गुजरात: वडोदरा में 5 लाख के रेमडेसिविर समेत 5 धरे, अहमदाबाद में बेचे जा रहे ऐसे नकली इंजेक्शन
अहमदाबाद। कोरोना मरीजों के लिए बढ़िया दवा माने जाने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन की इन दिनों बड़ी मांग है। मगर, इसके नकली उत्पादन और कालाबाजारी की खबरें भी खूब आ रही हैं। गुजरात के दो शहरों में ऐसे ही अपराधों का पर्दाफाश हुआ है। पहली खबर यह कि, यहां वडोदरा जिले में रेमडेसिवीर की 5 लाख रुपए कीमत की शीशियाँ जब्त की गई हैं और इस मामले में पुलिस ने 5 आरोपितों को पकड़ा है।

वडोदरा के पुलिस आयुक्त शमशेर सिंह ने कहा कि, पुलिस द्वारा रेमेडिसविर इंजेक्शन की कालाबाजारी के खिलाफ अब तक की कार्रवाई में यह सबसे बड़ा अड्डा पता चला है। जहां से बड़ी मात्रा में खेप बरामद की गई है।

दूसरा मामला गुजरात के सबसे बड़े शहर अहमदाबाद से सामने आया है, जहां नकली रेमडेसिवर इंजेक्शन बेचे जा रहे थे। क्राइम ब्रांच ने इस बारे में आज बताया, "मामले में शामिल एक आरोपी दवाइयों का काम करता है। दूसरे आरोपी ने कई अस्पतालों में काम किया है। इन आरोपियों को रेमडेसिविर के लिए फोन आते थे। ये सभी कैश में अपना काम करते थे।"

कितना कारगर है रेमडेसिविर इंजेक्शन?
रेमडेसिविर इंजेक्शन को भारत में कोरोना मरीजों के बचाव के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, यह कितना कारगर है, इसका कोई पैमाना नहीं है। डब्लूएचओ का एक एक्सपर्ट् पैनल का कहना है कि, कोविड के ट्रीटमेंट में "रेमडेसिवीर" के इस्तेमाल का कोई सार्थक प्रभाव नहीं है। पैनल ने चेताया है कि, इसके फायदे उतने नहीं होते, जैसी कि उम्मीदें हैं। पैनल ने निष्कर्ष निकाला है कि आंतरिक रूप से दिए गए "रेमडेसिवीर" का मरीजों के लिए ज्यादा फायदेमंद होने की बात गले नहीं उतरतीं। न ही इससे मृत्यु दर कम की जा सकती हैं। वहीं, भारत की संस्थाएं मानती हैं कि इस दवा का सकारात्मक असर पड़ता है।












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