हाथरस सत्संग भगदड़ में ग्वालियर की महिला ने भी गंवाई जान, MP से गए लोगों ने बताया आंखों देखा दर्दनाक मंजर
Hathras Stampede News: उत्तर प्रदेश के हाथरस सत्संग में मची भगदड़ में मध्य प्रदेश के ग्वालियर की तीन महिलाएं घायल हुई हैं। साथ ही ग्वालियर जिले की एक 45 वर्षीय महिला की मौत हो गई है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने इस हादसे पर दुख जताया है। साथ ही प्रदेश की रहने वाली महिला रामश्री के निधन पर खेद व्यक्त किया है। बुधवार को उत्तर प्रदेश पुलिस महिला का शव लेकर ग्वालियर पहुंची है। ग्वालियर के मुरार मुक्तिधाम में महिला का अंतिम संस्कार हुआ है।

शहर के थाटीपुर जगजीवन नगर निवासी 45 वर्षीय रामश्री पत्नी स्वर्गीय दयाल सिंह अपने घर की मुखिया थी। साल 2014 में हार्ट अटैक से पति का देहांत होने के बाद वही पूरे घर को संभाले हुए थी। परिवार में उनके पांच बच्चे तीन बेटे व दो बेटियां हैं। किसी की भी शादी नहीं हुई है। रामश्री हर साल अपनी महिला मंडली के साथ भोले बाबा के सत्संग में शामिल होने जाती थी।
सोमवार-मंगलवार दरमियानी रात दो गाड़ियों में सवार होकर ग्वालियर से करीब 12 महिलाएं सत्संग में शामिल होने के लिए यूपी हाथरस निकली थीं। उस समय किसी को नहीं पता था कि आगे क्या होने वाला है। मंगलवार को जिस समय हादसा हुआ सभी महिलाएं एक साथ थी। तभी अचानक वहां भोले बाबा के चरणों की धूल लेने के लिए लोग धक्का मुक्की करने लगे। वहां बाबा के आदमियों ने पीछे की तरफ धकेलकर वाटर कैनन से पानी की बोछार कर दी। जिसके बाद वहां भगदड़ मच गई। इसी समय रामश्री अपनी महिला मंडली से बिछड़ गई और भगदड़ के बीच लोगों के पैरों के नीचे कुचलती चली गई।
भगदड़ की सूचना मिलते ही ग्वालियर से हाथरस गई महिलाओं के परिजन एक दूसरे को फोन लगाने लगे। तभी रामश्री के बेटे पंकज ने भी संपर्क किया।तभी पता लगा कि उनकी मां नहीं मिल रही है। कुछ देर बाद पता लगा कि रामश्री की भगदड़ में कुचलने और दम घुटने से मौत हो गई है।

बुधवार दोपहर 2 बजे के लगभग महिला का शव लेकर हाथरस पुलिस ग्वालियर पहुंची है। इस दौरान जगजीवन नगर में काफी संख्या में थाटीपुर पुलिस मौजूद रही।पुलिस को आशंका थी कि हो सकता है। परिजन यहां जाम लगाकर हंगामा कर दें, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। शव के ग्वालियर पहुंचते ही वहां लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई। हर किसी की आंखे नम थीं। मुरार मुक्तिधाम में महिला का अंतिम संस्कार किया गया है।
रामश्री ने पति के देहांत के बाद पूरे परिवार को संभाला था। घर की मुखिया ही वही थी। अभी सभी बच्चों की शादी की जिम्मेदारी उस पर थी। वैसे तो वह हर बार सत्संग में जाती थीं, लेकिन इस बार जाते से कई बार मुड़कर देखा। बच्चों से कहते हुए गई थीं कि ख्याल रखना जल्दी आ जाऊंगी। पर यह कोई नहीं जानता था कि वह कभी न लौटने के लिए जा रही हैं। घर वह तो नहीं आई उनकी मौत की खबर आई।












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