विवादों से गहरा नाता रहा है कोटखाई मामले में गिरफ्तार हुए एसपी DW नेगी का, सीनियर अफसर भी नहीं लेते थे पंगा
शिमला। शिमला के पूर्व एसपी डी डब्ल्यू नेगी का पुलिस कैरियर कई बार विवादों में रहा। लेकिन उन पर कार्रवाई की हिम्मत कोई इसलिये नहीं कर पाया कि उन पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का हमेशा ही आर्शीवाद रहा है। वह लंबे समय तक सीएम वीरभद्र सिंह की सुरक्षा में तैनात रहे हैं। नेगी वीरभद्र सिंह के विश्वस्त पुलिस अफसरों में से एक हैं। यही वजह है कि उनके खिलाफ जाने की हिम्मत किसी में नहीं हो पाई। उनका रूतबा इतना था कि पुलिस के डीजीपी तक की उनके खिलाफ कोई कदम उठाने की हिम्मत नहीं होती थी। उनके खिलाफ कई विवाद उभरे भी, लेकिन सब पुलिस मुख्यालय की फाइलों में दब कर रह गये हैं। बीते साल डीडब्ल्यू नेगी का नाम आत्महत्या के लिए उकसाने के एक मामले में सामने आया । लेकिन मामला उनकी राजनैतिक पहुंच के चलते रफा दफा हो गया।

सुसाइड नोट में डी डब्ल्यू नेगी का नाम आया
गौरतलब है कि किन्नौर के रिकांगपिओ थाने में दर्ज एक आत्महत्या मामले में मृतक के पास मिले सुसाइड नोट में डी डब्ल्यू नेगी का नाम आया। सुसाइड नोट से डीडब्ल्यू नेगी समेत तीन पुलिस कर्मियों पर प्रताडि़त करने का आरोप था। यह भी लिखा था कि इनकी प्रताडऩा से तंग आकर वह आत्महत्या कर रहा है। सुसाइड नोट के आधार पर किन्नौर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। लेकिन पुलिस के हाथ डी डब्ल्यू नेगी तक नहीं पहुंच पाये।

एसपी के खिलाफ न तो कोई कार्रवाई हुई और न ही पूछताछ
दरअसल जिला किन्नौर के रारंग पंचायत के खयाडुप ज्ञाछो (45) का शव 13 जून को रिकांगपिओ टैक्सी स्टैंड के पास मिला था। ज्ञाछो की पत्नी भजन देवी ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनके पति ने जहरीला पदार्थ खाकर जान दी है। भजन देवी के अनुसार सुसाइड नोट में मृतक ज्ञाछो ने तीन पुलिस अधिकारियों के नाम और रैंक लिखकर बताया कि वे इनकी प्रताडऩा से तंग आकर आत्महत्या कर रहे हैं। सुसाइड नोट में एसपी शिमला डीडब्ल्यू नेगी, पूह थाने के एएसआई रमेश और हेड कांस्टेबल हुकुम का नाम था। इसलिए अफसरों ने सुसाइड नोट को नजरंदाज कर अज्ञात के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा में मामला दर्ज कर लिया। हालांकि बाद में एएसआई रमेश और हेड कांस्टेबल हुकुम को लाइन हाजिर भी किया गया। लेकिन एसपी के खिलाफ न तो कोई कार्रवाई हुई और न ही पूछताछ की गई है। एसपी किन्नौर ने मामला दर्ज होने की पुष्टि तो की, लेकिन जांच जारी होने का हवाला देकर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया।

मरने वाला व्यक्ति उनका रिश्तेदार था
उधर, उस समय के डीजीपी संजय कुमार का कहना था कि कोई भी सुसाइड नोट में किसी का नाम लिखकर आत्महत्या कर ले तो उससे गुनाह साबित नहीं होता। मामले की जांच चल रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान इस मामले में डीडब्ल्यू नेगी का कहना था कि मरने वाला व्यक्ति उनका रिश्तेदार था। सुसाइड नोट में नाम आने से वे हैरान हैं। उसने उनका नाम क्यों लिखा, वे यह नहीं जानते। उन्होंने तो अपने इस रिश्तेदार की हमेशा मदद ही की है। मामले की जांच चल रही है। सच सामने आ ही जाएगा।

सोलन आरएम महेंद्र सिंह राणा को 72 दिन तक हिरासत में रखा
इसके बाद डी डब्ल्यू नेगी एक ओर विवाद में उस समय फंसे जब इस साल 12 अगस्त को हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के सोलन से निलंबित क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम) महेंद्र सिंह राणा को 72 दिन तक हिरासत में रहने के बाद आरएम ट्रैफिक शिमला के पद पर अपनी बहाली के आदेश के तुरंत बाद शिमला में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि वह शिमला के पूर्व एसपी डीडब्ल्यू नेगी और शिमला पुलिस पर 50 लाख का मानहानि का दावा ठोकेंगे। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने जिस चार किलो से अधिक चिट्टे के साथ उसके पकडऩे का ड्रामा रचा, वह बेकिंग पाउडर निकला। यह बेकिंग पाउडर भी उनकी गाड़ी में नहीं था। वह जल्द ही हिमाचल पुलिस के रिश्वतखोर अधिकारियों का सबूतों के साथ खुलासा करेंगे। उसके बाद नेगी का नाम कोटखाई गैंगरेप मर्डर केस के आरोपी सूरज की हवालात में मौत के मामले में विवादों में आये।












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