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जानिए हिमाचल में कब-कब लहराया भगवा, भाजपा में धूमल युग का अंत

शिमला। पहाड़ पर एक बार फिर भगवा लहरा रहा है। 68 सीटों में से भाजपा ने इस बार 44 सीटों पर कब्जा जमा लिया है। हलांकि पार्टी के सीएम उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल व पार्टी अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती चुनाव हार चुके हैं जिससे पार्टी के सारे समीकरण गड़बड़ा गये हैं। अब नये सिरे से राजनीति की इबारत लिखी जायेगी जिसमें तय होगा कि प्रदेश की कमान किसके हाथ में होगी। इसके लिये कसरत शुरू हो गई है व पार्टी आलाकमान ने केन्द्रीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को प्रदेश के चुने हुये विधायकों की नब्ज टटोलने का जिम्मा सौंपा है।

1990 में पहली बार सत्तासीन

1990 में पहली बार सत्तासीन

इस पहाड़ी प्रदेश के लोगों ने पहले भी कई बार भाजपा को सर आंखों पर बिठाया है। पिछले लोकसभा चुनावों में तो चारों लोकसभा सीटों पर भाजपा ने अपना परचम लहराया था। पिछले इतिहास पर नजर दौड़ायें तो प्रदेश में पहली बार भाजपा 1990 में सत्तासीन हुई थी। विधानसभा चुनाव 1985 में भाजपा को कांग्रेस से बड़ी हार का सामना करना पड़ा था, उस समय इंदिरा लहर के चलते भाजपा का सफाया हो गया था लेकिन 1990 में हुए चुनावों में भाजपा ने जोरदार वापसी की और पहली बार प्रदेश में अपनी सरकार बनाई।

1993 में भाजपा को सिर्फ 8 सीटें

1993 में भाजपा को सिर्फ 8 सीटें

वर्ष 1990 में भाजपा ने जनता पार्टी के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन कर 51 सीटों पर चुनाव लड़ा था और उसे 46 सीटें मिली थी। जनता पार्टी को 11 सीटें मिली। इसी के साथ भाजपा- जनता पार्टी की गठबंधन सरकार गठित हुई। उस दौरान कांग्रेस को मात्र 8 सीटें मिली थी। चुनावों में तीन निर्दलीय भी जीते थे। प्रदेश के मुख्यमंत्री शांता कुमार बने, जिन्होंने पालमपुर से चुनाव जीता था। इसी तरह 1993 में 68 सीटों पर हुए चुनावों में भाजपा मात्र 8 सीटें निकालने में सफल रही।

1998 में भाजपा, 2003 में कांग्रेस, 2007 में भाजपा

1998 में भाजपा, 2003 में कांग्रेस, 2007 में भाजपा

कांग्रेस ने 52 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई। भारतीय जनता पार्टी ने मिली इस हार से सबक लेते हुए 1998 में हुए चुनावों में वापसी की। भाजपा ने प्रदेश में दूसरी बार सत्ता में वापसी की और प्रेम कुमार धूमल मुख्यमंत्री बने। धूमल ने पहली बार मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली। उन्होंने हमीरपुर जिला के बमसन की सीट पर चुनाव लड़ा था। 6 मार्च 2003 तक अपनी जिम्मेदारी निभाई।

प्रदेश की जनता ने 30 दिसंबर 2003 में कांग्रेस को चुना ,लेकिन उन्होंने 2007 में फिर से भाजपा की सरकार में विश्वास रखा और उन्हें एक बार फिर मौका दिया। इस बार प्रदेश में 90.78 प्रतिशत रिकॉर्ड तोड़ मतदान हुआ, जिसमें 43.78 प्रतिशत मतदान भाजपा के पक्ष में रहा और प्रेम कुमार धूमल दूसरी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। भाजपा ने 68 सीटों पर चुनाव लड़ा और 41 सीटें जीतकर चौथी बार अपनी सरकार बनाई। इस दौरान कांग्रेस सिर्फ 23 सीटें हासिल की थीं।

प्रेम कुमार धूमल के युग का अंत

प्रेम कुमार धूमल के युग का अंत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर अब हिमाचल में हुए 2017 चुनावों में भी देखने को मिली। भाजपा ने इस बार कांग्रेस को बुरी तरह से हराकर पांचवी बार राज्य में सरकार बनाई। भाजपा ने 68 में से 44 सीटों पर कब्जा किया, जबकि कांग्रेस ने 21 और अन्य को 3 सीटें प्राप्त हुईं। इसी के साथ भाजपा में धूमल युग का भी अंत हो गया। चुनावों में खुद धूमल व उनके कई समर्थक हार गये हैं।

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