Nayab Singh Saini कौन हैं, हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के पीछे भाजपा की रणनीति
भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा राज्य इकाई में शुक्रवार को बड़ा फेरबदल किया है। केंद्रीय नेतृत्व ने फेरबदल करते हुए प्रदेश अध्यक्ष के पद पर नायब सिंह सैनी को नियुक्त किया है। वहीं ओपी धनखड़ को राष्ट्रीय सचिव के पद पर नियुक्त किया है।
कुरुक्षेत्र से बीजेपी सांसद नायब सिंह सैनी की नियुक्ति ऐसे समय की गई है। जब देश के पांच राज्यों में चुनाव चल रहे हैं। वहीं साल 2024 में लोकसभा चुनाव के बाद हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने हैं। जिसे देखते इस नियुक्ति को काफी अहम माना जा रहा है।

अचानक से बीजेपी द्वारा ओपी धनखड़ को हटाकर नायब सिंह को अध्यक्ष बनाए जाने के बाद कई तरह के कयास लगने शुरू हो गए हैं। नायब सिंह सैनी को अध्यक्ष बनाया जाना बीजेपी की नई रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
बीजेपी हरियाणा में कई चुनौतियां का सामना कर रही है। जहां एक तरफ जाट नाराज बताए जा रहे हैं। तो वहीं किसानों का मुद्दा भी सरकार के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। इसके अलावा पहलवान का अंदोलन भी सरकार को चुनौती दे रहा है।
अब बीजेपी अध्यक्ष बदलकर 'जाटलैंड' में सबके गले-शिकवे दूर करने के लिए बड़ा दांव चल है। बीजेपी ने ओबीसी समुदाय से आने वाले नायब सिंह सैनी को कांग्रेस के जातीय जनगणना और ओबीसी के मुद्दे को ध्यान में रखते कमान सौंपी है। बीजेपी इनके जरिए ओबीसी को साधने की कोशिश कर रही है।
हरियाणा में अब तक चले आ रहे जाट प्रदेश अध्यक्ष और नॉन जाट सीएम के फॉर्मूले में बदलाव किया है। ख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के करीबी माने जाने वाले सैनी की संगठन पर काफी अच्छी पकड़ मानी जाती है। 2024 से पहले नायब को प्रदेश अध्यक्ष चुनकर बीजेपी ने ना सिर्फ ओबीसी समुदाय, बल्कि किसानों से लेकर पहलवानों की नाराजगी को दूर करने की तैयारी
कर रही है।
कांग्रेस जातिगत आरक्षण का मुद्दा उठा रही है और ओबीसी समुदाय को लेकर बीजेपी की घेराबंदी कर रही है। ऐसे में बीजेपी राज्य की कमान ओबीसी नेता के हाथ में देकर संदेश देना चाह रही है। बता दें कि, प्रदेश में बीसी (बैकवर्ड क्लास) समाज की आबादी करीब 31 फीसदी और एससी 21 फीसदी हैं। वहीं राज्य में 25 प्रतिशत के करीब जाट वोट हैं। चुनाव में यह समाज किंगमेकर की भूमिका में देखा जाता है।
हरियाणा में ये बात चर्चा में रहती है कि जाट समाज बीजेपी के साथ नहीं जाता है। ऐसे में बीजेपी नहीं चाहेगी की उसके हाथ से ओबीसी वोट बैंक भी खिसक जाए। जिसके लिए बीजेपी लगातार रणनीतियों में परिवर्तन कर रही रही है। बीजेपी अब सिर्फ नॉन जाट वोट बैंक पर ही फोकस रखकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है। हरियाणा में सैनी जाति की आबादी करीब 8% मानी जाती है। कुरूक्षेत्र, यमुनानगर, अंबाला, हिसार और रेवाड़ी जिलों में अच्छी खासी संख्या है।
इसके अलावा बीजेपी ने सीएम खट्टर के पंसद के किसी आदमी को अध्यक्ष बनाना चाहती थी। वहीं सीएम खट्टर भी यही चाहते थे कि उनके खेमे का कोई नेता प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए, जो उनके साथ सही ढंग से तालमेल करके काम कर सकें।
कौन हैं नायब सिंह सैनी?
नायब सिंह इस समय कुरुक्षेत्र से सांसद हैं। वे 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले विधायक भी रह चुके हैं। 2014 में नायब सिंह ने अंबाला जिले की नारायणगढ़ सीट से विधानसभा चुनाव जीता था। बाद में खट्टर सरकार में मंत्री बनाए गए। जब 2019 का चुनाव आया तो पार्टी ने नायब को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी और कुरुक्षेत्र से टिकट देकर चौंका दिया था।
तब भी नायब सिंह संगठन के भरोसे पर खरे उतरे और चुनाव जीत लोकसभा पहुंचे। 2014 में मुख्य धारा की राजनीति में आए नायब सिंह सैनी 9 साल के अंदर पहले विधायक बने, फिर राज्य सरकार में मंत्री, उसके बाद लोकसभा सांसद और अब संगठन में सबसे बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।












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