Haryana Result: कैसे कट्टर-विरोधियों ने एक होकर BJP के पक्ष में बदली तस्वीर, 6 में से 5 सीटों पर दिलाई जीत

Haryana Result 2024: राजनीति में एक कहावत है कि कोई किसी का स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता। हरियाणा चुनाव में बीजेपी को जीत मिलनी थी तो दो कट्टर-विरोधी परिवारों ने भी इसके लिए हाथ मिलाने में देरी नहीं की और दो जिलों की 5 सीटों पर पार्टी को फायदा दिला दिया। दिलचस्प बात ये है कि दोनों परिवारों के बीच सियासी अदावत करीब साढ़े तीन दशकों से चल रही थी।

हरियाणा में चुनाव अभियान के दौरान इस बात की खूब चर्चा हो रही थी कि कभी के सियासी-विरोधी भिवानी सांसद धरमबीर सिंह अपने पुराने सियासी दुश्मन बंसीलाल के परिवार के लोगों के साथ-साथ प्रचार कर रहे हैं। पूर्व सीएम के परिवार की तीन पीढ़ियों को वह चुनावों में जरूर हरा चुके हैं, लेकिन इस बार वे तोशाम विधानसभा क्षेत्र में उन्हीं के परिवार के लिए वोट मांगते दिख रहे थे।

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दो सियासी-विरोधियों की जुगलबंदी, भाजपा को मिला फायदा

तोशाम में भाजपा सांसद धरमबीर ने न सिर्फ बंसीलाल की पोती श्रुति चौधरी का समर्थन किया, बल्कि अपनी धुर विरोधी और तोशाम से भाजपा प्रत्याशी की मां किरण चौधरी के साथ-साथ घर-घर जाकर चुनाव प्रचार भी किया। दो पुराने सियासी-दुश्मनी वाले परिवारों की इस चुनावी जुगलबंदी का भाजपा को यह फायदा हुआ कि वह न सिर्फ तोशाम में जीती बल्कि, भिवानी और चरखी दादरी जिलों की 6 में से 5 सीटों पर जीत सुनिश्चित कर दी।

दो जिलों की 6 में से 5 सीटें जीत गई बीजेपी
परंपरागत राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी परिवारों के इस तरह से हाथ मिलाने का फायदा बीजेपी को भिवानी जिले में तोशाम, भिवानी और बवानी खेड़ा विधानसभा सीटों पर जीत के रूप में मिला। पार्टी सिर्फ लोहारू में हारी। इस तरह से दोनों ही जाट नेताओं ने चरखी दादरी जिले की दोनों ही सीटों- चरखी दादरी और बाढरा में भी 'कमल' खिलाने में मदद की।

बंसीलाल परिवार की तीनों पीढ़ियों को हरा चुके हैं धरमबीर सिंह
1987 में धरमबीर सिंह ने पूर्व सीएम बंसीलाल को लोकदल के टिकट पर चुनाव हराया था। इसी सीट पर साल 2000 में उन्होंने बंसीलाल के बेटे और किरण चौधरी के पति सुरेंद्र सिंह को भी हराया था। वहीं 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट पर बंसीलाल की पोती और अब तोशाम से बीजेपी एमएलए श्रुति चौधरी को हराकर तीन पीढ़ियों को हराने का रिकॉर्ड बनाया था।

बीजेपी की किरण चौधरी वाली रणनीति काम कर गई
2014 के विधानसभा चुनाव में तोशाम से किरण चौधरी कांग्रेस प्रत्याशी थीं, तो धरमबीर के भाई लाला ने भी उन्हें कड़ी टक्कर दी थी। धरमबीर और किरण चौधरी दोनों ही कांग्रेस से ही बीजेपी में आए हैं। धरमबीर 2014 में आए थे और किरण चौधरी 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद जून में आई हैं।

बीजेपी ने उन्हें फौरन ही राज्यसभा में भेज दिया और उनकी बेटी को तोशाम से टिकट भी थमा दिया। अब पता चल रहा है कि बीजेपी की रणनीति काम कर गई।

तोशाम में श्रुति चौधरी के सामने इस बार संकट ये था कि कांग्रेस ने उनके चचेरे भाई और बंसीलाल के पोते (बंसीलाल के बड़े बेटे के बेटे) अनिरुद्ध चौधरी को उतारा था। मुकाबला कड़ा था। लेकिन, दो दिग्दगजों की सहायता से न सिर्फ श्रुति चौधरी को जीत मिली, बल्कि भाजपा को भी दो जिलों में जबर्दस्त फायदा मिल गया। बीजेपी प्रत्याशी श्रुति चौधरी अपने भाई को 14,257 वोटों से हराने में सफल रही हैं।

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