करनाल लाठीचार्ज के मामले ने पकड़ा तूल, संयुक्त किसान मोर्चा ने उठाई हरियाणा में राष्ट्रपति शासन की मांग
किसान नेता विकल पचार ने कहा कि करनाल लाठीचार्ज के दौरान मात्र डेढ़ एकड़ के शहीद किसान सुशील काजल के परिजनों को सहायता राशि एक परिवारिक सदस्य को नौकरी के लिए हरियाणा सरकार की तरफ से कोई घोषणा नहीं की गई है।
चंडीगढ़, सितंबर 1, 2021। करनाल में किसानों पर लाठीचार्ज का मामला दिन पर दिन तूल पकड़ता जा रहा है। इस बाबत कई किसान संगठन ने नारज़गी ज़ाहिर की और हरियाणा सरकार से कार्रवाई की भी मांग की है। वहीं किसान नेता जगबीर घसौला ने कहा कि निहत्थे किसानों पर लाठीचार्ज के आदेश देने वाले ड्यूटी मजिस्ट्रेट को तुरंत प्रभाव से टर्मिनेट किया जाए।

कार्रवाई की मांग
लाठीचार्ज में शामिल पुलिस के अधिकारी और कर्मचारियों को तुरंत प्रभाव से निलंबित करने के साथ-साथ उन पर आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।अगर हरियाणा सरकार कार्रवाई करने में विफल रहती है तो राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंप कर हरियाणा में राषट्रपति शासन लगाने की मांग करेंगे।हरियाणा प्रदेश में देश के अन्नदाता के ऊपर इस प्रकार से कई बार बर्बरता की गई है जिससे स्पष्ट होता है कि
हरियाणा प्रदेश में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं रही, प्रशासन बिल्कुल बेलगाम हो चुका है। प्रदेश के अंदर जंगलराज चल रहा है।
इस बात को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के अंदर राष्ट्रपति शासन लगाना अति आवश्यक हो गया है।
हरियाणा सरकार के तरफ़ से नहीं हुई घोषणा
किसान नेता विकल पचार ने कहा कि करनाल लाठीचार्ज के दौरान मात्र डेढ़ एकड़ के शहीद किसान सुशील काजल के परिजनों को सहायता राशि एक परिवारिक सदस्य को नौकरी के लिए हरियाणा सरकार की तरफ से कोई घोषणा नहीं की गई है।इसके साथ साथ सिंधु बॉर्डर कमेटी और टिकरी बॉर्डर कमेटी को देश के किसानों ने करीब 1200 करोड़ रुपए चंदे के रूप में दिए हुए हैं लेकिन संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से किसी नेता ने शवजनों को सहायता राशि देने की बात अब तक नहीं की है। जिस बात से साफ स्पष्ट होता है कि देश की जनता ने जो चंदा किसानों की सहायता के लिए दिया गया था उस चंदे का प्रयोग किसान नेता अपनी सुख-सुविधाओं में प्रयोग कर रहे हैं।
मदद के लिए कोई भी तैयार नहीं
किसान नेता प्रदीप धनखड़ ने कहा कि आंदोलनों के दौरान शहीद हुए किसानों के परिजनों को हरियाणा सरकार से पहले भी सहायता राशि दिलवाई है। हरियाणा सरकार ने पहले भी कई बार मजबूर होकर परिजनों को सहायता राशि दिया था। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि संयुक्त किसान मोर्चा कोई ठोस क़दम उठाने को तैयार नहीं है। किसाने के परिजनों की मदद के लिए कोई भी आगे आने के लिए तैयार नहीं है। सुशील कुमार काजल के परिजनों को सहायता राशि नहीं दी जाती है तो किसान आंदोलन की सहायता के लिए धनराशि देने वाले देश के दान दाताओं को बहुत ही बुरा महसूस होगा।
किसानों के प्रति सरकार की मंशा साफ़ नहीं
किसान नेता डॉ शमशेर सिंह ने कहा कि सरकार को किसानों से वार्ता करके किसान आंदोलन का समाधान निकालना चाहिए क्योंकि पिछले करीब 7 महीने से किसानों एवं सरकार के बीच वार्ता का ना होना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। अब तो देश के किसान सरकार से वार्ता करने के लिए अनेकों बार सरकार को चिट्ठी तक लिख चुके हैं लेकिन सरकार की अनदेखी देश के लोकतंत्र के लिए बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। इस बात से साफ़ ज़ाहिर होता है कि
सरकार आंदोलन को हिंसक बनाना चाहती है और किसानों के प्रति सरकार की मंशा बिल्कुल भी साफ नहीं है।
सरकार किसानों को दिल्ली के बॉर्डर से बिना किसी मांग को पूरा किए खाली हाथ बैरंग ही लौटाना चाहती है। सरकार की इस बात को किसान भलीभांति समझ चुके हैं।












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