'मजबूरियां यहां लेकर आती हैं', राजनीति के मैदान में अपनी पारी को लेकर खुलकर बोलीं विनेश फोगाट
पहलवान विनेश फोगाट खेल के मैदान के बाद अब राजनीति के मैदान में हैं। वह हरियाणा में जींद जिले की जुलाना विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। राजनीति के मैदान में आने के बाद फोगाट का कहना है कि राजनीति में आने की जरूरत नहीं थी, ये मजबूरियां हैं जो यहां लेकर आती हैं।
आज हमारे हरियाणा से नौजवान विदेश जा रहे हैं, वो ऐसी जगह जा रहे हैं जहां वो सुरक्षित नहीं है। हम चाहते हैं कि लोगों की जो मजबूरी हैं, उसे दूर किया जाए।

धीरे-धीरे सीखूंगी
विनेश फोगाट ने कहा कि जुलाना में पहली बार किसी महिला को टिकट मिला है, यह बड़ी उपलब्धि है। जब मैं गांव में जाती हूं तो महिलाएं बढ-चढ़कर हिस्सा लेती हैं।
मेरी इतने लोगों में रहने की आदत नहीं है, लेकिन सीखेंगे, हर चीज में समय लगता है, लेकिन धीरे-धीरे मैं सीखूंगी। हमने लोगों को खेल के जरिए प्रेरित किया है, लेकिन अब हम राजनीति में भी लोगों को प्रेरित करेंगे।
मेडल लेकर कौन ही जाता राजनीति में
राजनीति में आने के अपने फैसले को लेकर विनेश ने कहा कि मैंने यह फैसला ओलंपिक के बाद लिया है। कौन ओलंपिक के फाइनल में गोल्ड लाने के बाद बोलेगा कि वह राजनीति में जाना जाता है।
हर किसी ने मेरे सामने यह मांग रखी कि आपको आगे आना पड़ेगा। आपको लड़ना पड़ेगा, आप घर में बैठकर रो नहीं सकती। मैं अपने अंदर लड़ने वाली सोच को जिंदा रखना चाहती हूं।
सच्चाई को डायवर्ट नहीं किया जा सकता
विनेश ने कहा कि मैंने पहले कभी यह नहीं सोचा था कि राजनीति में आऊंगी। कोई भी लड़की सड़क पर आकर कपड़े फड़वाकर, बाल नोचवा कर राजनीति में आने की सोच नहीं रखती है। आप सच्चाई की लड़ाई को डायवर्ट नहीं कर सकते हैं।
विनेश फोगाट ने कहा कि आपके सांसद (बृजभूषण शरण सिंह) ने गलती की है, इसे आपको मानना ही पड़ेगा। मुझे किसी भी बात का अफसोस नहीं है। अगर हम अपने देश की बेटियों को ऐसे दरिंदों से बचाना चाहते हैं तो यह मेरे लिए गर्व की बात है। बहुत सारे लोग कहते हैं कि लड़कियां डरने लगी हैं, मैं ऐसा नहीं मानती हूं।
हमने सड़क पर लड़ाई लड़कर देखी, आखिर क्या मिला, ये मजबूरियां हैं, कोई भी लड़की अगर ऐसे कदम उठाती है तो लोग सवाल खड़ा करते हैं। समाज मजबूत लड़कियों को स्वीकार नहीं करता है। उन्हें लगता है कि कैसे यह आवाज उठा सकती है।
कांग्रेस को क्यों चुना
कांग्रेस चुनने की वजह पर विनेश ने कहा कि मेरे किसी भी पार्टी के साथ अच्छे रिश्ते नहीं थे। मेरे पास किसी भी नेता का नंबर नहीं था। पहली बार मेरे पास दीपेंदर हुड्डा का कॉल आया था। मैंने पहली बार किसी नेता से बात की थी। जो पार्टी ऐसे आदमी के साथ खड़ी हो जाए तो झूठा हो, तो आप उसके साथ कैसे जा सकते हैं।
विनेश ने कहा कि मेडल आता है तो सब फोन करते हैं, मैं जब फाइनल में पहुंची तो किसी का भी फोन नहीं आया। ओलंपिक में जब डिस्क्वालिफाई हुई तो मुझे किसी ने फोन नहीं किया।
पीटी ऊषा को लेकर उन्होंने कहा कि आखिर वो रिपोर्ट कहां है जो आंदोलन के दौरान उन्हें बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। वो भी अपनी पार्टी के सांसद को बचाने के लिए खड़ी हो गईं। हम उम्मीद करती हूं कि एक खिलाड़ी होने के नाते आप हमारा समर्थन करें।
सरकार झूठ बोल रही
ओलंपिक में डिस्क्वालिफाई होने पर विनेश ने कहा कि सरकार झूठ बोल रही है, वो कह रहे हैं कि हमने 70 लाख रुपए खर्च किए। लेकिन मैं कहती हूं कि मैं एक करोड़ रुपए देती हूं, आप गोल्ड मेडल लेकर दिखाइए।
अगर आज भी हमारे देश में खेल बाकी है तो सरकार को उसका क्रेडिट लेने की जरूरत नहीं है। मेरा ऑपरेशन हुआ तो किसी ने भी नहीं पूछा कि आपको क्या मदद चाहिए।
जुलाना में कांग्रेस 15 साल से जीती नहीं है, ऐसे में यहां से अपनी उम्मीदवारों पर विनेश ने कहा कि मैं ना अति उत्साहित हूं और ना ही डल हूं, मैं रोजाना अपने काम पर फोकस कर रही हूं। मैं पूरी जिम्मेदारी से अपनी विधानसभा में काम कर रही हूं। अगर मैंने दिल-जान से मेहनत की तो जीत मिलेगी।
अगर चुनाव जीतती हैं तो क्या करेंगी, उसपर विनेश ने कहा कि अगर कोई खिलाड़ी शोषण का शिकार होता है तो उसे भरोसा होनी चाहिए कि उसके लिए कोई है।












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