Gwalior News: करोड़ों के पीएचई घोटाले में बड़ी कार्रवाई , दो रिटायर इंजीनियरों सहित चार गिरफ्तार
संवाद सूत्र- पंकज श्रीमाली
शहर के बहुचर्चित पीएचइ घोटाले में क्राइम ब्रांच की टीम ने चार आरोपियों को पकड़ा है। इसमें वर्तमान और पूर्व डीडीओ सहित चार लोगों को पकड़ा है।इनमे दो तत्कालीन एग्जीक्यूटिव इंजीनियर हैं जो अब रिटायर हो चुके हैं। इनसे क्राइम ब्रांच की टीम ने पूछताछ कर न्यायालय में पेश किया है।
पीएचइ विभाग में करीब 18 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया था। वेतन और भत्तों के नाम पर फर्जी तैयार कर रुपये निकाले गए। सालों तक यह सिलसिला चलता रहा। जांच में घोटाला पकड़ में आया था। ट्रेजरी की रिपोर्ट के बाद क्राइम ब्रांच ने पंप अटेंडर हीरालाल पर सबसे पहले एफआइआर की थी।

ट्रेजरी की रिपोर्ट में वर्तमान डीडीओ से लेकर पूर्व डीडीओ तक की भूमिका बताई गई थी। पहले इस रिपोर्ट के आधार पर एक और एफआइआर की जा रही थी, लेकिन बाद में इस रिपोर्ट को इसी एफआइआर की विवेचना में शामिल किया गया। इसके चलते सभी डीडीओ आरोपित बन गए। एएसपी निरंजन शर्मा ने बताया कि आरोपियों को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया है। उन्होंने बताया कि 18 करोड़ रुपये के इस घोटाले में आगे कई और नाम भी सामने आ सकते हैं।

इनको किया गिरफ्तार
इस मामले में क्राइम ब्रांच ने जिन चार लोगों को गिरफ्तार किया है उनमें तत्कालीन कार्यपालन यंत्री और अब रिटायर आर एन करहिया है । इन पर आरोप है कि पीएचई के खंड क्रमांक 1 में ईई रहते गलत ढंग के बिल तैयार किये गए और भुगतान हुआ। ये वर्तमान में 65 साल के हैं । एक अन्य गिरफ्तार ईई संजय सोलंकी है। इनकी भी पड़ स्थापना खण्ड एक मे रही । इनकी आईडी से गलत बिल तैयार हुए और भुगतान हुआ । गिरफ्तार बाबू अशोक कचोरिया पर गलत बिल तैयार कर इनको पास कराने और भुगतान कराने का आरोप है। एक अन्य आरोपी पकड़ा गया इसका नाम राहुल वर्मा है जो अपने आपको ठेकेदार बताता है । यह विभागों में गाड़ियां लगवाने का काम करता है । इसी के खाते में घोटाले के 5 करोड़ रुपये ट्रांसफर हुए थे।
घोटाले की रकम 71 खातों में भेजी गई
पीएचई के चर्चित घोटाले का खुलासा जुलाई महीने में हुआ था। विभागीय जांच के बाद इसमें एफआईआर कराई गई थी । अब तक की जॉच में पता चला कि 2017 से शुरू हुए इस घोटाले में 2023 तक लगभग 18.92 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है । यह घोटाला गलत ढंग से बिल तैयार कर अलग अलग खातों में ट्रांसफर कर यह राशि निकाली गई। यह राशि कुल 71 खातों में भेजी गई । इनमे से कई खाते क्राइम ब्रांच ने सीज किये थे। अनेक मृत कर्मचारियों के नाम से भी वेतन और भत्ते निकाले गए।












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