हिमाचल: रिस्क के मूड में नहीं भाजपा! टिकट बंटवारे से पहले मतदान के जरिए करा रही रायशुमारी
himachal pradesh elections: हिमाचल प्रदेश में आज भारतीय जनता पार्टी ने टिकट आबंटन से पहले एक नया पैंतरा चलते हुए विधायकों की लोक्रिपयता की रायशमुरी कराने का निर्णय लेकर टिकट की आस में बैठे नेताओं को बेचैन कर दिया है। दिल्ली से आए इस फरमान ने कईयों की नींद उड़ा दी है और कई अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे हैं। भाजपा अपने उम्मीदवारों की घोषणा से पहले उनकी लोकप्रियता देखना चाह रही है। इसी के बाद ही टिकट तय होंगे, जिससे कई नेताओं के राजनीतिक भविष्य पर संकट आ गया है।
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दरअसल, शनिवार को गृह मंत्री अमित शाह के दौरे के दौरान रखी गई भाजपा कोर कमेटी की बैठक को एन वक्त पर टालना पड़ा था। चूंकि कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए नेताओं के लिए बनाया गया फार्मूला अमित शाह को रास नहीं आया था। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अब दिल्ली से ही सारी बात तय होगी। लेकिन आज सुबह अचानक एक नया निर्देश हिमाचल भाजपा के पास आ गया, जिसमें सभी भाजपा विधायकों की लोकप्रियता की रायशुमारी कराने को कहा गया है। प्रदेश के चार संसदीय क्षेत्रों शिमला, हमीरपुर, कांगड़ा और मंडी में बाकायदा इसके लिए पार्टी दफतरों में बैलेट बाक्स रखे गए हैं। जहां पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता और पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि अपने विधायक के लिए मतदान कर रहे हैं।
यह लोग संसदीय क्षेत्र स्तर पर प्रदेश के 17 संगठनात्मक जिलों में बैठकें हो रही हैं। यहां मतदान कर अपनी राय तय कर अपना पसंदीदा प्रत्याशी तय करेंगे। यह बैलेट बाक्स आज शाम दिल्ली भेज दिए जायेंगे। जहां पार्टी आलाकमान इसके परिणाम के आधार पर अपने टिकट तय करेगा। पार्टी की ओर चले इस नए दांव ने सभी नेताओं को हैरान परेशान कर दिया है। एक ओर जहां वोटिंग हो रही है। वहीं दूसरी ओर नेताओं की धुकधुकी बढ रही है। बताया जा रहा है कि पार्टी इस समय 17 मौजूदा विधायकों और दो कबीना मंत्रियों के टिकट काटने का निर्णय कर चुकी है। जिसके तहत अब पार्टी की ओर से यह नई कवायद चलाई गई है।
इसमें कई विधायकों के प्रति स्थानीय स्तर पर चल रही नाराजगी का आकलन भी पार्टी करना चाह रही है। पार्टी को सत्ता विरोधी लहर का डर सता रहा है। तो दूसरी ओर कराये गये आंतरिक सर्वे ने भी परेशानी में डाला है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुरेश कशयप ने बताया कि प्रदेश में चारों संसदीय क्षेत्रों में प्रदेश भाजपा के 17 संगठनात्मक जिलों में पार्टी के लोग अपने नेता के लिए मतदान कर रहे हैं। इसके लिए पार्टी कार्यालयों में बैलेट बाक्स लगाये गए हैं। उन्होंने कहा कि टिकट की घोषणा से पहले यह तय कर लेना चाहती है कि मौजूदा विधायक इलाके में कितना लोकप्रिय है और क्या उसका विकल्प कितना मजबूत है।
दरअसल, विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही 'सरकार नहीं रिवाज बदलो' के नारे के साथ मिशन रिपीट में जुटी हिमाचल भाजपा ने अब नए सिरे से सत्ता में वापिसी के लिए अपनी रणनीति को जमीनी धरातल पर उतारने का निर्णय किया है। आला नेताओं के लगातार राज्य के दौरे के दौरान मिले फीडबैक के बाद कई विधानसभा सीटों पर भाजपा ने अपनी रणनीति को बदलने का फैसला किया है। हिमाचल प्रदेश भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का गृह राज्य है और इस पहाड़ी राज्य में सीधे-सीधे भाजपा आलाकमान की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
बता दें, 2017 के विधानसभा चुनाव में राज्य की कुल 68 सीटों पर हुए चुनाव में 48.79 प्रतिशत मतों के साथ भाजपा को 44 सीटों पर जीत हासिल हुई थी, जबकि 41.68 प्रतिशत मतों के साथ कांग्रेस के खाते में 21 सीटें आई थीं। पिछली बार जिन 44 सीटों पर भाजपा उम्मीदवार को जीत हासिल हुई थी, उनमें से 20 से ज्यादा विधायकों को लेकर मिले फीडबैक ने भाजपा आलाकमान को चिंतित कर दिया है और इसमें राज्य सरकार के कई मंत्रियों की सीट भी शामिल है। बताया जा रहा है कि इस फीडबैक के बाद पार्टी ने इन सीटों को लेकर तमाम विकल्पों पर विचार करना शुरू कर दिया है।












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