Opinion: बेसहारा बच्चों का सहारा बन चुकी है हरियाणा सरकार
हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर की सरकार बेसहारा बच्चों के लिए बहुत बड़ी सहारा बन चुकी है। राज्य में निराश्रित बच्चों के लिए कई तरह के प्रावधान हैं, ताकि उन्हें व्यस्क होने तक वह हर संसाधन मिले, जिसकी उन्हें जरूरत है।

अगर किसी वजह से कोई बच्चा बेसहारा हो जाए, निराश्रित या अनाथ रह जाए तो उसके लिए जीवन में इससे बड़ी कोई त्रासदी नहीं हो सकती। लेकिन, कई बार दुर्भाग्य से बहुतों को बचपन में ही इस संकट से गुजरना पड़ जाता है। लेकिन, वह लोकतंत्र ही क्या जहां की सरकार ऐसे निराश्रितों को उनके हाल पर छोड़कर निश्चिंत बैठी रहे। क्योंकि, एक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा ही सरकार को ऐसे लोगों के सहायक बनने का उत्तरदायित्व सौंपती है। हरियाणा सरकार एक कल्याणकारी राज्य के रूप में अपनी यह जिम्मेदारी बखूबी निभा रही है। यही वजह है कि मौजूदा वित्त वर्ष में 2 लाख से ज्यादा बेसहारा बच्चों के लिए मनोहर लाल खट्टर सरकार सबसे बड़ा सहारा बनकर उभरी है।

निराश्रित बच्चों को वित्तीय सहायता योजना
हरियाणा सरकार निराश्रित बच्चों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए एक योजना चला रही है। इस योजना के तहत जो बच्चे अपने माता-पिता की मौत या लंबे समय तक जेल में होने, लंबी बीमारी या किसी मानसिक समस्या की वजह से उचित देखभाल से वंचित रह जाते हैं, उनके लिए 21 साल की उम्र तक वित्तीय सहायता दी जाती है। यह वित्तीय सहायता उनके माता-पिता/अभिभावकों को दिया जाता है, ताकि ऐसे बच्चों को संभालने में उन्हें वित्तीय अड़चन न आए।

इन परिस्थितियों में बेसहारों का सहारा बनती है सरकार
इस योजना के लिए पात्रता शर्त ये है कि एक परिवार में अधिकतम दो ही बच्चों को यह वित्तीय सहायता दी जाती है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की सरकार ने 1 अप्रैल, 2021 से इस योजना के तहत दी जाने वाली सामाजिक सुरक्षा राशि को प्रति बच्चा बढ़ाकर 1600 रुपए मासिक कर दिया है। यह वित्तीय सहायता 21 साल की आयु तक उन बेसहारा बच्चों के लिए है, जो किसी वजह से माता-पिता की सहायता से वंचित रह जाते हैं। यानि चाहे माता-पिता की असामयिक मौत हो गई हो या पिता किसी वजह से पिछले दो वर्षों से घर से गायब हो या माता/पिता को कम से कम एक साल की जेल की सजा हुई हो या वो शारीरिक और मानसिक रूप से माता-पिता की जिम्मेदारी संभालने में सक्षम न हों।

2,00,598 निराश्रित बच्चों को मिल रहा है लाभ
इस योजना का लाभ लेने के लिए आवश्यक है कि माता-पिता/ अभिभाकों की सालाना आय 2,00,000 रुपए से अधिक न हो। हरियाणा सरकार की वेबसाइट पर साल 2020-21 तक के जो आंकड़े उपलब्ध हैं, उसके अनुसार उस साल सरकार ने इस योजना पर 354 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए थे। जबकि, अप्रैल 2021 से सहायता राशि बढ़ चुकी है और लाभार्थियों की संख्या भी 13 मार्च, 2023 तक बढ़कर 2,00,598 हो चुकी है। हरियाणा सरकार सामाजिक पेंशन योजनाओं पर जो कुल रकम खर्च कर रही है, उसमें से 8.85% ऐसे ही निराश्रित बच्चों पर खर्च हो रही है।
'मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना'
इतना ही नहीं हरियाणा सरकार ऐसे बच्चों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए उनके पालन-पोषण से लेकर नौकरी और शादी तक पर अलग से ध्यान दे रही है। हरियाणा सरकार का बेसहारा बच्चों के प्रति जिम्मेदारी वाला रवैया तब विशेष रूप से देखने को मिला था, जब कोरोना की वजह से अनाथ हुए बच्चों की सहायता के लिए उसने 'मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना' शुरू की थी। इस योजना के तहत जिन बच्चों ने कोविड की वजह से अपने माता-पिता को खो दिया था, उनकी देखभाल करने वाले परिवारों को प्रति बच्चा हर महीने 2,500 रुपए की सहायता देने की व्यवस्था की गई थी। यही नहीं जब तक ये बच्चे 18 साल की उम्र प्राप्त कर लेते हैं, इन्हें अलग से सालाना 12,000 रुपए की राशि देने की भी व्यवस्था की गई है। (तस्वीरें- सांकेतिक)












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