MP News: हाईकोर्ट परिसर में अंबेडकर प्रतिमा की मांग पर कांग्रेस की हुंकार, ग्वालियर में संविधान सत्याग्रह
ग्वालियर की तपती दोपहर में आज संविधान के नाम पर एक ठंडी छांव दिखाई दी - कांग्रेस के "संविधान सत्याग्रह उपवास" कार्यक्रम के रूप में। मौका था ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापना की मांग को लेकर कांग्रेस के एकदिवसीय शांतिपूर्ण आंदोलन का।
राजनीति में अक्सर उपवास केवल प्रतीक बनकर रह जाते हैं, लेकिन आज कांग्रेस ने इसे संविधान की आत्मा और बाबा साहब के सम्मान की लड़ाई का मंच बना दिया। सूर्य नमस्कार तिराहा, जो आमतौर पर यातायात के कोलाहल से गूंजता है, आज "संविधान बचाओ" और "जय भीम" के नारों से भर उठा।

उपवास का उद्देश्य: बाबा साहब का सम्मान और संविधान की रक्षा
ग्वालियर हाई कोर्ट परिसर में डॉ. अंबेडकर की 10 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापना को लेकर महीनों से विवाद चल रहा है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को संविधान निर्माता बाबा साहब के अपमान और उनकी विरासत को कम करने की कोशिश के रूप में देखा है। उपवास कार्यक्रम का आयोजन सूर्य नमस्कार तिराहा, ग्वालियर में किया गया, जहां नेताओं ने बाबा साहब के विचारों और भारतीय संविधान की मूल भावना की रक्षा का संकल्प लिया।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, "यह केवल एक मूर्ति स्थापना का सवाल नहीं है, बल्कि यह संविधान और सामाजिक न्याय की रक्षा का आंदोलन है। कुछ ताकतें बाबा साहब के योगदान को नकारना चाहती हैं, लेकिन हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।"
कांग्रेस नेताओं का एकजुट प्रदर्शन
उपवास में शामिल प्रमुख नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर बाबा साहब के योगदान को कम करने और समाज में वर्ग संघर्ष पैदा करने का आरोप लगाया।
हरीश चौधरी ने कहा, "ग्वालियर हाई कोर्ट में प्रतिमा स्थापना के लिए प्रशासनिक अनुमति मिल चुकी थी, फिर भी इसे रोका जाना एक सोची-समझी साजिश है। यह संविधान विरोधी ताकतों का काम है।"
जीतू पटवारी ने उपवास से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर संज्ञान लेने की मांग की थी। उन्होंने कहा, "ग्वालियर में मूर्ति स्थापना पर विवाद लोकतंत्र और संविधान पर हमला है। हम बाबा साहब की विरासत को बचाने के लिए हर मंच पर संघर्ष करेंगे।"

दिग्विजय सिंह ने जोर देकर कहा, "बाबा साहब को संविधान सभा का अध्यक्ष महात्मा गांधी की सलाह पर बनाया गया था। बीएन राव केवल सलाहकार थे, फिर भी कुछ लोग उन्हें संविधान निर्माता बताकर बाबा साहब का अपमान कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में उनकी प्रतिमा लग सकती है, तो ग्वालियर हाई कोर्ट में क्यों नहीं?"
कमलेश्वर पटेल सहित अन्य नेताओं ने भी इस आंदोलन को सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए जरूरी बताया।
तीन दिवसीय संविधान सत्याग्रह का समापन
- यह उपवास 23-25 जून तक चले कांग्रेस के तीन दिवसीय "संविधान सत्याग्रह" का हिस्सा था।
- 23 जून: कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश भर में घर-घर जाकर संविधान और बाबा साहब के योगदान पर चर्चा की।
- 24 जून: दलित बस्तियों में चौपाल और समरसता भोज का आयोजन किया गया, जिसमें भोपाल के मुगालिया छाप गांव में दिग्विजय सिंह, जीतू पटवारी, और अन्य नेता शामिल हुए।
- 25 जून: ग्वालियर में सामूहिक उपवास के साथ इस अभियान का समापन हुआ।
- कांग्रेस ने इस अभियान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि वे संविधान और बाबा साहब के सम्मान के लिए किसी भी हद तक जाएंगे।
ग्वालियर हाई कोर्ट परिसर में डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा स्थापना की मांग वकीलों के एक समूह ने उठाई थी। कोर्ट की अनुमति और चबूतरा निर्माण के बाद भी प्रतिमा स्थापना में देरी और विरोध के कारण यह मामला तूल पकड़ गया। कुछ पोस्टरों और होर्डिंग्स में पूर्व नौकरशाह बी.एन. राव को संविधान का प्रमुख शिल्पकार बताने की कोशिश ने विवाद को और हवा दी। कांग्रेस ने इसे भाजपा और RSS की साजिश करार दिया, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे न्यायालयीन मामला बताया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, "हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की कमेटी इस मामले पर फैसला लेगी, और सरकार उसका पालन करेगी। कांग्रेस इस मुद्दे पर जनता को भ्रमित कर रही है।"
दलित संगठनों का समर्थन
इस मुद्दे पर भीम सेना, आजाद समाज पार्टी, और अन्य दलित संगठन भी सक्रिय हैं। भीम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवाब सतपाल तंवर ने चेतावनी दी कि अगर प्रतिमा स्थापित नहीं हुई, तो वे जयपुर हाई कोर्ट में मनु की मूर्ति हटाने के लिए आंदोलन करेंगे।












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