जातिगत समीकरण साधते हुए कांग्रेस और बीजेपी ने जारी की प्रत्याशियों की लिस्ट
ग्वालियर में कांग्रेस और बीजेपी ने जातिगत समीकरण साधते हुए जारी की है नगर निगम पार्षद प्रत्याशियों की की सूची
ग्वालियर, 18 जून। बीजेपी और कांग्रेस पार्टियों ने जातिगत समीकरणों को साधते हुए ग्वालियर नगर निगम के पार्षद उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। बीजेपी ने जहां इस सूची में क्षत्रियों को तवज्जो दी है तो वहीं कांग्रेस ने ब्राह्मणों को ज्यादा संख्या में प्रत्याशी बनाकर चुनाव मैदान में उतारा है। खास बात यह भी है कि बीजेपी ने महापौर पद के लिए ब्राह्मण प्रत्याशी और कांग्रेस ने महापौर पद के लिए क्षत्रिय प्रत्याशी को अपना उम्मीदवार बनाया है।

बीजेपी और कांग्रेस के प्रत्याशियों की लिस्ट जारी करने में दोनों ही दलों के नेताओं को काफी मशक्कत करनी पड़ी। कई बैठकों का दौर चला, काफी समय तक मंथन हुआ। कई बार सूचियों में उलटफेर किए गए, वरिष्ठ नेतृत्व को विश्वास में लिया गया। आरोप प्रत्यारोप को दरकिनार किया गया और आखिर में शुक्रवार की देर रात को बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों ने अपने-अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी।

बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों ने अपने-अपने प्रत्याशियों की घोषणा करते वक्त जातिगत समीकरणों का भी पूरी तरह ध्यान रखा है। बीजेपी ने चुनाव मैदान में नगर निगम ग्वालियर के लिए महापौर प्रत्याशी के रूप में ब्राह्मण समाज की सुमन शर्मा को उतारा है इसलिए बीजेपी ने पार्षदों के टिकट वितरण में तकरीबन दो दर्जन क्षत्रियों को स्थान दिया है। वहीं कांग्रेस ने ग्वालियर नगर नगर निगम की महापौर प्रत्याशी के तौर पर क्षत्रिय समाज की शोभा शुक्रवार को चुनाव मैदान में उतारा है इसलिए कांग्रेस द्वारा पार्षदों के टिकट वितरण में एक दर्जन ब्राह्मणों को स्थान दिया गया है। कुल मिलाकर बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दल ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज को साधने में जुटे हुए है।
किसी वार्ड में क्षत्रिय और ब्राह्मण तो किसी वार्ड में ब्राह्मण प्रत्याशी आमने सामने
बीजेपी और कांग्रेस पार्टी द्वारा तय किए गए प्रत्याशियों के नाम अब सामने आ चुके हैं। खास बात यह है कि इस बार जातिगत समीकरणों का विशेष ध्यान रखा गया है, लेकिन देखने वाली बात यह भी है कि किसी वार्ड में ब्राह्मण और क्षत्रिय प्रत्याशी आमने-सामने चुनावी मैदान में ताल ठोकेंगे, तो किसी वार्ड में ब्राह्मण प्रत्याशी ही आमने सामने एक दूसरे को चुनाव मैदान में चुनौती देते हुए नजर आएंगे। ऐसे में जहां सजातीय प्रत्याशी होने से समीकरण गड़बड़ाएंगे वहीं ब्राह्मण और क्षत्रिय प्रत्याशी होने पर सामाजिक रुप से वोटों का बंटवारा भी होगा।
ग्वालियर चंबल के सभी चुनाव होते हैं जातिगत समीकरण के आधार पर
ग्वालियर-चंबल में होने वाले सभी चुनाव जातिगत समीकरण के आधार पर होते हैं। ग्वालियर-चंबल अंचल में जातिगत भावना लोगों के दिलों में इस तरह बसी हुई है कि लोग चुनावों में जातिगत प्रत्याशी को ध्यान में रखकर ही वोट करना ज्यादा पसंद करते हैं। ऐसे में इस बार बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों ने वार्ड में मौजूद मतदाताओं का आकलन करते हुए जातिगत आंकड़े साधने की कोशिश की है।












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