Opinion: दिव्यांग और मंदबुद्धि बच्चों के साथ हर कदम खड़ी है हरियाणा सरकार
हरियाणा सरकार की ओर से उन दिव्यांग और मंदबुद्धि बच्चों के लिए विशेष योजना चलाई जा रही है, जो अपनी शारीरिक-मानसिक परेशानियों के चलते स्कूल नहीं जा पाते। चालू वित्त वर्ष में इसके 11 हजार से ज्यादा लाभार्थी हैं।

हरियाणा सरकार ने उन बच्चों को भी अकेला नहीं छोड़ा है, जो दिव्यांगता या मंदबुद्धि या ऐसी ही समस्याओं की वजह से स्कूल भी नहीं जा पाते। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में भी शारीरिक या मानसिक रूप से कमजोर ऐसे बच्चों को सहारा देने का काम किया है और इस तरह की सहायता उन्हें तब तक मिलती है, जबतक वे 18 साल के नहीं हो जाते। 18 वर्ष की आयु प्राप्त करते ही यह ऐसे मामलों से जुड़े व्यस्कों को मिलने वाली वित्तीय सहायता के दावेदार बन जाते हैं।

स्कूल न जा पाने वाले दिव्यांग बच्चों को सहायता
'स्कूल न जाने वाले दिव्यांग बच्चों को वित्तीय सहायता' योजना के तहत उन बच्चों को हरियाणा सरकार की ओर से वित्तीय और दूसरी मदद दी जाती है, जो अपनी दिव्यांगता की वजह से औपचारिक शिक्षा या प्रशिक्षण आदि ले पाने में असमर्थ हैं। ये ऐसे बच्चे हैं, जो पूरी तरह से अपने माता-पिता या रिश्तेदारों पर निर्भर होते हैं। उनपर हर पल नजर रखनी पड़ती है। इस योजना के तहत सहायता राशि 18 साल होने तक प्रत्येक दिव्यांग बच्चों के लिए उपलब्ध कराई जाती है।

हर महीने 1900 रुपए की वित्तीय सहायता
चालू वित्त वर्ष या साल 2022-23 में 'स्कूल न जाने वाले दिव्यांग बच्चों को वित्तीय सहायता' योजना के तहत हरियाणा सरकार ने कुल 3,858 लाख रुपए का बजट प्रावधान रखा है। 19 मार्च, 2023 तक इस योजना का लाभ उठाने वाले लाभार्थियों की संख्या 11,111 हो चुकी है। 1 अप्रैल, 2021 से इस योजना के तहत लाभार्थियों के लिए हर महीने 1900 रुपए का भत्ता दिया जाता है।

इस योजना के लिए योग्यता शर्तें
'स्कूल न जाने वाले दिव्यांग बच्चों को वित्तीय सहायता' योजना का लाभ उठाने के लिए राज्य सरकार की ओर से कुछ शर्तें निर्धारित की गई है। जैसे लाभार्थी हरियाणा में स्थायी रूप से रह रहा हो। ऐसे मंदबुद्धि बच्चे जिनका IQ 50 से कम हो या 70% या उससे ज्यादा की दिव्यांगता हो। सेरेब्रल पाल्सी,ऑटिज्म या 70% या उससे अधिक एक से अधिक दिव्यांगता के मामले में भी इस योजना का लाभ मिलता है। 100% आर्थोपेडिक दिव्यांगता वाले बच्चे भी इसके लाभार्थी हो सकते हैं।
वैसे तो हरियाणा सरकार की ओर से दिव्यांग और लाचार बच्चों को यह लाभ 2008-09 से ही दिया जा रहा है। लेकिन, अब इसका बजट काफी बढ़ चुका है और भत्ते की राशि में भी काफी वृद्धि की गई है। राज्य सरकार ने ऐसे बच्चों के लिए रोहतक में एक राज्य स्तरीय गृह की भी स्थापना की है। यहां ऐसे बच्चे प्रतिदिन भी आते हैं और छात्रावास की तरह भी रह रहे हैं। यहां ऐसे बच्चों के लिए मेडिकल सुविधा, शिक्षण-प्रशिक्षण, खाने-पीने की भी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है। (दिव्यांग बच्चों वाली तस्वीरें- सांकेतिक)












Click it and Unblock the Notifications