मोरबी हादसे में जिंदा बचे युवक बोले- 15-20 शरारती लड़के धक्का मार रहे थे, रस्सियां हिलाने से ब्रिज डगमगाया
morbi cable bridge collapse: गुजरात के मोरबी ब्रिज हादसे में जिंदा बचे कई लोगों ने आपबीती सुनाई। अश्विन मेहरा नाम के युवक ने कहा कि, मैं इस हादसे को जीवनभर नहीं भूल पाउंगा। बहुत दुखदायी क्षण थे। अश्विन ने कहा कि, जिस वक्त हादसा हुआ, मैं ब्रिज पर ही था। यह हादसा शाम करीब 6.30 बजे हुआ। मैंने देखा कि, 15-20 शरारती लड़के केबल ब्रिज पर हो-हल्ला मचा रहे थे। कोई धकिया रहा था, तो कोई ब्रिज की रस्सियों को हिला रहा था। गिरने से पहले 3 बार आवाज आई, ब्रिज के टूटने की।"
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बता दें कि, सोशल मीडिया पर उस हादसे से ठीक पहले के कई वीडियो सामने आए हैं। एक वीडियो में दिख रहा है कि, ब्रिज पर भारी भीड़ है और उसी दौरान कुछ युवक लातें मार-मारकर ब्रिज की रस्सियां हिलाते दिख रहे हैं। एक अन्य वीडियो में सैकड़ों लोगों से भरे केबल ब्रिज को हिलते साफ देखा जा सकता है। इस हादसे में जीवित बचे अश्विन मेहरा ने कहा, "मैंने कई छोटे बच्चों को भी पुल की रस्सियों को हिलाते देखा।
यह पूछे जाने पर कि वह इस त्रासदी से कैसे बचे, अश्विन ने कहा, "मैं पास के पेड़ों की शाखाओं को पकड़ कर बच गया। मेरे साथ मेरा दोस्त प्रकाश था और वह भी बच गया। उसके पैर और पीठ में चोटें आई हैं। उसका सरकारी अस्पताल में इलाज चल रहा है।"
बता दें कि, मोरबी में नदी पर केबल ब्रिज टूटने की घटना में बचे सभी घायलों को जीएमईआरएस जनरल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

मोरबी ब्रिज हादसे से जिंदा बचे युवकों ने बताई कहानी
एक अन्य युवक ने भयावह हादसे के बारे में बात करते हुए कहा, "मेरी जिंदगी खतरे में थी, मैं प्राण बचाने के लिए मझधार में लटक रहा था, लेकिन मेरे चचेरे भाई कुछ ही देर में मेरी नजरों से ओझल हो गए।'
उसने कहा, "पहली बार तो मुझे लगा कि मैं एक डरावना सपना देख रहा हूं, लेकिन जब मैं पानी में गिर गया, तो मुझे पता चला कि क्या हुआ है। मैं अपनी जान बचाने के लिए दो घंटे तक लटका रहा। मेरे सामने कई बच्चे डूब रहे थे। हालांकि, मैं उन्हें नहीं बचा सका क्योंकि मैं तैरना नहीं जानता था,"
हादसे में जान गंवाने वाले अपने चचेरे भाई के बारे में बात करते हुए, युवक ने कहा, "जब हम गिरे तो मैंने अपने चचेरे भाई को भी नहीं देखा। वह दूसरी तरफ था, और मैं दूसरी तरफ था। फिर, निकायकर्मियों ने बताया कि मेरे चचेरे भाई का शव पुल के नीचे पानी में मिला है। शव को क्रेन की मदद से बाहर निकाला गया था।"

मैं केबल ब्रिज के बीचोंबीच था, 2 घंटे लटका रहा
युवक ने कहा, "मैं केबल ब्रिज के बीचोंबीच था। वह ब्रिज बीच से टूट गया और हम सब सीधे नीचे गिर गए। यह सच है कि ब्रिज लोगों से बहुत ज्यादा भरा हुआ था।" उसने यह भी सवाल किया, "अगर नगर निगम ने ब्रिज को खोलने की अनुमति नहीं दी तो इसे क्यों खोला गया?"

'फिटनेस सर्टिफिकेट' भी जारी नहीं हुआ था
वहीं, मोरबी नगर निगम के प्रमुख ने दावा किया है कि ब्रिज को अधिकारियों की अनुमति के बिना फिर से खोल दिया गया था। नगर निगम के मुख्य अधिकारी संदीप सिंह ने कहा कि रविवार को जो पुल खचाखच भरने पर टूटा, उसे वास्तव में 'फिटनेस सर्टिफिकेट' भी जारी नहीं किया गया था। अधिकारी ने कहा, "ऐतिहासिक रूप से, केवल 20 से 25 लोग पुल पर एक बैच में जाते थे, जो हमेशा से रहा है।" उन्होंने कहा, "उनकी (कंपनी की) लापरवाही के कारण, यह हुआ, बहुत सारे लोगों को एक साथ भेजा गया था। एक बार में लगभग 400-500 लोग वहां पहुंच गए थे,"

कई मामले दर्ज किए गए
वहीं, इस घटना के बाद गुजरात पुलिस ने कुछ शिकायतों के आधार पर आईपीसी की धारा 304 और 308 (गैर इरादतन हत्या) के तहत एफआईआर दर्ज की है। गुजरात सरकार ने पुल गिरने की घटना की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का भी गठन किया है। मोरबी बी डिवीजन के पुलिस निरीक्षक, प्रकाशभाई देकावड़िया ने कहा, "पुल के रखरखाव और प्रबंधन एजेंसियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या), 308 (गैर इरादतन हत्या करने का प्रयास), और 114 (अपराध होने पर उपस्थित होने वाले) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।, "
कल यानी कि, मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोरबी आएंगे। राज्य के मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से हादसे के बारे में कुछ जानकारी साझा की गई है। नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, ब्रिज टूटने से महिलाओं और बच्चों सहित कम से कम 132 लोगों की मौत हो गई और 100 से अधिक लोगों का इलाज चल रहा है।












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