किसान आंदोलनः जजपा की महिला नेता ने पद से दिया इस्तीफा, 4 साल की तनख्वाह भी किसानों को देंगी

करनाल। केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों के विरोध-प्रदर्शन को आधे महीने से ज्यादा हो गया है। पंजाब-हरियाणा समेत कई राज्यों के किसान राजधानी दिल्ली और उससे लगती सीमाओं पर डटे हुए हैं। इसमें हिस्सा ले रहे हजारों लोग अब आंदोलन तेज करने में जुटे हैं। वहीं, कई राजनीतिक दल और अन्य संगठन भी इसे समर्थन दे रहे हैं। वहीं, जजपा-भाजपा जैसे सत्ताधारी दलों में इस्तीफों का दौर भी शुरु हो गया है। इसी क्रम में जजपा की सबसे कम उम्र की जिला परिषद वार्ड 22 से सदस्य कुलजीत कौर अलग हो गईं।

support to farmers, Haryana JJPs district council member resigns

कुलजीत कौर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और कहा कि, मैंने किसानों के समर्थन में उपायुक्त करनाल को इस्तीफे की कॉपी सौंपी है। उन्होंने कहा कि, मैंने पिछले 4 सालों में मिली सैलरी को भी किसान आंदोलन में बैठे किसानों की सेवा में देने का फैसला किया है। कुलजीत कौर बोलीं कि, अगर किसानों के लिए पार्टी भी छोड़नी पड़ी तो छोड़ दूंगी। उन्होंने कहा कि किसान ही हमारे देश की रीढ़ की हड्डी होते हैं। उन्होंने कहा कि, सभी को किसानों के समर्थन में खड़े होना चाहिए।

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उधर, आंदोलन के 15वें दिन सूबे की काफी महिलाएं किसानों के समर्थन में कुंडली बॉर्डर पर आ जुटीं। बताया गया कि, पानीपत से 40 महिलाएं यहां पहुंचीं। उनमें से कई ने कहा कि नेता संसद में बैठकर कानून बना देते हैं, जबकि खेतों में किसान मेहनत करता है जिसका पूरा फल उसे नहीं मिल पाता। वहीं, इस दौरान किसानों ने ऐलान किया कि, अब देशभर में ट्रेनें रोकी जाएंगी। किसान संगठनों के पदाधिकारियों ने अंबानी-अडानी के सामान के बहिष्कार की भी बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि, वार्ता बंद नहीं हुई, बल्कि सरकार घुमा रही है।

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