टूटी चूड़ियां, बिखरे कपड़े, हाथरस का वो खेत आज भी दे रहा दर्दनाक मंजर की गवाही, देखिए Ground Report
Hathras stampede ground report: उत्तर प्रदेश के हाथरस जनपद मंगलवार को नारायण साकार विश्व हरि भोले बाबा का सत्संग खत्म होने के बाद भगदड़ मच गई थी। इस भगदड़ में 121 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
ऐसे में वन इंडिया हिंदी की टीम हाथरस जनपद के सिकंदराराऊ थाना के फुलरई मुगलगढी के मध्य जीटी रोड के समीप उसे स्थान पर पहुंची जहां यह हादसा हुआ था। हादसा स्थल पर अभी भी दर्दनाक मंजर देखने को मिल रहा है।

सड़क किनारे के गड्ढे और खेत चीख-चीखकर घटना की गवाही दे रहे हैं। खेतों में टूटी हुई चूड़ियां दिखाई दे रही हैं, इसके अलावा भक्तों के बिखरे हुए चप्पल और कपड़े तथा खाने के सामान भी बिखरे हुए हैं।
लोगों के कानों में गूंज रही हादसे की चीख
जिस स्थान पर यह हादसा हुआ था उसे स्थान पर कुछ लोग टहलते हुए दिखाई दिए। उन लोगों द्वारा बताया गया कि सत्संग स्थल पर किस तरह से भीड़ में काबू हो गई और हादसा हो गया।
घटनास्थल के समय पर आसपास के गांव में रहने वाले लोगों का कहना है कि आज भी उनके कानों में हादसे के दौरान महिलाओं और बच्चों की चीख गूंज रही है। लोगों द्वारा बताया गया कि वह काफी दर्दनाक मंजर था।
इस दौरान हमारी मुलाकात वहीं की रहने वाले सोनू नामक एक युवक से हुई। सोनू ने बताया कि लोगों की काफी भीड़ एकत्र हो रही थी हमें पता चला कि बाबा आने वाले हैं तो मैं भी बाबा को देखने के लिए चलाया था।
रास्ता रोके जाने से मची भगदड़
सोनू ने कहा कि मंगलवार दोपहर करीब 12:00 बजे बाबा सत्संग स्थल पर पहुंचे। सत्संग के दौरान बाबा ने अपने भक्तों को प्रवचन दिया उसके बाद जब बाबा सत्संग स्थल से निकलने लगे तो रास्ता रोक दिया गया।
सोनू ने बताया कि इस दौरान बाबा के कमांडो और उनकी खुद की फोर्स ने हाथों का घेरा बना रखा था और यू टर्न लेकर बाबा का काफिला निकलने वाला था। इसी दौरान भक्तों की भीड़ देखकर काफिले की रफ्तार कम हुई।
बाबा की काफिले गिरफ्तार काम होते ही अचानक काफी संख्या में लोग बाबा के पास पहुंचने की कोशिश करने लगे। सड़क की दोनों तरफ काफी संख्या में भीड़ मौजूद थी ऐसे में धक्का मुक्की होने लगी।
सोनू ने सड़क के किनारे उसे खेत को भी दिखाया जिस खेत में अधिकतर लोगों की गिरने से मौत हुई थी। सोनू के साथ ही वहां मौजूद अन्य लोगों ने बताया भी सड़क के किनारे खेत में ढलान होने के चलते पहले कुछ महिलाओं का पर फैसला और भी गिर गईं।
गिरने के बाद भीड़ इतनी अधिक थी कि लोग कंट्रोल नहीं कर पाए और भगदड़ मच गई। जो भी महिला पुरुष बच्चे उसे खेत के समीप पहुंचे हुए फिसल कर गिरते रहे और भीड़ उनको कुचलते हुए आगे बढ़ती रही।
चारों तरफ पड़ी थी लाश ही लाश
समीप के गांव के रहने वाले एक वृद्ध बताते हैं कि जब उन्हें हादसे की जानकारी हुई। जानकारी मिलने के बाद वह वह भी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि वहां पहुंचने के बाद खेत में और सड़क पर लाशें पड़ी हुई थीं।
कीचड़ होने के चलते कुछ महिलाएं उसमें भी दब चुकी थी। नाक मुंह में मिट्टी घुस चुकी थी। देखने से ही पता चल रहा था कि उनकी सांसे थम चुकी हैं। वृद्ध द्वारा यह भी बताया गया कि यदि समय पर एंबुलेंस और अन्य वाहन पहुंच गए होते और कुछ लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
इस हादसे को लेकर स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों द्वारा नारायण साकार विश्व हरि भोले बाबा को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि बाबा खुद को परमात्मा कहते हैं तो फिर इतनी मौत कैसे हो गई?
सेवादार हो गए थे फरार
घटनास्थल पर हमें अनुज यादव नामक एक युवक मिला। अनुज ने बताया कि घटना के बाद वहां ना तो सेवादार मौजूद मिले ना ही भोले बाबा से जुड़े लोग। गांव के लोग वहां पहुंचे और किसी तरह कीचड़ में फंसी महिलाओं और बच्चों को बाहर निकाले।
भले ही इस मामले में अभी तक बाबा के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है लेकिन स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि इस मामले में बाबा के साथ ही पुलिस प्रशासनिक अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। सभी दोषी लोगों के खिलाफ सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए।












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