सत्ता विरोधी लहर का डर भाजपा पर हुआ हावी, नड्डा के दखल के बाद पार्टी ने देहरा और ज्वालामुखी में बदले प्रत्याशी

सत्ता विरोधी लहर का डर भाजपा पर हुआ हावी, नड्डा के दखल के बाद पार्टी ने देहरा और ज्वालामुखी में बदले प्रत्याशी

Himachal Election 2022: अपने आंतरिक सर्वे और सत्ता विरोधी लहर की वजह से डरी भाजपा ने कांगड़ा जिले की देहरा और ज्वालामुखी चुनाव क्षेत्रों में अपने प्रत्याशी बदलने के निर्णय पर मुहर लगा दी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के दखल बाद ज्वालामुखी के विधायक रमेश धवाला के घर डिनर पर आयोजित बैठक में नए फार्मूले पर सहमति बनी है। भाजपा के इस निर्णय से एक ही झटके में भाजपा में हाल ही में शामिल हुए देहरा के निर्दलीय विधायक होशियार सिंह और कांग्रेस के पूर्व विधायक योग राज की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। पिछले कई दिनों से ज्वालामुखी और देहरा सीट पर टिकट को लेकर चल रहे घमासान के अब खत्म होने के आसार हैं।

Himachal Election 2022: Deori and Jwalamukhi seat Bharatiya Janata Party JP Nadda

बताया जा रहा है कि नड्डा ने अपने हिमाचल दौरे के दौरान जिला कांगड़ा की राजनीतिक स्थिति का फीडबैक लिया। तो उन्हें पार्टी में चल रही उठापटक की जानकारी मिली। जिसके बाद उन्होंने हमीरपुर में देहरा उपमंडल की ज्वालामुखी, देहरा और जसवां परागपुर के नेताओं के साथ बैठक की। इस बैठक के बाद बिलासपुर में नड्डा के साथ बैठक में पार्टी प्रभारी अविनाश राय खन्ना, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के साथ ताजा हालात पर मंथन किया गया और अनुराग ठाकुर और खन्ना को धवाला रवि को मनाने का जिम्मा सौंपा गया। नेताओं के दखल के बाद धवाला और रवि भी एक टेबल पर साथ बैठने को तैयार हो गए। उसके बाद धवाला के घर पर अविनाश राय खन्ना और अनुराग ठाकुर ने डिनर पर धवाला और रवि की बैठक कराई और धवाला व रविंदर रवि के चुनाव क्षेत्र बदलने पर मुहर लगा दी गई।

ज्वालामुखी के मौजूदा विधायक धवाला ने ज्वालामुखी में 1998 से 2017 तक पांच चुनाव लड़कर चार बार जीत दर्ज की, जबकि 2012 में चुनाव हार गए थे। लेकिन 2017 के चुनाव जीतने के बाद भाजपा के संगठन मंत्री पवन राणा से अनबन के चलते धवाला अपनी ही सरकार में हाशिये पर रहे। हालांकि, सरकार ने उन्हें योजना बोर्ड का उपाध्यक्ष भी बनाया। लेकिन धवाला इसे असंतुष्ट ही रहे। यही वजह है कि धवाला को इस बार ज्वालामुखी में अपना टिकट कटने का खतरा पैदा हुआ तो उन्होंने बागी तेवर अपनाते हुए कह दिया कि वह हर सूरत में चुनाव लडेंगे। धवाला ओबीसी नेता हैं और उनके भाजपा से बगावत पर भाजपा को ओबीसी वोट बैंक के टूटने का खतरा पैदा होने लगा।

दूसरी ओर देहरा से पिछला चुनाव हारे भाजपा नेता पूर्व मंत्री रविन्द्र सिंह को मनाना भी आसान नहीं था। रवि को देहरा में पिछली बार हराने वाले निर्दलीय विधायक होशियार सिंह की एंट्री भाजपा में हुई, तो देहरा भाजपा में बवाल मच गया और पूरा मंडल बागी हो गया। खुद रवि ने भी शर्त रख दी कि अगर होशियार सिंह को देहरा में रखना है, तो उन्हें सुलह या ज्वालामुखी से टिकट दिया जाये। डिलिमिटेशन के बाद थुरल हल्के का एक हिस्सा ज्वालामुखी, तो दूसरा सुलह में मिला है। इसी वजह से रवि अपनी दावेदारी जताने लगे। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और उनके बेटे केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के बेहद करीबी रवि ने उन्हें जानबूझकर कमजोर करने का आरोप लगाया। रवि के बागी तेवरों का नुकसान भाजपा को होने का अंदेशा था। यही वजह थी कि पार्टी रवि को भी नाराज करने का जोखिम नहीं ले पाई।

दरअसल, भाजपा को लगने लगा कि अगर रवि के तेवर नरम न हुए तो कांगड़ा जिला में नुक्सान उठाना पड सकता है। प्रदेश के सबसे बडे जिला कांगड़ा में 15 चुनाव क्षेत्र हैं और राजपूत बाहुल्य इलाके में धूमल समर्थकों का दबदबा है। इस बार किसी राजपूत नेता को नाराज करना अपने पैरों पर खुद ही कुल्हाड़ी मारने जैसा होता। रविंदर सिंह रवि कांगड़ा जिला में धूमल खेमें के झंडाबरदार रहे है। उन्होंने 1993, 1998, 2003, 2007 लगातार चुनाव जीते। लेकिन 2017 में वह देहरा में होशियार सिंह के हाथों देहरा से चुनाव हार गये थे। 2012 में उनके चुनाव क्षेत्र थुरल में डिलिमिटेशन की जद में आने के बाद देहरा भेजा गया था। थुरल का एक हिस्सा ज्वालामुखी में आया और एक हिस्सा सुलह में चला गया था। उस दौरान कांगड़ा जिला के 16 चुनाव क्षेत्रों की तादाद घटकर 15 हो गई थी।

इस बीच, ज्वालामुखी के पूर्व विधायक कांग्रेस नेता संजय रतन ने भाजपा विधायक एवं प्रदेश योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष रमेश धवाला पर निशाना साधते हुए कहा कि संभावित हार को देखते हुए धवाला ने चुनावों से पहले ही हार मान ली और ज्वालामुखी छोड देहरा की ओर पलायन कर गए। उन्होंने धवाला पूरी तरह नाकाम विधायक साबित हुए। जिसके चलते भाजपा ने धवाला को देहरा भेज रही है। चुनावों से पहले ही किसी मौजूदा विधायक का चुनाव छोड जाना अपने आप में स्पष्ट करता है कि उसे पता है कि वह चुनाव हारने जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में कांग्रेस की लहर चल रही है, व आने वाली सरकार कांग्रेस पार्टी ही बनायेगी। लिहाजा ज्वालामुखी के साथ साथ भाजपा देहरा में भी चुनाव हारेगी।

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