गुजरात: 1 वेंटिलेटर पर कई कोरोना मरीज, डॉक्टरों ने निकाला ऐसा तोड़ कि होने लगी वाहावाही
अहमदाबाद। कोरोना महामारी से मरीजों के बचाव के लिए वेंटिलेटर की पर्याप्त व्यवस्था होनी जरूरी है। मगर, जिस तेजी से इस वायरस का संक्रमण फैल रहा है, कई अस्पतालों में वेंटिलेटर्स का टोटा हो गया है। मरीजों के लिए वेंटिलेटर कम पड़ गए हैं। इस समस्या से निपटने के लिए शहर के इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिसीज एंड रिसर्च सेंटर के डॉक्टर्स ने वेंटिलेटर से जुड़े कई बदलाव किए हैं। एक वेटिंलेटर के उन्होंने कई हिस्से कर दिए हैं।

गुजरात में डॉक्टरों ने ढूंढा ये तोड़
इस सुविधा का अब फायदा यह हो रहा है कि, एक वेंटिलेटर पर कई-कई मरीजों का इलाज किया जा सकता है। डॉक्टर कहते हैं कि, कोरेाना के मरीज को सांस लेने में परेशानी होती है। इसमें भी 60 साल से अधिक उम्र वालों की स्थिति तो अधिक खराब हो जाती है। ऐसे में इन मरीजों को मैकेनिकल-वेंटिलेटर की जरूरत होती है। ये एक ऐसी मशीन होती है। जिसमें सांस लेने में असमर्थ रोगियों को मदद मिल सकती है। इस मशीन की मदद से मरीज की सांस लेने की नली में एक ट़यूब डाली जाती है। जिससे यह लोग फेफड़ों तक सांस खींच सकते हैं।

अब एक से ही कई मरीजों का इलाज हो रहा
आईकेडीआरसी के निर्देशक विनीत मिश्रा ने कहा कि, हमें प्रत्येक मरीज के लिए वेंटिलेटर की आवश्यकता है, लेकिन हमारे पास वेंटीलेटर पर्याप्त संख्या में नहीं है। इसी कारण हमने वेंटिलेटर को संशोधित किया है और उसमें से अलग-अलग नलियां निकाली हैं। जिसे कई मरीजों की सांस लेने की नली में डालकर सबका एक साथ इलाज किया जा सकता है।

भारत ही नहीं, दुनियाभर में कम पड़ गए वेंटिलेटर
कोरोना वायरस के कारण अमेरिका जैसे संपन्न देश में भी वेंटीलेटर्स कम पड़ गए। जिसके चलते वहां भी उत्पादन शुरू करना पड़ा। इधर, भारत में कहीं-कहीं वेंटिलेटर की कमी हो रही है। जिसके लिए सरकार भी तैयारियों में जुट गई है। ऐसे वक्त में गुजराती डॉक्टर्स द्वारा किए गए इस संशोधन को सरकार अप्लाय कर सकती है।












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