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Modhera Sun Temple: गुजरात का भव्य सूर्य मंदिर, जहां श्रीराम ने किया था हवन, जानिए अब क्यों​ नहीं होती पूजा?

मेहसाणा। सनातन धर्म की महानता, कला एवं संस्कृति को दर्शाते यूं तो देश में हजारों मंदिर हैं। किंतु जिस मंदिर का एक वीडियो पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शेयर किया था, अभी उसके बारे में जानने की उत्सुकता लोगों में बहुत ज्यादा है। बारिश के दौरान उस मंदिर की सीढ़ियों से बहता-छलकता स्वच्छ जल मन मोह रहा था। मंदिर की बनावट ही ऐसी कि, उसमें ढेरों छोटी-छोटी सीढ़नुमा आकृति खासतौर पर बारिश में ही ध्यान आकर्षित करती हैं। उसके अलावा मंदिर प्रांगण के अंदर का दृश्य भी देखने लायक है। तरह-तरह से तराशे गए पत्थर व वास्तु-शिल्पकला सदियों पुराना वैभव याद दिलाती हैं।

मोढ़ेरा के सूर्य मंदिर को जानिए-निहारिए

मोढ़ेरा के सूर्य मंदिर को जानिए-निहारिए

Oneindia.com आपको आज इस मंदिर के बारे में वो सब बताएगा, जो आप जानना चाहते हैं। यह मंदिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात में ही स्थित है। मेहसाणा जिले के मोढ़ेरा में यह सूर्य मंदिर पुष्पावती नदी के किनारे सूर्यवंशी सोलंकी राजा भीमदेव प्रथम ने बनवाया था। दस्तावेजों के अनुसार, विलक्षण स्थापत्य और शिल्प कला का बेजोड़ उदाहरण बना यह मंदिर 1026 ई. में बना।

राजा भीमदेव-1 ने 1026 ई. में बनवाया था

राजा भीमदेव-1 ने 1026 ई. में बनवाया था

इस मंदिर में भगवान सूर्य की प्रतिमा स्थापित कराई गई। इसे इस तरह बनाया गया कि सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक सूरज की किरणें जरूर पड़ती हैं। 11वीं शताब्दी के इस सूर्य मंदिर की देख-रेख भारतीय पुरातत्व विभाग करता है। यही वजह है कि, आज भी यह मंदिर अच्छा-खासा बचा हुआ है। हालांकि, यहां गुजरात से बाहर के लोग बहुत कम ही पहुंचते हैं।

तीन भागों में विभाजित है मंदिर

तीन भागों में विभाजित है मंदिर

जब यह बना था तो इस मंदिर के परिसर को तीन भागों में बांटा गया- गुढ़ा मंडप (धर्मस्थल), सभा मंडाप (सभा भवन) और कुंड (जलाशय)। कुंड में नीचे जाने पर सीढ़ियां बनी हुई हैं और कुछ छोटे-छोटे मंदिर भी बने हुए हैं।अलग-अलग ऋतुकाल में इसके तीनों भागों की खूबसूरत उभर आती है। मंदिर के गर्भगृह में कईं पौराणिक कथाओं का चित्रण दीवारों पर नक्काशी द्वारा किया गया है।

52 स्तंभों पर ​है सभा मंडप

52 स्तंभों पर ​है सभा मंडप

मंदिर का सभा मंडप 52 स्तंभों पर खड़ा है, जो एक वर्ष में 52 सप्ताह दर्शाता है। हवा, पानी, पृथ्वी और अंतरिक्ष के साथ ​समन्वयता दर्शाने के लिए दीवारों पर सूर्य की नक्काशी है। साथ ही मंदिर के चारों तरफ देवी-देवताओं और अप्सराओं की मूर्तियां प्रतिष्ठित हैं। ऐसे में यह मंदिर अपनी छवि के लिए देखते ही बनता है।

चूने का इस्तेमाल नहीं हुआ

चूने का इस्तेमाल नहीं हुआ

मंदिर की एक खासियत यह भी कि इसके निर्माण में चूने का प्रयोग नहीं किया गया। राजा भीमदेव ने इस मंदिर को दो हिस्सों में बनवाया था। पहला हिस्सा गर्भगृह था और दूसरा सभामंडप। सभामंडप के आगे एक विशाल कुंड बना हुआ है, जिसे लोग सूर्यकूंड या रामकुंड के नाम से जानते हैं।

