Haryana Chunav Result: हरियाणा में कैसे लगी BJP की हैट्रिक? कांग्रेस की हार की 5 बड़ी वजहें
Haryana Result in Hindi: हरियाणा विधानसभा चुनाव में मतगणना हो चुकी है। वहां भाजपा लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है। बीजेपी यही बहुत बड़ी जीत तो है ही, कांग्रेस की बहुत बड़ी रणनीतिक हार भी मानी जा रही है। सवाल है कि जोरदार प्रचार और बड़े-बड़े दावों के बाद भी कांग्रेस की हार की क्या वजहें हो सकती हैं?
सारे विश्वसनीय एग्जिट पोल यही दावे कर रहे थे कि अबकी बार हरियाणा में बीजेपी की हार तय है और कांग्रेस बहुत बड़ी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी कर रही है। लेकिन, नतीजों ने बता दिया है कि सारे अनुमान गलत थे। इसके ठीक उलट एक दशक की एंटी-इंकंबेंसी, राज्य के साथ-साथ केंद्र सरकार की एंटी-इंकंबेसी को भी मिटाकर भी बीजेपी यहां अपनी अबतक की सबसे बड़ी बहुमत हासिल कर ली है।

कांग्रेस को दलित वोटों का भारी नुकसान!
हरियाणा के चुनाव परिणाम इशारा कर रहे हैं कि लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने आरक्षण के मुद्दे पर अपना नैरेटिव फैलाकर जिस तरह से दलित वोट बटोरे थे, पार्टी का वह तिलिस्म विधानसभा चुनावों में टूट गया है। वोट शेयर को देखने से मालूम पड़ता है कि हरियाणा में दलितों का वोट बीजेपी के साथ-साथ बसपा और आईएनएलडी गठबंधन के खाते में भी गए हैं।
नतीजों से यह भी लगता है कि बीजेपी ने कांग्रेस की सबसे बड़ी दलित नेता और पार्टी सांसद कुमारी सैलजा की उपेक्षा का जो आरोप लगाया, उससे भी कांग्रेस का दलित वोट खिसका है। लगता है कि कांग्रेस दलितों को यह समझाने में पूरी तरह से नाकाम रही कि पार्टी दलितों की उपेक्षा नहीं करती। ऊपर से अमेरिका में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का कथित तौर पर आरक्षण खत्म करने वाले बयान ने भी कांग्रेस की लुटिया डुबोने में सहायता की है।
किसानों की नाराजगी दूर करने में सफल रही बीजेपी
हरियाणा में कांग्रेस ने किसानों की समस्याओं को भी बहुत बड़ा मुद्दा बनाया था। लेकिन, जिस तरह से बीजेपी सरकार ने वहां सभी 24 फसलों पर एमएसपी देना शुरू किया और प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना के तहत उनके खाते में लगातार पैसे पहुंचते रहे, उससे कांग्रेस की दाल नहीं गल पाई। प्रदेश सरकार ने फसलों को हुए नुकसान की भरपाई में भी बहुत ही ज्यादा सक्रियता दिखाई है। शायद इस वजह से कांग्रेस किसानों की कथित नाराजगी भुनाने में नाकाम हो गई।
अग्निपथ योजना पर कांग्रेस की कहानियां फेल
हरियाणा में कांग्रेस ने केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना को भी बहुत बड़ा मुद्दा बनाया था। उसे लगा कि सेना में भर्ती को बड़े पैमाने पर करियर बनाने वाले प्रदेश के युवाओं से इस मुद्दे पर सहानुभूति बटोरी जा सकती है। लेकिन, बीजेपी ने रिटायर होने वाले अग्निवीरों को विभिन्न सरकारी नौकरियों में कोटा निर्धारित करने की बात कहकर कांग्रेस की बाजी पलट दी है।
ऊपर से बीजेपी का कांग्रेस की पूर्ववर्ती हुड्डा सरकार के खिलाफ खर्ची-पर्ची वाले दावे का भी असर दिखा है, जिसमें वह पार्टी पर सरकारी नौकरियां देने में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का आरोप लगाती रही है।
बीजेपी की जमीनी रणनीति कांग्रेस के अति आत्मविश्वास पर भारी
पूरे चुनाव के दौरान कांग्रेस पर अति आत्मविश्वास हावी रहा है। हरियाणा में पार्टी के सबसे बड़े नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा यह मान कर बैठे रहे कि मुख्यमंत्री तो वही बनने जा रहे हैं। पार्टी के टिकट वितरण में भी उनके सामने लगता है कि आलाकमान ने भी हथियार डाल दिए थे। कांग्रेस के अति आत्मविश्वास को आसमान तक पहुंचाने में एग्जिट पोल और सोशल मीडिया पर ऐक्टिव एक खास इकोसिस्टम ने भी बहुत ज्यादा योगदान निभाया।
वोटों की गिनती शुरू होने से पहले ही मुख्यमंत्री की दावेदारी वाले कांग्रेस नेताओं का अलग-अलग गुट नजर आने लगा था। दूसरी तरफ बीजेपी ने वोटरों की जमीनी गोलबंदी पर काम किया। उसने सामाजिक समीकरण को साधने वाले कदम उठाए। केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी और विकास योजनाओं का तो लाभ उसे मिला ही है।
बीजेपी का ओबीसी कार्ड चल गया!
हरियाणा चुनाव में इस बार शुरू से लगा कि कांग्रेस पार्टी सिर्फ 27 से 28% जाट वोट बैंक की उम्मीदों पर राज्य में सरकार बनाने की उम्मीद कर रही थी। यही वजह है कि हुड्डा को 90 में से 72 प्रत्याशियों के टिकट थमा दिए गए। दलितों की उपेक्षा का मुद्दा गरम हुआ, लेकिन राहुल गांधी जैसे कांग्रेस नेताओं को लगा कि मंच पर हुड्डा और सैलजा की साथ वाली तस्वीरें खिंचवा लेने भर से दलितों की नाराजगी खत्म कर देंगे।
दूसरी तरफ बीजेपी ने करीब 35% ओबीसी जातियों के साथ-साथ दलितों और जाटों के एक वर्ग को भी साथ लेने की रणनीति बनाई और उसपर अमल किया। धर्मेंद्र प्रधान जैसे केंद्रीय मंत्री और चुनावी राजनीति के धुरंधर नेता ने जातियों के गुणा गणित को ईवीएम में बटन दबने तक सटीक बनाए रखने पर काम किया। रुझानों से लगता है कि ओबीसी नेता को मुख्यमंत्री बनाने का भी भाजपा का दांव सटीक बैठ गया है।












Click it and Unblock the Notifications