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अदालत पहुंचा भारत के सबसे पुराने एयरक्राफ्ट करियर INS विराट को म्यूजियम में तब्दील करने का मामला

अहमदाबाद। भारतीय नौसेना से बाहर किए गए पुराने एयरक्राफ्ट करियर आईएनएस विराट को खरीदकर म्यूजियम में तब्दील कराने का मामला अदालत पहुंच गया है। इस संबंध में मुंबई की एक फर्म ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका पर आज ही के दिन सुनवाई की संभावना है। दरअसल, जिस फर्म ने इसे म्यूजियम बनाने के लिए खरीदने में दिलचस्पी दिखाई थी, उसे अब तक केंद्र सरकार से एनओसी नहीं मिल सकी है। ऐसे में फर्म के मालिक आईएनएस विराट को तोड़े जाने से बचाकर म्यूजियम बनवाने की बात कहते हुए अदालत पहुंचे हैं। वहीं, इससे पहले गुजरात की जिस कंपनी ने यह युद्धपोत तोड़े जाने के लिए खरीदा था वह श्रीराम ग्रीन शिप रिसाइकिलिंग इंडस्ट्रीज है।

यह है पूरा मामला

यह है पूरा मामला

श्रीराम ग्रीन शिप रिसाइकिलिंग इंडस्ट्रीज के मालिक ने कहा था कि, हम यूं तो आईएनएस विराट को कबाड़ नहीं बनाना चाहते। मगर, कोई खरीददार नहीं मिला तो हम इसके कलपुर्जे अलग अलग कर काम में लेंगे। वहीं, जब एक फर्म (एन्विटेक मरीन कंसलटेन्ट्स प्रा. लि.) इसे खरीदने के ​तैयार हुई तो उसे एनओसी नहीं मिली। एन्विटेक मरीन कंसलटेन्ट्स प्रा. लि. मुंबई की ही एक फर्म है। उसकी ओर से दायर याचिका में यह कहा गया है कि आईएनएस विराट सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाला युद्धपोत है। यह ब्रिटिश नेवी में एचएमएस हर्मिश के रूप में वर्ष 1959 से लेकर 1984 तक अपनी सेवा दे चुका है। इसके बाद इसे भारतीय नौ सेना में शामिल किया गया। इसलिए इस युद्धपोत का इस तरह अंत नहीं होना चाहिए। हम इसे खरीदकर म्यूजियम में बदलना चाहते हैं, इसलिए परमिशन दी जाए।

खाली खोखे की तरह यहां खड़ा है पोत

खाली खोखे की तरह यहां खड़ा है पोत

बताते चलें कि, आईएनएस विराट अब एक खाली खोखे की तरह है और इन दिनों वह गुजरात में भावनगर जिले के अलंग में दुनिया के सबसे बड़े शिप ब्रेकिंग यार्ड से कुछ दूरी पर मौजूद है। बीते 28 सितंबर को इसका औपचारिक तौर पर समुद्र में विसर्जन किया गया। इस विमानवाहक पोत को नीलामी में खरीदने वाले व्यापारी मुकेश पटेल ने बताया कि, अलंग के गहरे समुद्री क्षेत्र में आईएनएस विराट के विसर्जन का 28 सितंबर को काम शुरू किया गया। विसर्जन से पहले कस्टम, गुजरात मैरिटाइम बोर्ड (जीएमबी), गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जीपीसीबी) और एईआरबी सहित प्राधिकरण की जरूरी औपचारिकताओं को पूरा किया गया था।

यह दुनिया का पहला ऐसा एयरक्राफ्ट कैरियर था

यह दुनिया का पहला ऐसा एयरक्राफ्ट कैरियर था

करीब 76 साल पुराने आईएनएस विराट को विसर्जित होते देख इस पर तैनात रहे जांबाजों ने कहा- अगर हमारा यह पोत म्यूजियम में तब्दील होता तो इतिहास जिंदा रहता। उनका कहना सही भी है, क्योंकि इस विमान वाहक पोत से भारतीय नाैसेना की कई यादें जुड़ी हैं। इसमें ऐसी कई खासियतें भी थीं, जिनके रहते हमारी समुद्री सीमा दुश्मन से सुरक्षित रही। यह दुनिया का पहला ऐसा एयरक्राफ्ट कैरियर भी है, जिसके नाम पर सबसे ज्यादा नेवल ऑपरेशन्स में शामिल होने का रिकॉर्ड है।

भारतीय और ब्रिटिश नेवी, दोनों में सेवा दी

भारतीय और ब्रिटिश नेवी, दोनों में सेवा दी

आईएनएस विराट दुनिया का इकलौता ऐसा पोत माना जाता है, जो भारतीय और ब्रिटिश नेवी, दोनों सेनाओं का हिस्सा रह चुका है। यह भारत का दूसरा एयरक्राफ्ट करियर था। इससे पहले इंडियन नेवी में आईएनएस विक्रांत था। विक्रांत रिटायर हो गया। जिसके बाद आईएनएस विराट भी रिटायर हो गया। बता दें कि, साल 2017 में इसे रिटायर करने के बाद कोच्चि में सबसे पहले इसके इंजन, जनरेटर निकाले गए थे। जिसके बाद आज का दिन है, जब काफी सारे लोग इसके विसर्जन के अंतिम गवाह बने।

चलता-फिरता शहर था यह

चलता-फिरता शहर था यह

आईएनएस विराट करीबन 226 मीटर लंबा है। इसकी चौड़ाई 49 मीटर है। आमजन के लिए यह एक प्रकार से चलता-फिरता शहर था। जिसमें लाइब्रेरी, जिम, एटीएम, टीवी और वीडियो स्टूडियो, अस्पताल, दांतों के इलाज का सेंटर और मीठे पानी का डिस्टिलेशन प्लांट जैसी सुविधाएं भी थीं।

VIDEO: सबसे पुराने​ एयरक्राफ्ट करियर INS विराट ने पूरा किया अपना आखिरी सफर, अब बनेगा कबाड़

'जलमेव यस्य, बलमेव तस्य'

'जलमेव यस्य, बलमेव तस्य'

दुनिया के सबसे पुराने एयरक्राफ्ट करियर में से एक 'आईएनएस विराट' जब भारतीय नौसेना में सेवा दे रहा था। तब इस विमान वाहक पोत का ध्येय वाक्य 'जलमेव यस्य, बलमेव तस्य' था। जिसका मतलब होता है- 'जिसका समंदर पर कब्जा है, वही सबसे बलवान है।'

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