महाभारत-रामायण की चित्रकारी

महाभारत-रामायण की चित्रकारी

इस मंदिर की वास्तुशिल्प कला के उत्कृष्ट उदाहरण मिल जाएंगे। परिसर में कई स्तंभ हैं, जिन पर रामायण और महाभारत काल की चित्रकारी दिख जाएगी। जब इन स्तंभों को नीचे से देखा जाता है तब वह अष्टकोणाकार और ऊपर की ओर देखने से वह गोल नजर आते हैं।

खजुराहो जैसी नक्काशी भी है

खजुराहो जैसी नक्काशी भी है

यह मंदिर इसलिए भी प्रसिद्ध है, क्योंकि यहां खजुराहो जैसी नक्काशी मौजूद है। शिलाओं पर खजुराहो जैसी नक्काशी उकेरी गई। इसलिए, इसे गुजरात का खजुराहो भी कहा जाता है। बरसात के मौसम में यह मंदिर अद्भुत छटा बिखेरता है। वहीं, दिवाली के समय इसकी भव्यता ​देखी जा सकती है।

श्रीराम से जुड़ा पौराणिक तथ्य

श्रीराम से जुड़ा पौराणिक तथ्य

ऐसा कहा जाता है कि, इस मंदिर के आसपास का क्षेत्र पहले धर्मरन्य था। रावण का अंत करने के बाद भगवान राम ब्रह्महत्या से मुक्ति के लिए धर्मरन्य आए थे और यहीं पर व्रत, हवन किया था। श्री राम ने एक नगर भी बसाया था, जिसे ही मोढेरा कहा गया। इतना ही नहीं, उन्होंने जहां हवन किया था, वहीं पर सूर्य मंदिर की स्थापना की गई थी।

स्कंद पुराण व ब्रह्म पुराण में भी उल्लेख

स्कंद पुराण व ब्रह्म पुराण में भी उल्लेख

मोढेरा का वर्णन स्कंद पुराण और ब्रह्म पुराण जैसे प्राचीन शास्त्रों में मिलता है। ग्रंथों में मोढ़ेरा और इसके आसपास के क्षेत्रों को धर्मारण्य या धर्म के नगर के रूप में भी संदर्भित किया गया है। अयोध्या में रामजन्मभूमि का जिक्र जिस तरह स्कंद पुराण में था, उसी तरह इस क्षेत्र का भी पढ़ा जा सकता है।

खिलजी ने किया खंडित, नहीं होती पूजा

खिलजी ने किया खंडित, नहीं होती पूजा

मुगलों के अलावा देश की संपदाओं पर अन्य आक्रांताओं के भी बहुत हमले हुए। विश्व प्रसिद्ध सूर्य मंदिर पर ​अलाउद्दीन खिलजी ने हमला किया। उसने इस मंदिर को खंडित कर दिया था। साथ ही गर्भगृह में रखी सूर्य की स्वर्ण प्रतिमा और खजाने को भी लूट लिया था। तब से यहां पूजा-अर्चना नहीं होने दी जाती।

2014 में वर्ल्ड हेरिटेज में लिस्टेड हुआ

2014 में वर्ल्ड हेरिटेज में लिस्टेड हुआ

संयुक्त राष्ट्र की ब्रांच यूनेस्को ने इसे वर्ष 2014 में, विश्व धरोहर स्थलों की सूची में जगह दी। तब से मोढ़ेरा स्थित सूर्य मंदिर वर्ल्ड हेरिटेज का हिस्सा है। यह मंदिर गुजरात के प्राचीन पर्यटक स्थलों में से भी एक है और यहां की गौरवगाथा का भी प्रमाण है।

मोदी ने डाला 55 सेकेंड का वीडियो

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही इस मंदिर का एक जो वीडियो साझा किया, वह 55 सेकेंड का था। जिसके बारे में उन्होंने लिखा कि, बरसात के मौसम में यह मंदिर अद्भुत छटा बिखेरता है। यह वास्तुशिल्प का उत्कृष्ट नमूना भी है।

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