'विधायकों की कुछ इच्छाएं होती हैं', हरियाणा में 3 MLAs के जाने पर सीएम सैनी ने क्या कहा?
Haryana BJP Government: हरियाणा की सैनी सरकार पर अचानक सियासी संकट के बादल मंडरा गए। तीन निर्दलीय विधायकों ने भाजपा सरकार से समर्थन वापस लेकर कांग्रेस को सपोर्ट करने का ऐलान कर दिया है, जिसके बाद अब हरियाणा के सीएम नायाब सिंह सैनी का सरकार के "खतरे" पर नपी-तुली प्रतिक्रिया सामने आई है।
दरअसल रोहतक में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए चरखी दादरी से निर्दलीय विधायक सोमबीर सांगवान, नीलोखेड़ी से निर्दलीय विधायक धर्मपाल गोंदर और पूंडरी से निर्दलीय विधायक रणधीर गोलन ने भाजपा सरकार से अपना समर्थन वापस लेकर कांग्रेस को समर्थन दिया है।

जिसके बाद न्यूज एजेंसी एएनआई ने हरियाणा सीएम सैनी से बात की, जिसमें उन्होंने कहा कि, "विधायकों की कुछ इच्छाएं होती हैं, कांग्रेस आजकल इच्छाएं पूरी करने में लगी हुई है। लोग सब जानते हैं कि किसकी क्या इच्छा है? कांग्रेस को जनता की इच्छाओं से मतलब नहीं है।"
हालांकि मुख्यमंत्री सैनी ने यह नहीं बताया कि भाजपा इस नए खतरे का मुकाबला करने की क्या योजना बना रही है। इधर, सीएम के मीडिया सचिव प्रवीण अत्रे ने कहा कि, "तीन निर्दलीय विधायकों के कांग्रेस को समर्थन देने से हरियाणा सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। आज भी हरियाणा सरकार के पास बहुमत है और वह सुरक्षित है।"
जानिए क्या बोले प्रवीण अत्रे?
उन्होंने बताया कि अगर आप देखें तो संख्याबल के हिसाब से सरकार के पास 47 विधायकों का समर्थन है और इस वजह से सरकार पूरी तरह से सुरक्षित है। अगर कानूनी नजरिए से बात करें तो हरियाणा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता है? क्योंकि पहले विधानसभा के तहत भूपिंदर सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था, जिसे खारिज कर दिया गया, इसलिए अगले 6 महीने तक कोई और अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।"
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का बयान
रोहतक में हरियाणा के तीन निर्दलीय विधायकों द्वारा राज्य सरकार से समर्थन वापस लेने पर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा, "निर्दलीय विधायकों ने भाजपा सरकार से अपना समर्थन वापस लिया है और कांग्रेस को समर्थन करने का फैसला किया है। उन्होंने जनभावनाओं के तहत यह फैसला लिया है... सरकार का नैतिक अधिकार खत्म हो गया है, उन्हें(नायब सिंह सैनी) पद छोड़कर इस्तीफा दे देना चाहिए और यहां राष्ट्रपति शासन लागू करना चाहिए ताकि निष्पक्ष चुनाव हो सके।"












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