4 महीने तक अस्पताल में भर्ती कोरोना पॉजिटिव महिला हुईं डिस्चार्ज, भारत का ऐसा पहला क्रिटिकल केस!
अहमदाबाद, 01 सितंबर: कोरोना की दूसरी लहर ने ना जानें कितने परिवार को ना भूलने वाले जख्म दिए हैं। लोगों ने अपनी आंखों से अपने घर के सदस्य को खोते देखा हैं। लाचारी बेबसी के ऐसे हजारों दर्द कोरोना की दूसरी लहर के दौरान सामने आए थे। लेकिन अब एक ऐसा मामला सामने आया है, जो पूरे भारत में सिर्फ गुजरात में ही शायद देखा गया होगा।

4 महीने बाद वापस घर लौटीं पुष्पाबेन
दरअसल, इस साल जब कोरोना की दूसरी लहर अप्रैल से जून तक कहर मचा रही थी तो देशभर के अस्पतालों में कोविड बेड से लेकर ऑक्सीजन का भारी संकट हो गया था। इस दौरान कई मरीजों की तो ऑक्सीजन ना मिलने के कारण सांसें उखड़ गई थी। इसी घातक कोरोना की दूसरी लहर के दौरान गुजरात के वडोदरा की रहने वाली 35 वर्षीय महिला पुष्पाबेन भी संक्रमिक होकर अस्पताल में भर्ती हुई थी, जो बुधवार को 4 महीने बाद वापस घर लौटीं हैं।

भारत में ऐसा नहीं आया कोई केस!
4 महीने बाद अस्पताल से घर लौटीं पुष्पाबेन को देखकर उनके परिवार के लोग काफी खुश नजर आ रहे हैं। अपने सदस्य के कोरोना संक्रमित होने के बाद परिवार के लोगों को चिंताओं ने घेर लिया था, लेकिन अब वो अपनों के बीच घर लौट आईं है। वहीं अस्पताल के नोडल अधिकारी ने बताया कि हमने उनको 2 दिन पहले छुट्टी दे दी थी। वह घर पर ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। उन्होंने इसी के साथ ही दावा किया कि भारत में अभी तक उनके जैसा कोई भी मामला नहीं आया है।

'मैं अपने घर जरूर लौटूंगी'
वहीं पुष्पाबेन बताया कि मैं मजबूत रही और सोचा कि मैं अपने घर जरूर लौटूंगी। मैं 4 महीने बाद वापस आई हूं। मैं बहुत खुश हूं। मैं वेंटिलेटर पर थी। अस्पताल के स्टाफ ने मेरा बहुत सहयोग किया। उनकी कड़ी मेहनत और अपनी इच्छाशक्ति के कारण ही मैं आज अपने परिवार के साथ वापस आई हूं।












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