अंग्रेजी ही अदालत की भाषा, दूसरी भाषा बोलने पर जोर नहीं दे सकते: गुजरात हाईकोर्ट

अहमदाबाद। न्यायालय की भाषा अंग्रेजी ही है, ऐसे में दूसरी भाषा बोलने पर जोर नहीं दे सकते। यह बात गुजरात हाईकोर्ट ने कही है। इसके लिए हाईकोर्ट के जज ने संविधान के अनुच्छेद 348 का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि हाईकोर्ट की भाषा अंग्रेजी होगी। जिसके रहते कोई पक्षकार किसी अन्य भाषा में सुनवाई पर जोर नहीं दे सकता।

भाषा को लेकर गुजरात हाईकोर्ट की टिप्पणी

भाषा को लेकर गुजरात हाईकोर्ट की टिप्पणी

दरअसल, एक मामले की सुनवाई के दौरान पेश एक व्यक्ति ने अदालत में कहा कि, "मैं केवल गुजराती में दलील पेश करूंगा। सुनवाई गुजराती में हो।" जिसका चीफ जस्टिस अरविंद कुमार, जस्टिस आशुताेष जे. शास्त्री की बेंच ने जवाब दिया। चीफ जस्टिस अरविंद कुमार ने कहा, "हम गुजराती नहीं समझ सकते। अगर पक्षकार वकील का खर्च उठाने में असमर्थ हैं तो हम पक्षकार को कानूनी सहायता के रूप में वकील की सेवा दिलवा सकते हैं।" इसके बावजूद पक्षकार ने गुजराती में बात रखने पर जोर दिया।

चीफ जस्टिस बोले- तो मैं कन्नड में जवाब दूंगा

चीफ जस्टिस बोले- तो मैं कन्नड में जवाब दूंगा

पक्षकार के जिद करने पर चीफ जस्टिस ने माैखिक सुनवाई के दाैरान कहा, "अगर पक्षकार गुजराती में दलील पेश कर रहा है तो हम कन्नड़ में जवाब देंगे।" यह जवाब सुनकर हाईकोर्ट परिसर में मौजूद अन्य लोग चौंक गए। हालांकि, चीफ जस्टिस ठंडे मूड में थे और उनकी अगुवाई में कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट में सुनवाई अंग्रेजी में होगी। चीफ जस्टिस अरविंद कुमार, जस्टिस आशुताेष जे. शास्त्री की बेंच ने सुनवाई की भाषा काे लेकर यह अहम टिप्पणी की है, इससे लोगों को यह पता चलेगा कि हाईकोर्ट में सुनवाई का कार्य अंग्रेजी भाषा में होता है। हालांकि, लोग ये भी मानते हैं कि यह दायित्व जज के उूपर भी है कि जज कौन सी भाषा जानते हैं।

पहला ऐसा हाईकोर्ट जहां यू-ट्यूब पर लाइव स्ट्रीमिंग शुरू हुई

पहला ऐसा हाईकोर्ट जहां यू-ट्यूब पर लाइव स्ट्रीमिंग शुरू हुई

बता दें कि, गुजरात हाईकोर्ट देश का पहला ऐसा हाईकोर्ट बना, जहां सुनवाई की यू-ट्यूब पर लाइव स्ट्रीमिंग शुरू हुई। यहां ऐसा पिछले साल हुआ, कि सुनवाई का यू-ट्यूब पर लाइव स्ट्रीमिंग शुरू किया गया। इसका फायदा यह है कि, कोर्ट की कार्रवाई आमजन भी लाइव देख सकेंगे। जुलाई के महीने में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन्ना ने यहां लाइव स्ट्रीमिंग आरंभ कराई। रमन्ना खुद वर्चुअल तरीके से 17 जुलाई को गुजरात हाईकोर्ट की सुनवाई के जीवंत प्रसारण के गवाह बने थे।

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