Indian Judicial Code: नए कानून के तहत ग्वालियर में दर्ज हुआ पहला केस, जानें क्या है आरोप?
Indian Judicial Code: देश में नए कानून लागू होने के बाद पहली एफआइआर मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में दर्ज हुई है। यह FIR रात के 12:24 मिनट पर दर्ज हुई है। नए कानूनों के बाद यह पहली FIR दिनांक 1 जुलाई 2024 को ग्वालियर के हजीरा थाना में दर्ज की गई है।
धारा 303 (2) में FIR दर्ज की गई है। यह FIR ग्वालियर के हजीरा थाना क्षेत्र के निवासी सौरभ नरवरिया पिता नागेंद्र सिंह नरवरिया के द्वारा दर्ज कराई गई है।

इस धारा को पहले भारतीय दण्ड विधान में पहले 379 के नाम से जाना जाता था लेकिन अब भारतीय न्याय संहिता में इसे 303(2) के नाम से जाना जाएगा। पहले भारतीय कानून में दंड विधान यानी कि भारतीय दण्ड विधान के मुताबिक जो आरोपी होता था तो उसे दंड देने के लिए दंड विधान में जोर दिया जाता था। लेकिन अब नए कानूनों में न्याय पर जोर दिया जाएगा। इसलिए इसे भारतीय दण्ड विधान से बदलकर भारतीय न्याय संहिता किया गया है।
नए कानूनों के मुताबिक जिस पीड़ित के साथ जिस स्थान पर घटना हुई है उसपर वहीं से ई एफआईआर दर्ज कराई जा सकेगी। इससे नागरिकों को सहायता मिलेगी। पहले चैन स्नैचिंग में कोई अलग से धारा नहीं थी जिसमें चैन स्नैचिंग होने के बाद लूट में अपराध दर्ज किया जाता था, लेकिन अब इस कानून में सुधार कर चैन स्नैचिंग की अलग से धारा बनाई गई है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देशभर में नए आपराधिक कानून लागू होने के बीच सोमवार को कहा कि अब 3 नए कानूनों के कार्यान्यन के बाद दंड की जगह न्याय होगा और देरी की जगह त्वरित सुनवाई होगी।
आपको बता दें कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) 2023 सोमवार से पूरे देश में प्रभावी हो गए। इन तीनों कानून ने ब्रिटिश कालीन कानूनों क्रमश: भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ली है। अमित शाह कहा कि तीनों आपराधिक न्याय कानूनों के कार्यान्वयन से सबसे आधुनिक आपराधिक न्याय प्रणाली की स्थापना होगी।












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