देश के दूसरे सबसे बड़े बांध में पानी ने छुआ पूर्ण जलस्तर, 138.6 मीटर भरा, CM ने की पूजा
नर्मदा। भारत का दूसरा सबसे बड़ा बांध 'सरदार सरोवर डैम' अब पूरा भर गया है। बांध का जलस्तर अपने पूर्ण-स्तर (138.68 मीटर) पर पहुंच गया है। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने नर्मदा के जल की पूजा की। उनके साथ जल विभाग के अधिकारियों समेत बड़ी संख्या में लोग एकतानगर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने कहा कि, 'यह हमारे राज्य के लिए बहुत खुशी की बात है कि गुजरात की लाइफलाइन कहा जाने वाला 'सरदार सरोवर डैम' 138.68 मीटर के पूर्ण जलस्तर पर पहुंच गया है।'

गुजरात की लाइफलाइफ, अब पानी की कमी नहीं
बांध प्रबंधन की ओर से कहा गया कि, अब यहां इतना पानी है कि सालभर की पूर्ति हो सकेगी। अधिकारियों ने बताया कि, इस ऐतिहासिक क्षण में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल खुद एकतानगर आए और मां नर्मदा के जल की पूजा की। उन्होंने नर्मदा नीर को प्रणाम किया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा, 'मेरी प्रार्थना है कि गुजरात पर सदा मां नर्मदा की कृपा बनी रहे। नमामि देवी नर्मदे।' मुख्यमंत्री ने मौके से तस्वीरें भी साझा कीं।

एक किलोमीटर से भी ज्यादा है इस डैम की लंबाई
बता दें कि, नर्मदा नदी पर स्थित बांध को ही सरदार सरोवर डैम कहा जाता है। यह डैम 138 मीटर से भी ज्यादा ऊँचा (नींव सहित 163 मीटर) है, जिसकी लम्बाई 1210 मीटर है। इसे भारत का दूसरा सबसे बड़ा बांध माना जाता है। इस बांध की वजह से गुजरात को बड़ी मात्रा में बिजली मिलती है। गुजरात और मध्य प्रदेश में बारिश के कारण इस बांध का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इस बांध अधिकतम जल स्तर 138.68 मीटर है। इसलिए बांध अब छलकने वाला है।

नेहरू ने शुरू की परियोजना, मोदी ने उद्घाटन किया
भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने सरदार सरोवर बांध की नींव 5 अप्रैल, 1961 में रखी थी। हालांकि, स्थानीय विरोध-प्रदर्शनों के चलते यह परियोजना अटक गई थी। भाजपा सरकार में यह मामला सुलझा। परियोजना पूरी होने पर देश के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बांध का उद्घाटन किया। नर्मदा नदी पर बना यह ऐसा बांध है, जिसके संयंत्र से मध्य प्रदेश के लिए भी बिजली पहुंचाई जाती है। नर्मदा नदी पर बनने वाले 30 बांधों में सरदार सरोवर और महेश्वर दो सबसे बड़ी बांध परियोजनाएं हैं और इनका विरोध होता रहा है। सरकार ने कहा था कि, इन परियोजनाओं का उद्देश्य गुजरात के सूखाग्रस्त इलाक़ों में पानी पहुंचाना और मध्य प्रदेश के लिए बिजली पैदा करना है, लेकिन ये परियोजनाएं अपनी अनुमानित लागत से काफ़ी ऊपर चली गई हैं।
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— Bhupendra Patel (@Bhupendrapbjp) September 15, 2022












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