Haryana Chunav: कांग्रेस, बीजेपी दोनों के बागियों की भरमार, बहुकोणीय मुकाबले में किसका होगा बेड़ा पार?
Haryana Chunav: हरियाणा विधानसभा चुनाव में इस बार कांग्रेस और बीजेपी दोनों को जबर्दस्त तरीके से बागियों की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। वैसे हरियाणा के चुनावों में बागियों का रिकॉर्ड कोई नया नहीं रहा है, लेकिन इसबार लिस्ट कुछ ज्यादा लंबी लग रही है। दोनों प्रमुख दलों की ओर से अंतिम समय में भी बागियों को समझाने-बुझाने की कोशिशें चल रही हैं, ऊपर से बहुकोई मुकाबले ने इसे और दिलचस्प बना दिया है।
हरियाणा का 1966 में जबसे गठन हुआ है, निर्दलीयों या अन्य दलों के उम्मीदवारों की बड़ी संख्या में जीत भी होती रही है। इनकी तादाद 10 से 20% तक देखी गई है। इस बार भाजपा से सबसे ज्यादा 47 बागी मैदान में हैं तो कांग्रेस के विद्रोही उम्मीदवारों की संख्या 42 है।

बहुकोणीय मुकाबले के बीच, कांग्रेस-भाजपा में सीधी टक्कर
हरियाणा में अबतक जो 13 विधानसभा चुनाव हुए हैं, उनमें से ज्यादातर में बागियों और निर्दलीयों की वजह से त्रिकोणीय मुकाबला होता रहा है। इस बार आईएनएलडी-बीएसपी, जेजेपी-आजाद समाज पार्टी और आम आदमी पार्टी की वजह से बहुकोणीय मुकाबला होना तय है, जबकि मुख्य मुकाबले में भाजपा और कांग्रेस ही दिख रही है।
त्रिकोणीय मुकाबला भाजपा के लिए रहा है फायदेमंद
2009 से हरियाणा में त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति देखी जाती रही है, जिसमें बीजेपी को ज्यादा फायदा मिला है और उसे दो-दो बार सरकार बनाने का मौका मिला है। हालांकि, 10 वर्षों की एंटी-इंकंबेंसी झेल रही बीजेपी को फिलहाल बड़े-बड़े बागियों ने परेशान जरूर किया है। इनमें से गुड़गांव से नवीन गोयल और गन्नौर से देवेंद्र कादियान की बगावत अहम है, क्योंकि दोनों ही केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के करीबी माने जाते हैं।
इसी तरह से भाजपा सांसद नवीन जिंदल की मां और देश की सबसे अमीर महिला सावित्री जिंदल हिसार से, खट्टर के पूर्व मीडिया सलाहकार राजीव जैन सोनीपत से और रानिया से पूर्व मंत्री रंजीत चौटाला भी निर्दलीय मैदान में हैं।
कांग्रेस को भी बागियों ने किया परेशान
इसी तरह से कांग्रेस के बड़े बागियों में अंबाला कैंट से चित्रा सरवारा शामिल हैं। हालांकि, उनके पिता पार्टी टिकट पर बगल की अंबाला सीट से प्रत्याशी हैं। इनके अलावा इस लिस्ट में बहादुरगड़ से राजेश जून, जींद से प्रदीप गिल, गोहाना से हर्ष छिकारा, पानीपत सिटी से रोहिता रेवारी और पटौती से सुधीर चौधरी का भी नाम है।
बागियों को मनाने की कोशिशों लगातार जारी
बहरहाल, बीजेपी और कांग्रेस दोनों ओर से यह कोशिश की जा रही है कि बड़े नेताओं की मदद से इन बागियों को पर्चा वापस लेने के लिए मना लिया जाए। बीजेपी की ओर से खुद केंद्रीय मंत्री खट्टर और मुख्यमंत्री नायब सैनी बागियों के पास पहुंच रहे हैं।
इसी तरह से पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और पार्टी सांसद कुमारी शैलजा को कांग्रेस ने भी काम पर लगा रखा है। वैसे हरियाणा में मुख्य मुकाबाला बीजेपी और कांग्रेस में ही होना है, इसलिए बागियों की चुनौती का किसपर कितना प्रभाव होता है, यह बड़ा सवाल बन चुका है। जानकारों की मानें तो कुछ सीटों पर भले ही बागी अपने दलों के लिए परेशानियां पैदा करें, लेकिन प्रदेश के नतीजे स्पष्ट आएंगे।
बहुकोणीय मुकाबले में भाजपा को मिल सकता है फायदा
इसकी वजह ये है कि इस बार हरियाणा में जाट और दलित वोटों का विभाजन लगभग तय लग रहा है। लोकसभा चुनावों में यह वोट बैंक मुख्य रूप से कांग्रेस के पीछे गोलबंद हुआ था। लेकिन, अब स्थिति पूरी तरह से पलट चुकी है।
जाट वोटों का कांग्रेस, आईएनएलडी, जेजेपी गठबंधन और बीजेपी के बीच बंटना तय है। दूसरी तरफ दलित वोट भी लोकसभा चुनावों की तरह एकमुश्त कांग्रेस में जाने की संभावना कतई नहीं लग रही है। हो सकता है कि इस बहुकोणीय मुकाबले में भाजपा को अन्य दलों के मुकाबले कहीं ज्यादा फायदा मिल जाए।












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