ग्वालियर में गणेश प्रतिमा सड़क पर गड्ढे के कारण गिरी, भक्तों में हंगामा, 200 से ज्यादा लोग सड़क पर बैठे
ग्वालियर जिले की सबसे ऊंची गणेश प्रतिमा शनिवार रात सड़क पर गड्ढे के कारण गिरकर खंडित हो गई। यह प्रतिमा 25 फीट ऊंची थी और इसे शहर के शिंदे की छावनी स्थित खल्लासीपुरा में स्थापित किया जाना था। घटना के बाद भक्तों ने गड्ढों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर की मांग को लेकर दो घंटे तक हंगामा किया।
शनिवार रात 12 बजे, भक्त मंडल के सदस्य जीवाजीगंज से गणेश प्रतिमा को लेकर निकले। 20 घंटे की कठिन यात्रा के बाद, वे प्रतिमा को केवल 2 किलोमीटर दूर नवाब साहब के कुएं के पास ही ला पाए। वहां, एक गहरे गड्ढे की वजह से गाड़ी का पहिया फंस गया और प्रतिमा एक ओर झुकने लगी। कुछ भक्तों ने प्रतिमा को संभालने की कोशिश की, लेकिन भारी वजन के कारण वह गिरकर खंडित हो गई।

मूर्ति के गिरने से कुछ लोग घायल हुए हैं, लेकिन किसी ने घटना के बाद सामने आकर अपना नाम दर्ज नहीं कराया। घटना के तुरंत बाद, गणेश प्रतिमा स्थापित करने वाले भक्तों ने सड़कों पर जाम लगा दिया और गड्ढे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर एफआईआर करने की मांग की। हंगामा और विरोध प्रदर्शन के चलते यातायात भी प्रभावित हुआ।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई:
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और खंडित मूर्ति को विसर्जित करने की व्यवस्था की। पुलिस ने भक्तों को आश्वासन दिया कि उनकी सभी मांगों पर उचित कार्रवाई की जाएगी और गड्ढे के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा।
ऊर्जा मंत्री प्रदुम्न सिंह तोमर का बयान:
सड़क पर गड्ढे और प्रतिमा के खंडित होने की घटना पर ऊर्जा मंत्री प्रदुम्न सिंह तोमर ने कहा कि शिंदे की छावनी की सड़क अच्छी स्थिति में है। हालांकि, जिस गड्ढे से हादसा हुआ है, वह किसी एजेंसी द्वारा खोदी गई थी। मंत्री ने बताया कि विभाग अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि गड्ढा किसने खोदा था और लापरवाही पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
प्रतिमा के परिवहन की जानकारी:
प्रतिमा को एक गाड़ीनुमा प्लेटफॉर्म पर रखकर परिवहन किया जा रहा था। जब गाड़ी का पहिया गहरे गड्ढे में फंस गया, तो प्लेटफॉर्म झुकने लगा और इससे प्रतिमा गिर गई।
इस घटना ने भक्तों और स्थानीय निवासियों को गहरे दुख में डाल दिया है और सड़क पर गड्ढों के मुद्दे पर गंभीर चिंता उत्पन्न की है। भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सड़क की मरम्मत और सुरक्षा उपायों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
सड़क पर हंगामा:
प्रतिमा के खंडित होते ही मौके पर 200 से 300 लोग सड़क पर आ गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। लोगों ने कहा कि पूरे शहर में सड़कों पर गड्ढे ही गड्ढे हैं, जिनसे प्रतिमा को खल्लासीपुरा तक लाना बेहद कठिन हो गया था। उनका आरोप था कि 100 से अधिक गड्ढों को बचाते हुए गणेश प्रतिमा को लाया गया, लेकिन यहां एक गड्ढा पूरी मेहनत पर पानी फेर गया।
समिति का बयान और प्रतिमा का निर्माण:
गणेश प्रतिमा स्थापित करने वाली बीजासेन माता कमेटी के सदस्यों ने बताया कि वे पिछले 31 वर्षों से गणेश प्रतिमा की स्थापना कर रहे हैं। हर साल एक फीट ऊंची प्रतिमा बनवाते हैं। समिति के अध्यक्ष पंकज कुशवाह ने बताया कि उनके पिता और मोहल्ले के लोगों ने गणेश प्रतिमा की स्थापना की शुरुआत की थी। पिछले 16 साल से वे प्रतिमा का आकार हर साल एक फीट बढ़ाकर लाते हैं।
प्रतिमा की लागत और पंडाल:
शहर की सबसे बड़ी और ऊंची गणेश प्रतिमा का निर्माण जीवाजीगंज के मूर्तिकार पिंकी कुमार ने किया। निर्माण में करीब एक महीने का समय लगा और लागत डेढ़ लाख रुपए आई। इतनी बड़ी मूर्ति को स्थापित करने और पंडाल तक लाने के लिए क्रेन का उपयोग किया गया।
स्थापना के लिए 40 बाई 60 का विशाल पंडाल तैयार किया गया था, जिसे शहर के कारीगरों ने तैयार किया। यह पंडाल 15 दिन पहले से बनाया जा रहा था और ऊपर से बारिश से बचाव के लिए वाटरप्रूफ बनाया गया था।












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