ग्वालियर-चंबल को 'कमलमय' बनाने मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर क्यों जरुरी? क्या ध्वस्त होगा रिकॉर्ड?
Minister Narendra Singh Tomar: मध्य प्रदेश में विधानसभा का चुनावी माहौल पूरी तरह से परवान पर चढ़ रहा है। ग्वालियर-चंबल अंचल को मध्य प्रदेश की सत्ता की चाभी कहा जाता है। साल 2018 में ग्वालियर चंबल की हार के कारण ही भाजपा के हाथ से सत्ता चली गई थी।
यही वजह है कि इस चुनाव में भाजपा का सबसे ज्यादा फोकस ग्वालियर-चंबल संभाग पर है। इसके लिए भाजपा ने अपने दिग्गज नेता एवं केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को मुरैना जिले की दिमनी सीट से चुनाव मैदान में उतारा है। तोमर को मप्र के भावी सीएम माना जा रहा है। इसके अलावा तोमर का ग्वालियर-संभाग में उनका अपना राजनीतिक प्रभाव है और कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क रहा है।

माना जा रहा है कि, तोमर के चुनाव लड़ने से भाजपा को दिमनी के साथ ग्वालियर-चंबल संभाग में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने में मदद मिलेगी। आपको बता दें कि अभी दिमनी सहित मुरैना जिले की सभी छह सीटों पर अभी कांग्रेस का कब्जा है।
दिमनी में पिछले तीन चुनाव से भाजपा को लगातार हार का सामना करना पड़ा है। वैसे दिमनी के इतिहास की बात करें, तो 1980 से 2008 तक इस सीट पर भाजपा का दबदबा रहा है। लेकिन 2013 में बसपा के बलवीर सिंह दंडोतिया और 2018 में कांग्रेस के गिर्राज दंडोतिया ने इस सीट पर जीत हासिल की थी।
BJP के लिए क्यों जरुरी ग्वालियर-चंबल?
मध्यप्रदेश में साल 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। 230 में 109 सीटें जीतकर सत्ता से महज़ 7 सीटें दूर रह गई थी। ग्वालियर चम्बल में भाजपा 34 में से 27 सीटें हार गई थी। 2018 में सत्ता से बाहर होने में ग्वालियर चंबल सबसे बड़ी वजह बना था। यही वजह है कि 2023 में ग्वालियर चंबल पर भाजपा की नजर है। कहने का मतलब हैं भाजपा इस बार विधानसभा चुनाव किसी भी सूरत में ग्वालियर-संभाग में बड़ी जीत हासिल करना चाहती है।












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