Haryana News: हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, प्रदेश में 30 जून तक 433 कॉलोनियां होगी नियमित

Haryana News: हरियाणा में नायब सिंह सैनी की सरकार ने 30 जून तक प्रदेश की 433 अप्रूव्ड कॉलोनियों को नियमित करने का फैसला किया है। इससे पहले 741 कालोनियां नियमित की जा चुकी है। सरकार के इस फैसले के बाद इन कॉलोनी के मालिकों को 1 लाख 71 हजार 368 संपत्तियों को बेचने का अधिकार मिल जाएगा। यह जानकारी शहरी स्थानीय निकाय मंत्री सुभाष सुधा ने दी है।

मंत्री सुभाष सुधा ने कहा कि शहरी क्षेत्र में कृषि भूमि की खरीद या बिक्री के लिए अब नगर परिषदों और नगर पालिकाओं को अनापत्ति प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि भूमि के मालिक अब बिना संपत्ति कर या विकास शुल्क का भुगतान किए सीधे अपनी संपत्तियों का पंजीकरण कर सकते हैं। राज्य में ऐसी लगभग 2 लाख 52 हजार संपत्तियां है।

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मंत्री सुधा ने कहा कि शहरी क्षेत्र में कॉलोनी के भीतर स्थित खाली प्लॉट्स को बेचने की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए आवेदकों को किसी भी बकाया संपत्ति कर और शुल्क को साफ करना होगा। भुगतान के बाद उन्हें नो ड्यूज सर्टिफिकेट प्राप्त होगा। इससे वह अपनी संपत्ति की बिक्री जारी रख सकेंगे। इसके साथ ही लाल डोरा सीमा के भीतर अपनी संपत्तियों को स्वप्रमाणित करने वाले संपत्ति मालिकों को भी अपनी संपत्तियों बेचने की अनुमति दी जाएगी।

मंत्री सुभाष सुधा ने आगे कहा कि 1 लाख 17 हजार 705 संपत्तियों पर आपत्तियों के कारण लोग बकाया राशि जमा नहीं कर पाए थे। अब उन्हें राशि जमा करने की सुविधा प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि शहरी निवासियों की सुविधा के लिए HSVP, HSIIDC और तहसील कार्यालय से सभी पंजीकरण विवरण स्वचालित रूप से नगर निकायों के संपत्ति पोर्टलों पर दिखाई देंगे। इससे लोगों को कार्यालय में जाने या कहीं और सहायता लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे अब इन सेवाओं को घर से ही प्राप्त कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि किसी परिवार के पास एक प्लॉट है और वह उस प्लॉट का एक हिस्सा बेचना चाहते हैं तो वे बिना किसी परेशानी के ऐसा कर सकते हैं। उदाहरण के लिए 100 वर्ग गज के प्लॉट को दो भागों में बांटा जा सकता है। यह नियम शहरी क्षेत्र में नगर निकायों के अधिकार क्षेत्र में स्थित संपत्तियों पर लागू होता है। जिसमें HSVP और HSIIDC और टाउन एंट्री कंट्री प्लानिंग नियमों के तहत लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियां शामिल नहीं है।

मंत्री सुभाष सुधा ने कहा कि पहले मलिक की मृत्यु के बाद संपत्ति के हस्तांतरण में कई वजह से कठिनाई आती थी। इसे हल करने के लिए राज्य सरकार ने फैसला किया है कि नगर निकाय को आवेदन प्राप्त होने पर दो समाचार पत्रों में 30 दिनों का नोटिस जारी करेंगे। इसके बाद उत्तराधिकारी का निर्धारण करेंगे और हस्तांतरण के लिए अनुमति दे दी जाएगी। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी कि लोग लंबे इंतजार के समय से न गुजरे और संपत्ति के अधिकार प्राप्त कर सके।

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