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क्या हरियाणा कांग्रेस भी हो रही है गुटबाज़ी का शिकार, अभी तक तैयार नहीं हो पाया है संगठन

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चंडीगढ़, अक्टूबर 18, 2021। पंजाब में कांग्रेस पार्टी गुटों में बंटकर कलह का शिकार हो गई अब उसी तरह हरियाणा में भी कांग्रेस पार्टी गुटों में बंटती चली जा रही है। गुटबाज़ी की वजह से हरियाणा की मुख्य विपक्षी पार्टी होने के बावजूद पिछले सात सालों से संगठनात्मक ढांचा तैयार नहीं कर पा रही है। हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष बने हुए कुमारी सैलजा को दो साल हो चुके हैं लेकिन कुमारी सैलजा संगठन के विभिन्न इकाइयों का गठन नहीं कर पा रही हैं। सियासी गलियारों में यह हलचल है कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा गुट के दबाव की वजह से कुमारी सैलजा अभी संगठन की विभिन्न इकाइयों का गठन नहीं कर सकी हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी की बात की जाए तो हरियाणा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने ओम प्रकाश धनखड़ ने पार्टी के संगठन की सभी इकाइयों गठित कर लिया है। ग़ौरतलब है जजपा और इनेलो भी सियासी ज़मीन मजबूत करते हुए लगातार संगठन विस्तार कर रहे हैं।

hudda and sailja

2005 में हुड्डा बने थे मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री के तौर पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 2005 में हरियाणा के मुख्यमंत्री की गद्दी पर काबिज़ हुए थे। हुड्डा के मुख्यमंत्री बन्ने के बाद 20 जुलाई 2007 को फूलचंद मुलाना को हरियाणा कांग्रेस का प्रधान बना दिया गया जो कि हुड्डा के सबसे करीबी थे। एक सुर में काम करते हुए हुड्डा और मुलाना ने हरियाणा के सभी जिलों में अध्यक्षों की नियुक्ति की और पार्टी का संगठन खड़ा किया। फूल चंद मुलाना द्वारा खड़ा किया गया संगठन हुड्डा के दूसरे कार्यकाल के दौरान भी हरियाणा में सक्रिय रहा। 14 फरवरी 2014 को कांग्रेस आलाकमान ने अशोक तंवर को हरियाणा की कमान सौंपी। ताजपोशी के कुछ दिन बाद ही हुड्डा गुट ने अशोक तंवर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। हुड्डा गुट के विधायकों और नेताओं ने तंवर को कभी अध्यक्ष नहीं माना। तंवर ने कई बार कांग्रेस की कार्यकारिणी व जिला अध्यक्षों को तैनात करने का प्रयास किया लेकिन हुड्डा गुट के दबाव के चलते अशोक तंवर कभी भी सूची जारी नहीं कर सके।
sonia hudda and sailja

कुमारी सैलजा बनाई गईं अध्यक्ष
भूपेंद्र सिंह हुड्डा गुट की वजह से अशोक तंवर को भी सरेंडर करना पड़ गया। अशोक तंवर के कार्यकाल के दौरान हरियाणा में लोकसभा, विधानसभा, पंचायत और स्थानीय निकाय के चुनाव हुए। कांग्रेस बगैर संगठन के फील्ड में उतरी और लगभग सभी चुनाव हारती रही चली। कांग्रेस आलाकमान ने हाईकमान ने हुड्डा गुट को शांत करने के अशोक तंवर को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया। चार सितंबर 2019 को अशोक तंवर की जगह कुमारी सैलजा को हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया गया। दोबारा से अब कुमारी सैलजा के ख़िलाफ़ हुड्डा गुट ने मोर्चा खोल दिया है वहीं कुमारी सैलजा के पास हुड्डा के मुकाबले विधायकों की तादाद भी कम है। ग़ौरतलब है कि हरियाणा में पहले विधानसभा चुनाव, फिर बरौदा विधानसभा उपचुनाव तथा निगम एवं परिषद के चुनाव सभी चुनाव बिना संगठन के हुए। इसी महीने के आखिर में ऐलनाबाद का उपचुनाव होने जा रहा है जिसमें भी कांग्रेस के पास कोई संगठन नहीं है। अगर हुड्डा गुट के दबाव के चलते कांग्रेस संगठन तैयार नहीं कर पाएगी तो वह दिन दूर नहीं है कि कांग्रेस की हरियाणा में सियासी ज़मीन खिसकती चली जाएगी।
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English summary
Is Congress also becoming a victim of factionalism, the organization is not ready yet
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