस के चलते इस बार आश्रय शर्मा टिकट की दौड़ में पिछड़ने लगे तो उन्होंने कांग्रेस छोडने का मन बना लिया। तमाम नेताओं को पहले भाजपा ने टिकट को लेकर आश्वासन दिया था। लेकिन यह आशवासन अब स्थानीय स्तर पर हो रहे विरोध के चलते गारंटी में बदलता नजर नहीं आ रहा है। जिससे नेताओं में बेचैनी बढ़ने लगी है। तो वहीं, भाजपा का ही एक वर्ग हैरान है कि कांग्रेस से भाजपा में आये लोगों को गले लगा कर अपने पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर रही है।
यही वजह है कि व्यापक विरोध के चलते अब विधायक लखविंदर राणा और पवन काजल को भाजपा का टिकट देने पर सहमति नहीं बन पाई है। इसी तरह मंडी जिला की जोगिन्दर नगर नगर सीट, जहां से निर्दलीय पिछला चुनाव जीतने वाले प्रकाश राणा भेल ही भाजपा में आ गये हो। लेकिन उन्हें टिकट मिलेगा इसकी गारंटी भाजपा नहीं दे पा रही है। दूसरे निर्दलीय विधायक कांग्रेस की देहरा सीट से पिछले चुनाव जीतने वाले होशियार सिंह भी भाजपा ज्वाइन कर चुके हैं। लेकिन देहरा भाजपा मंडल की बैठकों में उन्हें घुसने नहीं दिया जा रहा हैं।
देहरा मंडल भाजपा ने होशियार सिंह को अपनाने के लिए मना कर दिया है। देहरा में घमासान के बीच अब माना जा रहा है कि भाजपा इस बार देहरा से रविंद्र सिंह को ही दोबारा मैदान में उतारेगी। पांच बार विधायक रहे रवि प्रेम कुमार धूमल और अनुराग ठाकुर के करीबी हैं। उनका टिकट काट कर होशियार सिंह को देना पार्टी के लिए जोखिम भरा कदम हो सकता है। इसी तरह कुल्लू जिला की बंजार सीट पर भी घमासान मचा है। यहां से पूर्व मंत्री खीमी राम भाजपा छोड़ कांग्रेस ज्वाइन कर चुके हैं। लेकिन खीमी राम के बदले जीतने वाला उम्मीदवार कौन होगा। इसका जवाब पार्टी तलाश रही है।












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