84 साल की विद्या देवी को 53 बरस बाद सुप्रीम कोर्ट से न्याय, भूमि के दावे के साथ ही 10 लाख मुआवजा

हमीरपुर. हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में नादौन के गांव जलाड़ी के पूर्व सैनिक स्व. रघुवीर सिंह की पत्नी 84 वर्षीय विद्या देवी को राज्य सरकार की गलती के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी है। करीब 53 साल तक कोर्ट के चक्कर काटती रही विद्या देवी का 3.34 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा वैध करार दिया गया है। साथ ही विद्या के लिए दस लाख रुपए का मुआवजा देने का भी सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है।

53 साल तक कोर्ट के चक्कर काटे, अब 84 की उम्र में मिला न्याय

53 साल तक कोर्ट के चक्कर काटे, अब 84 की उम्र में मिला न्याय

विद्या देवी को उनके जिदंगी के अंतिम पडाव में पहुंचने पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आना विद्या देवी ने देर से सही, लेकिन न्याय भरा करार दिया है। विद्या के वकील के अनुसार, विद्या को उस जमीन का मुआवजा मिलेगा, जो 53 साल पहले उससे सरकार ने अधिग्रहीत कर ली थी। सुप्रीम कोर्ट ने पाया है कि विद्या की जमीन बिना कानूनी प्रक्रिया पूरी किए हुए ली गई थी। पूर्व सैनिक की पत्नी विद्या देवी व ग्रामीण वर्षों से अधिकारियों व सरकार से बार-बार मुआवजा देने का आग्रह करते रहे, लेकिन उन्हें अंत में सुप्रीम कोर्ट से ही राहत मिली है।

3.34 हेक्टेयर भूमि को सरकार ने कब्जे में लिया था

3.34 हेक्टेयर भूमि को सरकार ने कब्जे में लिया था

विद्या देवी के पति रघुवीर सिंह की 1970 में नौकरी के दौरान मौत हो गई थी। विद्या देवी के दो बेटियां 59 वर्षीय कल्पना देवी व 55 वर्षीय अमिता देवी हैं। कल्पना देवी विधवा हैं और मां के पास ही रहती हैं। दूसरी बेटी अमिता देवी की शादी देशराज निवासी चैड़ू के साथ हुई है जो रेलवे में कार्यरत हैं। उनके दो बेटे सबू और अंकु इंजीनियर हैं। विद्या देवी को दोनों बेटियों का ही मात्र सहारा है। बता दे कि साल 1967-1968 में हिमाचल प्रदेश सरकार ने सड़क निर्माण के लिए जलाड़ी के ग्रामीणों की 20 कनाल जमीन कब्जे में ली थी। इसमें विद्या देवी की 3.34 हेक्टेयर भूमि को भी सरकार ने अपने कब्जे में ले लिया था।

हाईकोर्ट में खारिज हो गया था यह मामला

हाईकोर्ट में खारिज हो गया था यह मामला

नादौन से सुजानपुर सड़क खड्ड के बीच से गुजरती थी। ग्रामीणों ने सरकार से आग्रह किया कि सभी को मुआवजा दिया जाए लेकिन मुआवजा नहीं दिया गया। 2004 में इसी गांव के अनख सिंह ने मुआवजे के लिए हाईकोर्ट में पहला मामला दर्ज किया। उसका फैसला उनके हक में गया। विद्या देवी और दूसरे प्रार्थियों ने दूसरी बैंच में केस कर रखा अजीत सिह व विद्या देवी हाईकोर्ट में केस हार गईं और अन्य सभी ग्रामीण मामला जीत गए। 2013 में विद्या देवी व अजीत सिंह का मामला हाईकोर्ट में खारिज हो गया।

विद्या देवी ने हिम्मत बनाए रखी और केस जीतीं

विद्या देवी ने हिम्मत बनाए रखी और केस जीतीं

विद्या देवी ने हिम्मत बनाए रखी और वर्षों से जमीन के मुआवजे की जंग लड़ रही विद्या देवी निवासी जलाड़ी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जताई है और कहा कि उन्होंने अपनी दो बेटियों व भतीजे के सहारे इस जंग में सफलता हासिल की है।

विद्या देवी के भतीजे की सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया

विद्या देवी के भतीजे की सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया

विद्या देवी के भतीजे ने कहा कि सालों तक कोर्ट के चक्कर काटते रहे। आज सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी है और हमें अपनी जमीन वापस मिली है। पूरे गांव की बीस कनाल भूमि पुल बनाने के लिए ली थी, जिसमें हमारी भी 3.34 हेक्टेयर भूमि भी सरकार ने ली थी। जिस पर अब कोर्ट ने सरकार को लताड़ भी लगाई है और हमें दस लाख मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।

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