Himachal 2024 Year Ender: जंगली मुर्गे, समोसे, सियासत और संकट तक की कहानी; जानें कैसा बिता हिमाचल का साल?
Himachal 2024 Year Ender : हिमाचल प्रदेश के लिए 2024 का साल उतार-चढ़ाव से भरा रहा। जहां सरकार को सियासी और वित्तीय संकटों का सामना करना पड़ा, वहीं कुछ मजेदार और अजीबोगरीब घटनाएं भी चर्चा का केंद्र रहीं।
साल की शुरुआत में कांग्रेस को राज्यसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, जो सत्तारूढ़ पार्टी के लिए बड़ा झटका था। कांग्रेस के छह विधायकों ने क्रॉस-वोटिंग की, जिससे यह हार हुई। बाद में इन बागी विधायकों को दलबदल कानून के तहत अयोग्य घोषित कर दिया गया।

विधानसभा उपचुनाव में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश देहरा ने जीत दर्ज की, जिससे विधानसभा को पहली बार पति-पत्नी का जोड़ा मिला। हालांकि, भाजपा ने भी अपनी स्थिति मजबूत की और 25 से 28 सीटें जीत लीं।
शिमला में सांप्रदायिक तनाव
सितंबर में शिमला के संजौली इलाके में मस्जिद के एक 'अवैध' हिस्से को हटाने की मांग के दौरान हिंसा भड़क उठी। इस घटना में पुलिस और स्थानीय लोगों सहित कई लोग घायल हुए। मस्जिद समिति ने अवैध निर्माण को गिराने पर सहमति जताई, लेकिन यह मामला राज्य में पहली सांप्रदायिक झड़प के रूप में दर्ज हुआ।
प्राकृतिक आपदाएं और सूखा मानसून
राज्य को मानसून के दौरान भारी नुकसान झेलना पड़ा। बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं में 65 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। 1901 के बाद यह हिमाचल का तीसरा सबसे सूखा मानसून रहा, जिसमें 98% तक कम बारिश हुई।
सरकारी वित्तीय संकट
सरकार को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा, जिससे कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में देरी हुई। उच्च न्यायालय ने सरकार के बकाया भुगतान के कारण दिल्ली के हिमाचल भवन को कुर्क करने का आदेश दिया।
विपक्ष ने इसे सरकार की विफलता बताते हुए वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाया। राजस्व बढ़ाने के लिए सरकार ने बिजली और पानी पर सब्सिडी में कटौती और दूध पर उपकर लगाया, जिससे जनता में नाराजगी बढ़ी।
'समोसे और जंगली मुर्गे' पर सियासत
एक अजीब घटना में, सीआईडी द्वारा मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को परोसे गए समोसों और केक के डिब्बों पर जांच शुरू की गई। इसे 'सरकार विरोधी' कृत्य बताया गया, जिससे सोशल मीडिया पर खूब मीम्स बने।
इसके अलावा, 'जंगली मुर्गा' खाने का आरोप लगाते हुए भाजपा ने मुख्यमंत्री पर वन्यजीव संरक्षण कानून का उल्लंघन करने का दावा किया। मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को खारिज किया और इसे उनके खिलाफ अफवाह बताया।
शिक्षा और बेरोजगारी का मुद्दा
राज्य में अतिथि शिक्षकों की प्रति घंटे की भर्ती नीति पर भी विवाद हुआ। सरकार ने इसे अस्थायी समाधान बताते हुए कहा कि स्थायी तौर पर 15,000 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है।
धार्मिक और सामाजिक कानून
हिमाचल विधानसभा ने भूमि जोत सीमा कानून में संशोधन किया, जिससे सरकार को धार्मिक और धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए 30 एकड़ तक भूमि आवंटित करने की अनुमति मिल गई।
2024 का साल हिमाचल प्रदेश के लिए सियासी झटकों, प्राकृतिक आपदाओं और कुछ हल्की-फुल्की घटनाओं का मिला-जुला अनुभव रहा। आने वाले साल में राज्य किस दिशा में बढ़ेगा, इस पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।
(इनपुट - पीटीआई)
ये भी पढ़ें- Year Ender 2024: कैसा रहा लोकसभा चुनाव का अभियान, कैसे केंद्र में स्थापित हुआ सत्ता का संतुलन?












Click it and Unblock the Notifications