भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर सीएम खट्टर ने किया नमन, ट्वीट कर कही ये खास बात

Haryana News: 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा का जन्मदिन है, जो काफी धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। इस दौरान हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर उन्हें नमन किया।

इस दौरान हरियाणा सीएम खट्टर ने अपने ऑफिशियल एक्स हैंडल पर लिखा, आदिवासी स्वाभिमान और संस्कृति के संरक्षक, महान स्वतंत्रता सेनानी, भगवान बिरसा मुंडा जी की जयंती पर उन्हें कोटि कोटि नमन।'

Manohar Lal Khattar

इतना ही नहीं, सीएम खट्टर ने आगे कहा कि शोषित, पीड़ित और वंचितों के उद्धार में किया गया उनका कार्य, उनके क्रांतिकारी विचार तथा प्रखर राष्ट्रभक्ति की भावना भारत की भावी पीढ़ी को मानव कल्याण के कार्यों हेतु सदैव प्रेरित करती रहेगी।

कौन हैं भगवान बिरसा मुंडा
15 नवंबर 1875 को झारखंड के खूंटी जिले के उलिहातू गांव में रहने वाले सुगना पूर्ति और करमी पूर्ति के घर भगवान बिरसा मुंडा का जन्म हुआ था। आदिवासी परिवेश में बिरसा का लालन पालन हुआ और शुरुआती शिक्षा ग्रामीण परिवेश में हुईं। इसके बाद बिरसा मुंडा चाईबासा चले गए।

जहां उन्होंने मिशनरी स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी की। अपने छात्र जीवन में ही उन्होंने अंग्रेज शासकों की तरफ से अपने समाज पर किए जा रहे जुल्म को लेकर चिंतत थे। आखिरकार उन्होंने अपने समाज की भलाई के लिए लोगों को अंग्रेजों से मुक्ति दिलाने की ठानी औऱ उनके नेतृत्वकर्ता बन गए।

साल 1894 में बिरसा मुंडा ने उनके नेतृत्व की कमान संभाली और बेगारी प्रथा के विरुद्ध जबर्दस्त आंदोलन किया। जिससे जमींदारों के घर से लेकर खेत तक भूमि का कार्य रूक गया और तत्कालीन ब्रिटिश शासन बौखला गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुंडा को गिरफ्तार करने के लिए अंग्रेजों ने 500 रुपए का इनाम भी रखा था।

साथ ही, लोगों को तरह-तरह के प्रलोभन भी दिए गए। इसी बीच 22 अगस्त 1895 को बिरसा मुंडा को अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया और 2 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। करीब ढाई साल बाद बिरसा मुंडा हजारीबाग जेल से रिहा हुआ और फिर से आंदोलन में जुट गए।

1897 से 1900 के बीच मुंडा समाज और अंग्रेजी सिपाहियों के बीच लगातार युद्ध होते रहे। बिरसा मुंडा और उनके समर्थकों ने अंग्रेजी सेना की नाम के दम कर दिया। अगस्त 1897 में बिरसा मुंडा और उसके 400 सिपाहियों ने तीर कमानों से लैस होकर खूंटी थाने पर धावा बोला। 1898 में तांगा नदी के किनारे मुंडाओं के साथ अंग्रेजी सेना की लड़ाई हुई।

जिसमें अंग्रेसी सेना हार गई, लेकिन अंग्रेजी सेना ने बहुत से आदिवासियों को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद 3 मार्च 1990 को अंग्रेजी सेना ने चक्रधरपुर से बिरसा मुंजा को भी पकड़ लिया और रांची जेल लाया गया था। रांची जेल आने के दौरान वो काफी बीमार पड़ गए, उन्हें खून की उल्टी होने लगी। इसी बीमारी में बिरसा मुंडा ने 09 जून 1900 को रांची जेल में अंतिम सांस ली।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+