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ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर में बेटियों को दी प्रेरणा, “भारत की बेटियां हर क्षेत्र में बढ़ा रहीं मान

MP News: केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने तीन दिवसीय ग्वालियर प्रवास के दौरान सोमवार, 24 मार्च 2025 को विजयाराजे सिंधिया शासकीय कन्या महाविद्यालय, मुरार के वार्षिक समारोह का शुभारंभ किया।

इस मौके पर उन्होंने अपनी दादी स्वर्गीय राजमाता विजयाराजे सिंधिया को नमन करते हुए कहा कि उन्होंने उस दौर में राजनीति को माध्यम बनाकर महिला सशक्तिकरण की लड़ाई लड़ी और जनसेवा के पथ पर चलीं।

Jyotiraditya Scindia inspired daughters in Gwalior Daughters of India are increasing the pride

मंच से उन्होंने छात्राओं को अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स की प्रेरणादायक कहानी सुनाई और बताया कि आज देश के कुल पायलटों में 15% महिलाएँ हैं, जो वैश्विक औसत से भी ज्यादा है। इस समारोह में सिंधिया ने महिला शिक्षा, सशक्तिकरण और सरकार की योजनाओं पर भी प्रकाश डाला।

राजमाता विजयाराजे सिंधिया को किया नमन

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी दादी राजमाता विजयाराजे सिंधिया को याद करते हुए कहा, "वे केवल ग्वालियर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश और देश की नारी शक्ति की प्रतीक थीं।" उन्होंने राजमाता की दूरदर्शी सोच को स्मरण करते हुए कहा, "जो हाथ एक शिशु के पालने को झुला सकते हैं, वे विश्व पर राज भी कर सकते हैं।" सिंधिया ने बताया कि राजमाता विजयाराजे सिंधिया स्नातकोत्तर महाविद्यालय सिर्फ एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि एक विचारधारा और महिला सशक्तिकरण का केंद्र है, जिसे राजमाता ने वर्षों पहले संजोया था।

उन्होंने कहा, "राजमाता साहब बहुत सरल स्वभाव की थीं, लेकिन अपने संकल्पों पर अडिग रहती थीं। उन्होंने देश के हर राज्य में प्रवास किया और जनसंघ की नींव रखी। उस समय में जब महिलाओं को राजनीति में आगे आने के लिए प्रोत्साहन नहीं मिलता था, उन्होंने नारी सशक्तिकरण की लड़ाई लड़ी और जनसेवा को अपना धर्म बनाया।"

Jyotiraditya Scindia inspired daughters in Gwalior Daughters of India are increasing the pride

"भारत की बेटियां हर क्षेत्र में बढ़ा रहीं मान"

छात्राओं को प्रेरित करते हुए सिंधिया ने अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स की कहानी सुनाई। उन्होंने कहा, "सुनीता विलियम्स भारत की बेटी हैं, जिन्होंने अंतरिक्ष में जाकर देश का नाम रोशन किया। यह दिखाता है कि हमारी बेटियों में अद्भुत क्षमता है।" उन्होंने एक गर्व भरा आँकड़ा साझा करते हुए कहा, "आज देश के कुल पायलटों में 15% महिलाएँ हैं, जो वैश्विक औसत से भी ज्यादा है। यह हमारी बेटियों की मेहनत और लगन का परिणाम है।"

सिंधिया ने शिक्षकों की भी तारीफ की और कहा, "आपके समर्पण और मेहनत से छात्राएँ हर क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल कर रही हैं। चाहे वह शिक्षा हो, खेल हो, या तकनीक का क्षेत्र, बेटियाँ हर जगह देश का मान बढ़ा रही हैं।"

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"शिक्षा के लिए सिंधिया परिवार हमेशा प्रतिबद्ध"

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने परिवार की शिक्षा के क्षेत्र में योगदान की बात करते हुए कहा, "शिक्षा के विकास के लिए पूरा सिंधिया परिवार हमेशा संकल्पित रहा है। मेरे परदादा महाराज माधो राव सिंधिया ने 'द सिंधिया स्कूल' की स्थापना की और काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना में बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने ग्वालियर के प्रसिद्ध माधव संगीत कॉलेज की भी स्थापना की।"

उन्होंने अपने पिता को याद करते हुए कहा, "मेरे स्वर्गीय पिता और प्रेरणास्रोत कैलाशवासी श्रीमंत माधवराव सिंधिया जी इस देश के शिक्षा मंत्री रहे। उन्होंने इस अंचल को कई नामचीन शैक्षणिक संस्थानों की सौगात दी।" सिंधिया ने यह भी कहा कि शिक्षा के जरिए ही समाज में बदलाव लाया जा सकता है, और उनका परिवार इस दिशा में हमेशा काम करता रहेगा।

"महिला शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए सरकार प्रतिबद्ध"

सिंधिया ने केंद्र सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में महिला शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए कई क्रांतिकारी कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा, "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना ने देश में लड़कियों की शिक्षा को नया आयाम दिया है। नई शिक्षा नीति में जेंडर इन्क्लूजन फंड की स्थापना कर लड़कियों की शिक्षा के लिए विशेष आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है।"

उन्होंने आगे कहा, "सुकन्या समृद्धि योजना ने बेटियों की उच्च शिक्षा के लिए माता-पिता का आर्थिक बोझ कम किया है। लखपति दीदी योजना और ड्रोन दीदी योजना के माध्यम से हमारी बहनों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाया जा रहा है। इन योजनाओं से न सिर्फ बेटियाँ आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि वे अपने परिवार और समाज को भी आगे बढ़ा रही हैं।"

छात्राओं में उत्साह, मंच से मिली प्रेरणा

सिंधिया के इस संबोधन ने महाविद्यालय की छात्राओं में खासा उत्साह भरा। मंच से सुनीता विलियम्स की कहानी और महिला पायलटों की उपलब्धि सुनकर छात्राओं ने तालियाँ बजाकर अपनी खुशी जाहिर की। कक्षा 12 की छात्रा रिया ने कहा, "सिंधिया जी ने हमें बहुत प्रेरित किया। मैं भी पायलट बनना चाहती हूँ, और आज मुझे लगा कि मैं यह कर सकती हूँ।" वहीं, एक अन्य छात्रा नेहा ने कहा, "हमें गर्व है कि हम राजमाता विजयाराजे सिंधिया के सपनों को साकार करने वाले इस कॉलेज में पढ़ रहे हैं।"

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