हरियाणा: INLD नेता अभय सिंह चौटाला का विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा, कहा- किसानों के समर्थन में हूं
चंडीगढ़। भारतीय राष्ट्रीय लोकदल (इनेलो) के नेता अभय सिंह चौटाला ने हरियाणा विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। विधानसभा के अध्यक्ष द्वारा उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया। इस इस्तीफे की वजह अभय सिंह चौटाला ने मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों को ही बताया। अभय सिंह चौटाला ने कहा कि, 'मैं किसानों का हितैषी हूं और कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन करने वालों के साथ खड़ा रहूंगा। उन्होंने कहा कि, किसानों के समर्थन में इसी तरह आगे आना जरूरी है।'
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अपनी पार्टी के एकमात्र विधायक थे
बता दिया जाए कि, अभय सिंह चौटाला इनेलो के इकलौते विधायक थे। अपने इस्तीफे को लेकर वे कई दिनों से बयान दे रहे थे। उन्होंने कहा था, 'किसानों के मुद्दे पर मैं बड़ा फैसला लेने जा रहा हूं।' उन्होंने किसान आंदोलन के पक्ष में ऐलान किया था कि 26 जनवरी तक अगर केंद्र सरकार ने कानून वापस नहीं लिए तो विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे। हुआ भी वैसा ही। पंचकूला में राज्य कार्यकारिणी की बैठक लेने के बाद वह अपने कुछ साथियों के साथ चंडीगढ़ में स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता से मिलने गए और फिर त्यागपत्र सौंपा।

समर्थकों ने कहा- नई शुरुआत होगी
वहीं, विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिए जाने पर अभय सिंह चौटाला के समर्थक उन्हें शाबासी देने लगे हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि, मौजूदा सरकार के काले कानूनों के खिलाफ चौटाला साहब की ये नई शुरूआत होगी। वहीं, अभय का कहना है कि मेरी रगों में ताऊ देवीलाल का खून है। बकौल अभय, ''उन्होंने हमेशा किसानों, कमेरे वर्ग और मजदूरों के हितों की राजनीति की। उनके लिए कुर्सी को हमेशा त्यागा। प्रधानमंत्री सरीखा अहम पद भी छोड़ दिया। मैं तो सिर्फ विधायक का ही पद छोड़ा हूं।''
खाली हुई ऐलनाबाद सीट
अभय के इस्तीफे के साथ ही उनके विधायकी वाली ऐलनाबाद सीट खाली हो गई है। अब नियमानुसार वहां छह माह के भीतर उपचुनाव कराया जाना है। यह उपचुनाव बरोदा विधानसभा के उपचुनाव से भी रोचक होने की संभावना रहेगी। राजनीति के जानकारों का कहना है कि, अभय चौटाला खुद पिछले कई दिनों से फील्ड में हैं और किसान संगठनों का समर्थन कर रहे हैं। वे कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। वह ऐसे विधायक रहे, जिन्हें प्रदर्शनकारियों ने व्यापक समर्थन देने की बात कही। माना जा रहा है कि, किसानों का मुद्दा उठाते हुए ही वे अपनी आगे की दिशा तय करेंगे।












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