भारतीय वैज्ञानिकों का कमाल, खोज निकाला बृहस्पति से भी डेढ़ गुना बड़ा ग्रह, जानिए क्या वहां है जीवन?
अहमदाबाद, 18 नवंबर। अंतरिक्ष में दूसरी 'पृथ्वी' की खोज में दुनियाभर के वैज्ञानिक दिन रात ब्रह्मांड की खाक छान रहे हैं। हालांकि इस खोज में खगोलविदों को नए-नए ग्रह मिलते रहते हैं, जहां जीवन की संभावना भी हो सकती है। ऐसे ही एक नए ग्रह की खोज गुजरात स्थित अहमदाबाद के वैज्ञानिकों ने की है, जो साइज में हमारे जुपिटल से भी डेढ़ गुना बड़ा है। इस प्लैनेट पर जीवन नहीं हो सकता क्योंकि ये एक आग का गोला है, लेकिन वैज्ञानिकों ने इससे सौरमंडल के कई रहस्य सामने आने की उम्मीद जताई है।

सौरमंडल से बाहर है नया ग्रह
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अहमदाबाद स्थित भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) के वैज्ञानिकों ने एक एक्सोप्लैनेट की खोज की है जो हमसे 725 प्रकाश वर्ष दूर है। इतना ही नहीं, यह ग्रह एक बूढ़े तारे का चक्कर भी लगा रहा है, जो सूर्य के मास (द्रव्यमान) का 1.5 गुना है। भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा खोजा गया ये एक्सोप्लैनेट बृहस्पति के आकार से भी 1.4 गुना बड़ा है। यह एक विशाल तारे की परिक्रमा कर रहा है।

साइज में बृहस्पति से भी बड़ा
पृथ्वी पर दिनों से हिसाब लगाए तो ये एक्सोप्लैनेट 3.2 दिन में अपने तारे का एक चक्कर पूरा करता है। बृहस्पति से बड़ा होने के बावजूद इसका द्रव्यमान हमारे सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह का 70 फीसदी ही है। एक्सोप्लैनेट्स, ग्रहों का एक पिंड हैं जो हमारे सौर मंडल के बाहर हैं, वे आमतौर पर एक तारे की परिक्रमा करते हैं। नए खोजे गए एक्सोप्लैनेट और उसके तारे के बीच की दूरी सूर्य और बुध के बीच की दूरी का लगभग दसवां हिस्सा है।
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1726.85 डिग्री सेल्सियस तापमान
इस एक्सोप्लैनेट का नामकरण भी किया जा चुका है, इसे HD 82139b या TOI 1789b नाम से पहचाना जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि अपने तारे के करीब होने की वजह से यह एक्सोप्लैनेट बेहद गर्म है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इसके सतह का तापमान 2,000 डिग्री केल्विन (1726.85 डिग्री सेल्सियस) तक पहुंच जाता है। गर्म आग का गोला होने की वजह से यहां जीवन की संभावना भी नहीं है।

वैज्ञानिकों को मिलेगी कई जानकारियां
इस तरह के ग्रहों के पिंडों को अक्सर 'हॉट जुपिटर' कहा जाता है। शोध के मुताबिक अभी तक ऐसे 8 एक्सोप्लैनेट की खोज की जा चुकी है। रिपोर्ट को रेफरीड जर्नल मंथली नोटिसेज ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी में प्रकाशित किया गया है। रिसर्च में कहा गया कि 'गर्म जुपिटर' के खोज से उनके मैकेनिज्म को समझने में मदद मिलती है, साथ ही सितारों के आसपास के ग्रहों के विकास को समझने का अवसर भी मिलेगा।

माउंट आबू में लगे टेलीस्कोप से हुई खोज
इस एक्सोप्लैनेट की खोज माउंट आबू लगाए गए ए़डवांस टेलीस्कोप रेडियल-वेग अबू-स्काई सर्च ऑप्टिकल फाइबर-फेड स्पेक्ट्रोग्राफ का उपयोग करके हुई। दिसंबर 2020 और मार्च 2021 के बीच इसे ट्रैक किया जा रहा था। एक्सोप्लैनेट जिस तारे की परिक्रमा कर रहा है उसे HD 82139 या TOI 1789 कहा जाता है। नए पाए गए एक्सोप्लैनेट को HD 82139b या TOI 1789b के नाम से जाना जाएगा।
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