Morbi Bridge Case: गुजरात HC ने मुख्य सचिव को लताड़ा, कहा- पुल के मरम्मत कार्य के लिए टेंडर क्यों नहीं निकाला
गुजरात के मोरबी
Gujarat Morbi Bridge Collapse Case: गुजरात के मोरबी में 30 अक्टूबर को मच्छु नदी पर बना केबल ब्रिज टूटने से बड़ा हादसा हो गया था। नदी में पुल के गिरने से महिलाओं और बच्चों सहित 135 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस पूरे मामले पर गुजरात हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान ली गई जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई की। इस दौरान अदालत ने सीधा जवाब मांगा और मोरबी में 30 अक्टूबर को गिरने वाले पुल के नवीनीकरण के लिए जिस तरह से ठेका दिया गया, उसकी आलोचना की।
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मुख्य न्यायाधीश अरविंद कुमार ने सुनवाई के दौरान गुजरात के शीर्ष नौकरशाह मुख्य सचिव से कहा कि एक सार्वजनिक पुल के मरम्मत कार्य के लिए निविदा क्यों नहीं मंगाई गई? बोलियां क्यों नहीं आमंत्रित की गईं? बता दें कि मोरबी नगरपालिका ने ओरेवा ग्रुप को 15 साल का ठेका दिया था, जो कि अजंता ब्रांड की वॉल क्लॉक के लिए जाना जाता है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने प्रारंभिक अवलोकन के रूप में कहा कि नगर पालिका, जो एक सरकारी निकाय है, ने चूक की है, जिसने अंततः 135 लोगों को मार डाला,"
और पूछा कि क्या गुजरात नगर पालिका अधिनियम, 1963 का पालन किया गया था। जज ने मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि इतने महत्वपूर्ण कार्य के लिए महज डेढ़ पेज में एग्रीमेंट कैसे पूरा हुआ? क्या बिना किसी टेंडर के अजंता कंपनी के साथ दरियादिली की गई? अदालत ने खुद इस त्रासदी पर संज्ञान लिया था और छह विभागों से जवाब मांगा था। चीफ जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस आशुतोष जे शास्त्री इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं।
अदालत ने पहले दिन से कॉन्ट्रैक्ट की फाइलें सीलबंद लिफाफे में जमा करने को भी कहा। बता दें कि पुल का कॉन्ट्रैक्ट करने वाली कंपनी के कुछ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है, हालांकि टॉप मैनेजमेंट जिसने ₹7 करोड़ का समझौता किया है उस पर अभी तक किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई है।












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