Success Story: IAS मुकेश कुमार व उनके ड्राइवर के घर डबल खुशियां, दोनों की बेटियां एक साथ बनीं जज
IAS Driver Daughter judge News: एक चालक के घर अभावों में पली। दूसरी का बचपन आईएएस के बंगले में बीता। जीवन संघर्ष भले ही दोनों का जुदा रहा हो, मगर कामयाबी एक जैसी हासिल की। यह सक्सेस स्टोरी हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारी मुकेश कुमार आहूजा और उनके ड्राइवर होशियार सिंह की बेटियों की, जो दोनों एक साथ जज बनी हैं।
दरअसल, हाल ही हरियाणा ज्यूडिशियल सर्विस एग्जाम 2024 का अंतिम परिणाम जारी हुआ है, जिसमें आईएएस व उनके चालक की बेटियों की दिलचस्प कहानी सामन आई है। हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग (HSAM) बोर्ड में चीफ एडमिनिस्ट्रेटर मुकेश कुमार आहूजा की बेटी पारस और आहूजा के चालक होरिशया सिंह की बेटी समीक्षा जज बनी हैं।

HPSC HCS न्यायिक अंतिम परिणाम 2024 के बाद आईएएस मुकेश कुमार आहूजा व दसवीं पास होशियार सिंह एक साथ ऐसे पिता बन गए हैं, जिनकी बेटियां जज बनने में सफल हुई हैं। होशियार सिंह बीते डेढ़ साल से एचएसएएम बोर्ड में IAS मुकेश कुमार आहूजा के ड्राइवर के पद पर सेवाएं दे रहे हैं।
आईएएस मुकेश कुमार आहूजा की बेटी पारस ने पूरे हरियाणा में 12वीं रैंक हासिल की है जबकि चालक होशियार सिंह की बेटी समीक्षा ने एससी वर्ग में दूसरा स्थान हासिल किया। मीडिया से बातचीत में मुकेश कुमार आहूजा बोले कि जब पता चला कि पारस की तरह ही समीक्षा भी न्यायिक सेवा परीक्षा की तैयारी कर रही है तो दोनों बेटियों को मिलाया था। बच्चे सभी के बराबर होते हैं।
उधर, बेटी की कामयाबी पर गौरवान्वित हो रहे चालक होशियार सिंह कहते हैं कि यह तो किस्मत की बात है कि मैं चालक और साहब आईएएस बने। सपन में भी नहीं सोचा था कि मेरी बेटी भी जज बन जाएगी। दोनों बेटियों के जज बनने पर इस बार की दिवाली की खुशियां दोगुनी हो गई।
पिता को पता था अफसरों की लाइफ कैसी होती है-समीक्षा
जज बनने के बाद समीक्षा ने भी मीडिया से बात की। बोलीं कि साल 2007 से उनके पिता अफसरों के साथ तैनात हैं। पिता को मालूम था कि अफसरों की लाइफ स्टाइल कैसी होती है? इसलिए वे हमेशा चाहते थे कि बेटी भी अफसर बने। बचपन में किताबों में जजों की तस्वीर देखकर प्रेरित हुआ करती थी। तभी तय कर लिया था कि जज बनूंगी।
समीक्षा के चयन पर खुद से ज्यादा खुशी-पारस
मीडिया से बातचीत में पारस ने कहा कि HPSC HCS न्यायिक अंतिम परिणाम 2024 देखने के बात पता चला कि समीक्षा का भी चयन हो गया तो खुद के चयन से दोगुनी खुशी हुई। मैं प्रिविलेज्ड परिवार से हूं । बचपन से माहौल भी ऐसा ही मिला, मगर समीक्षा ने अभावों पलकर कड़ी मेहनत की। उसके परिवार ने भी पूरा सपोर्ट किया।












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