कोटखाई कांड को सुलझाने के लिए हाईकोर्ट ने CBI को दिए दो हफ्ते
CBI ने कोटखाई मामले में प्रदेश HC में अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश की व अदालत से जांच पूरी करने के लिए एक महीने का समय मांगा। जिस पर अदालत ने जांच एजेंसी को दो सप्ताह में जांच पूरी करने का आदेश दिया है।
शिमला। कोटखाई की स्कूली छात्रा के गैंगरेप मर्डर व पुलिस हिरासत में मौत के मामले की सुनवाई के चलते शिमला में हिमाचल हाईकोर्ट के अंदर व बाहर गुरुवार के दिन खासी गहमागहमी रही। सीबीआई ने कोटखाई मामले में प्रदेश हाईकोर्ट में अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश की व अदालत से जांच पूरी करने के लिए एक महीने का समय मांगा। जिस पर अदालत ने जांच एजेंसी को दो सप्ताह में जांच पूरी करने का आदेश दिया है।

इस दौरान जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि मामला बहुत संवदेनशील है, लिहाजा स्टेटस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया जाए। सीबीआई जांच के लिए एक महीना और देने की मांग भी अदालत से की गई लेकिन अदालत ने उसे ठुकरा दिया व जांच को दो सप्ताह में पूरी करने का आदेश दिया। इस दौरान अदालत ने सीबीआई को लताड़ भी लगाई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ के समक्ष सीबीआई ने सील बंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश की। इस दौरान सीबीआई के वकील अंशुल बंसल ने दलील दी कि अभी कोटखाई मामले और सूरज हत्या मामले की जांच पूरी नहीं हुई है, ऐसे में जांच रिपोर्ट को न खोला जाए। उनका तर्क था कि इससे जांच प्रभावित हो सकती है। उनका कहना था कि मामला बहुत ही संवेदनशील है इसलिए रिपोर्ट को सार्वजनिक न किया जाए।

इस बीच हाईकोर्ट ने सीबीआई को सबसे पहले राज्य अतिथि गृह पीटरहॉफ खाली करने का आदेश दिया है। साथ ही कहा है कि जांच तर्क पर नहीं चलती दिख रही है। इस बार हिमाचल के एडवोकेट जनरल श्रवण डोगरा ने कहा कि सीबीआई पहले ये तो बताए कि अभी तक उसने क्या किया है। उन्होंने कहा कि शिमला का मौसम अच्छा है इसलिए सीबीआई को और समय चाहिए। फिलहाल अभी केस को पास ओवर किया गया है, थोड़ी ही देर में फिर से सुनवाई शुरू होगी। सीबीआई ने कोर्ट को कहा कि इस केस में पहले डीजीपी सोमेश गोयल को कोर्ट में बुलाया गया था लेकिन वो शिमला में नही हैं इसलिए आईजी जहूर जैदी (एसआईटी हैड) को बुलाया गया है।

कोटखाई की स्कूली छात्रा मामले में सीबीआई हलाईला के बागवान अनंतराम नेगी, स्थानीय पंचायत प्रधान, एक दर्जन से अधिक नेपालियों, दांदी के जंगल में लकड़ी चीरने का काम कर रहे चरानी व उनकी पत्नियों, आरोपी राजू की माता, आरोपी सूरज की पत्नी, छात्रा के मामा, महासू स्कूल के शिक्षकों, स्कूल के छात्रों व सहपाठियों, परिजनों और कोटखाई पुलिस स्टेशन के पूर्व स्टाफ से भी पूछताछ कर चुकी है। हलाईला के बागवान अनंतराम नेगी से सीबीआई 2 बार लंबी पूछताछ कर चुकी है। इसी तरह 2 संदिग्ध आरोपियों के अलावा 5 बागवानों के भी रक्त के नमूने ले चुकी है। वहीं मामले में आरोपी नेपाली मूल के सूरज की हवालात में हत्या के मामले में सीबीआई 3 पुलिस अफसरों और जवानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सकती है जबकि प्रदेश पुलिस राजू को ही सूरज का हत्यारा बता रही थी।

सूत्रों की मानें तो सूरज की जान राजू की पिटाई से नहीं गई। कोटखाई थाने का पूर्व संतरी भी सीबीआई को बता चुका है कि उसके सामने राजू ने सूरज को नहीं मारा। पुलिस की जांच पर संतरी का बयान कई सवाल खड़े कर रहा है। ऐसे में यदि पुलिस अधिकारियों व जवानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होती है तो उनकी गिरफ्तारी भी तय है। सूत्रों की मानें तो सीबीआई को जांच में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कई सबूत हाथ लगे हैं। उधर कोटखाई की स्कूली छात्रा को इंसाफ दिलाने की मांग को लेकर स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि हाईकोर्ट के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। मुंह पर काली पट्टियां बांधे ये कार्यकर्ता हाईकोर्ट के मुख्य गेट के बाहर धरने पर बैठे हैं। हालांकि हाईकोर्ट के गेट पर न बैठने को लेकर पुलिस और प्रदर्शन करने वालों के बीच बहसबाजी भी हुई।
पुलिस प्रदर्शन कर रहे लोगों को गेट से हटने को कह रही थी, लेकिन प्रदर्शनकारी हटने को तैयार नहीं हुए। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि वो तब तक नहीं उठेंगे जब तक इस मामले में कोई फैसला नहीं आ जाता है। डीसी रोहन ठाकुर भी इन लोगों से यहां प्रदर्शन न करने को लेकर बात करने पहुंचे थे, लेकिन प्रदर्शन कर रहे लोगों ने वहां से हटने से इनकार कर दिया। फिलहाल प्रदर्शनकारी गेट पर ही मौन प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे अपना प्रदर्शन तब तक जारी रखेंगे जब तक सीबीआई इस मामले में कोर्ट के समक्ष अपनी रिपोर्ट पेश नहीं कर देती।












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