भैंस की मौत पर मृत्यभोज, 2 गांवों के 400 लोगों को न्योता, 30 साल से थी परिवार का हिस्सा
हिसार। उस भैंस की उम्र 30 वर्ष थी। वह रोजाना 18 से 20 लीटर दूध दिया करती थी। कहने को तो महज एक जानवर थी, मगर इस परिवार में उसकी हैसियत किसी सदस्य से कम नहीं थी। शायद यही वजह है कि जब वह दुनिया से विदा हुई तो उसे परिवार के सदस्य की तरह विदाई दी गई। किसी इंसान के निधन पर निभाए जाने वाले हर वो रस्मों रिवाज निभाए गए। यहां तक की सामाजिक बुराइयों में से एक मृत्युभोज भी किया गया, जिसमें दो गांवों के 400 लोगों ने शिरकत की। पशु प्रेम का यह मामला हरियाणा के हिसार जिले के गांव धांसू का है।

मीडिया रिपोर्टर्स के अनुसार हिसार के गांव धांसू के जगदीश और सुभाष के परिवार में पिछले 30 साल से एक भैंस थी, जिसमें 21 अगस्त 2019 को मौत हो गई। इस पर जगदीश के परिवार ने फैसला लिया कि भैंस की इस दुनिया से विदाई परिवार के सदस्य की तरह होगी।
भैंस का शव जमीन में दफन किया गया। उसे पूरे रीति रिवाज के साथ श्रद्धांजलि दी और अंतिम विदाई दी गई। गांव जगदीश के परिवार ने घरेलू पशु के प्रति अपने प्रेम को इस कदर ग्रामीणों के सामने प्रस्तुत किया कि सब देखकर हैरान थे। परिवार के लोगों की आंखों में आंसू भी देखने को मिले। गांव में पहला मामला होने के कारण ग्रामीण भी इसको देखकर हैरान थे। सुभाष ने बताया कि करीब 30 साल तक भैंस उनके परिवार का हिस्सा रही। इसलिए हर किसी का उससे लगाव हो गया था। परिवार ने भैंस को अपने परिवार का सदस्य ही मान लिया। भैंस की मौत पर परिवार ने मृत्युभोज भी भोज किया, जिसमें गांव धांसू और मिर्जापुर गांव के करीब 400 लोगों को आमंत्रित किया गया।












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