छत्रपति हत्याकांड में गुरमीत राम रहीम को बड़ी राहत, पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने किया बरी
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने शनिवार को एक बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाला फैसला सुनाया। कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में बरी कर दिया है। साल 2019 में सीबीआई की विशेष अदालत ने राम रहीम को इस हत्या की साजिश रचने का दोषी पाया था और उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसे अब कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस विक्रम अग्रवाल की बेंच ने 2019 के फैसले को चुनौती देने वाली अपीलों पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया। कोर्ट ने राम रहीम के खिलाफ लगे आरोपों को रद्द कर दिया है, हालांकि इस मामले के अन्य तीन दोषियों-कुलदीप, निर्मल और किशन लाल-की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया है।

अदालत का विस्तृत फैसला अभी आना बाकी है, जिसमें यह स्पष्ट होगा कि किस आधार पर राम रहीम की सजा को रद्द किया गया।
क्या था मामला?
- 2002 की घटना: सिरसा के स्थानीय अखबार 'पूरा सच' के संपादक रामचंद्र छत्रपति को अक्टूबर 2002 में उनके घर के बाहर गोलियों से छलनी कर दिया गया था।
- हत्या का कारण: छत्रपति ने अपने अखबार में डेरा के भीतर साध्वियों के यौन शोषण से जुड़ा एक गुमनाम पत्र छापा था, जिसके बाद उन पर हमला हुआ।
- सीबीआई जांच: लंबी कानूनी लड़ाई के बाद केस सीबीआई को सौंपा गया, जिसने राम रहीम को मुख्य साजिशकर्ता के रूप में नामजद किया था।
अंशुल छत्रपति का बयान: 'यह एक बड़ा झटका है
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, शहीद पत्रकार के बेटे अंशुल छत्रपति ने इस फैसले पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा: 'यह हमारे लिए एक बहुत बड़ा झटका है। पिछले 25 वर्षों से हम इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं। हमारा संघर्ष डेरा प्रमुख के खिलाफ था, क्योंकि मेरे पिता की दुश्मनी शूटरों से नहीं, बल्कि उस व्यक्ति से थी जिसे वे बेनकाब कर रहे थे। हम इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।'












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