देश में शेरों का कुनबा बढ़ा, 700 के पार पहुंच गई अब संख्या, वन की वृद्धि से सेफ हुए जंगल के राजा
गिर सोमनाथ। एशियाई शेरों (एशियाटिक लॉयन) के लिए प्रसिद्ध गिर जंगलाें में शेरों की तादाद बढ़ रही है। वन विभाग गुजरात द्वारा मई-जून की पूर्णिमा में रात्रि अवलोकन के जरिए शेरों की संख्या जानने की कोशिश की गई, तो पाया कि उनकी संख्या 6 से 7% बढ़ गई है। हालांकि, विभाग के कर्मियों ने अभी आधिकारिक गणना किए जाने की बात नहीं बताई है। पिछले साल जून महीने में ही वन विभाग द्वारा आंकलन किया गया था, तो बताया गया था कि गिर जंगल क्षेत्र में शेरों से ज्यादा शेरनियां हैं।

5 वर्षों में शेरों की आबादी में 30% बढ़ी
वर्ष 2020 में गिर के जंगलों में शेर-शेरनियों की संख्या 674 हो गई थी, यह आंकडा अब 700 के पार पहुंच गया है। बताते चलें कि, शेरों की आधिकारिक गणना 5 साल में होती है और पिछली गणना 2020 में हुई थी। उससे पहले वर्ष 2015 में यहां 523 शेर थे। 5 वर्षों के दौरान शेरों की संख्या में 29 फीसदी का इजाफा हुआ और तादाद 674 हो गई। फिलहाल यहां 700 से ज्यादा शेर हैं। वन विभाग का अनुमान है कि, गिर की वाइल्डलाइफ सैन्चुअरी और इसके आस-पास के क्षेत्र में शेरों की कुल संख्या 710 से लेकर 730 हो सकती है।

वनक्षेत्र में बढ़ोतरी की वजह से तादाद भी बढ़ी
वन विभाग की वर्ष 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक, 30 सालों में शेरों की संख्या ढाई तक गुना बढ़ी। अच्छी बात यह भी रही कि, शेरों के मुकाबले शेरनियां ज्यादा पैदा हुईं। 2020 में पाए गए कुल 674 सिंहों में 161 नर थे, जबकि 260 मादा थीं। इनके अलावा अल्प व्यस्क शेरों की संख्या 94 है, जिनमें 45 नर और 49 मादा थीं। वहीं, शावकों की संख्या 137 और अचिन्हित लिंग वाले 22 शेर थे।

प्रकृति प्रेमियों का कहना है कि, शेर जैसे जंगली जानवर की आबादी बढ़ने में बड़ी भूमिका जंगलों की ही है। दरअसल, गिर के वनों और उसके आसपास के शेरों के विचरण वाले क्षेत्र में 36 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह इलाका 9 जिलों में बढ़कर 30,000 वर्ग किमी हो गया है। इससे पहले 2015 में शेरों के पदचिह्न पाए जाने का कुल क्षेत्र पांच जिलों में 22000 वर्ग किमी ही था।












Click it and Unblock the Notifications