Gujarat Election:गुजरात चुनाव में वोटिंग से एक महीने पहले बीजेपी आगे, सर्वे में कांग्रेस और AAP कहां है? जानिए
गुजरात चुनाव से ठीक पहले दलगत स्थिति को लेकर एक सर्वे हुआ है, जिसके नतीजे स्पष्ट तौर पर भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में दिखाई पड़ रहे हैं। लेकिन, तथ्य यह है कि अभी वोटिंग में करीब एक महीना है और इतने समय बाद वास्तविक स्थिति क्या रहेगी, इसकी कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। सर्वे के मुताबिक दूसरे स्थान के लिए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच कांटे का मुकाबला नजर आ रहा है, लेकिन फिलहाल इसमें कांग्रेस पिछड़ती नजर आ रही है। 2017 के चुनाव में कांग्रेस ने ढाई दशकों बाद सबसे अच्छा प्रदर्शन किया था और यह सफलता तब मिली थी, राहुल गांधी मंदिर-मंदिर घूमे थे। इस बार वह अपनी भारत जोड़ो यात्रा में ही मस्त हैं।

गुजरात चुनाव से पहले भाजपा को वोट शेयर में बढ़त- सर्वे
गुजरात चुनाव में पहले चरण की वोटिंग से तकरीबन एक महीने पहले लोकनीति और सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपमेंट सोसाइटीज (CSDS) ने एक प्री-पोल सर्वे किया है, जिससे पता चलता है कि राज्य में चुनावी समीकरण तेजी से बदले हैं और इस बार परंपरा से उलट त्रिकोणीय मुकाबला दिखना तय है। वोट शेयर के मामले में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी अपने विरोधियों से काफी आगे है। भाजपा का अनुमानित वोट शेयर आम आदमी पार्टी से लगभग दोगुना रहने वाला है, जो अभी दूसरे नंबर पर चलती दिख रही है। चुनाव में आम आदमी पार्टी के जोरदार प्रचार अभियान की वजह से कांग्रेस तीसरे नंबर पर खिसक चुकी है, लेकिन वह भी दिल्ली-पंजाब वाली पार्टी से ज्यादा पीछे नहीं है। सर्वे का नतीजा है कि कांग्रेस का वोट शेयर (2017 में कांग्रेस को 41.44% ) पिछले चुनाव के मुकाबले घटकर करीब आधा रह सकता है, जिसका फायदा आम आदमी पार्टी को मिल रहा है।

AAP-कांग्रेस को शहरी क्षेत्र में ज्यादा समर्थन- सर्वे
सर्वे में यह भी सामने आया है कि वोटरों की उम्र बढ़ने के साथ ही उनका आम आदमी पार्टी को समर्थन घटता जाता है और इसका ठीक उलटा बीजेपी के साथ हो रहा है। जिनकी शिक्षा तक अच्छी पहुंच है, वहां आम आदमी पार्टी का समर्थन ज्यादा है। जबकि, ग्रामीण इलाकों में भाजपा की पकड़ मजबूत है। जबकि, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस को ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरी क्षेत्र में ज्यादा समर्थन प्राप्त हो रहा है। वोटरों की संपन्नता के साथ उनके बीच भाजपा का प्रभाव भी बढ़ता गया है। जबकि, आम आदमी पार्टी को गरीब और मध्यम वर्ग में एक-चौथाई वोट मिलता दिख रहा है। लेकिन, संपन्न वर्ग में उसकी पहुंच नहीं बन सकी है। इस सर्वे में जिन लोगों को शामिल किया गया है, उनमें से आर्थिक रूप से कमजोर तबकों और धनाढ्यों का एक-चौथाई तबका कांग्रेस का समर्थक नजर आ रहा है।

कांग्रेस को करीब आधे मुसलमानों का समर्थन- सर्वे
पाटीदारों और ऊंची जातियों में भाजपा की बहुत ही मजबूत पकड़ कायम है, बल्कि इजाफा हुआ है। 2017 की तुलना में कांग्रेस ने पाटीदारों का बहुत बड़ा समर्थन बीजेपी के हाथों गंवा दिया है। इसी तरह अन्य पिछड़ा वर्ग में भाजपा को बहुत बड़ा समर्थन मिल रहा है। सर्वे की मानें तो गुजरात में दलित वोट तीन भागों में बंट रहा है, जिसमें कांग्रेस को बड़ा हिस्सा प्राप्त हो रहा है। ठीक इसी तरह आदिवासी वोट भी तीन हिस्सों में विभाजित हो रहा है, लेकिन इसमें बीजेपी को सबसे ज्यादा समर्थन हासिल है। कोली वोटरों के साथ भी यही हो रहा है। करीब आधे मुसलमान वोटर कांग्रेस साथ खड़े नजर आ रहे हैं। लेकिन, 10 में से हर तीसरा मुस्लिम वोट आम आदमी पार्टी को जा सकता है और 10 में से 1 बीजेपी को भी मिलता नजर आ रहा है। लेकिन, आम आदमी पार्टी की एंट्री से कांग्रेस और बीजेपी दोनों को 2017 की तुलना में अबकी बार कम मुसलमान वोट मिल रहे हैं।

भाजपा के 10 में 7 समर्थक मजबूती के साथ डटे हैं-सर्वे
इस समय की स्थिति ये है कि कांग्रेस के तीन-चौथाई वोटर उसके साथ डटे दिख रहे हैं, यही हाल भाजपा के 10 में से 7 समर्थकों का है। वहीं आम आदमी समर्थकों में दो-तिहाई ने संकेत दिया है कि वे अपना स्टैंड नहीं बदलेंगे। एक चौंकाने वाला आंकड़ा ये है कि आम आदमी पार्टी के एक-तिहाई वोटरों ने माना है कि उनका फैसला आगे बदल सकता है, लेकिन बीजेपी और कांग्रेस के वोटरों में इस अनिश्चितता की स्थिति बहुत ही कम है। सवाल पूछा गया कि अगर दो-तीन महीने बाद चुनाव हो तो क्या आपका फैसला बदल सकता है। तो जो जवाब मिला उसके मुताबिक कांग्रेस के 73% और बीजेपी के 70% वोटर आगे भी अपना निर्णय नहीं बदलेंगे।

कांग्रेस गुजरात में अभी भी प्रभावी विपक्ष- सर्वे
एक आंकड़ा और दिलचस्प है। कांग्रेस गुजरात में ढाई दशकों से भी ज्यादा समय से कुर्सी से दूर है और दो दलों की प्रमुखता वाली यहां की राजनीति में आम आदमी पार्टी की एंट्री हुई है। लेकिन 56% वोटर अभी भी कांग्रेस को गुजरात में प्रभावी विपक्षी पार्टी मानते हैं। ऐसा मानने वालों में ज्यादातर तो कांग्रेस समर्थक ही हैं, लेकिन आम आदमी पार्टी के भी हर पांचवें समर्थकों को लगता है कि कांग्रेस राज्य में विपक्ष की ज्यादा प्रभावी भूमिका निभा रही है। जबकि, बीजेपी के आधे से ज्यादा वोटर भी यही राय रखते हैं। कुल मिलाकर गुजरात में मतदान से लगभग एक महीने पहले की स्थिति ये है कि बीजेपी अपनी विरोधियों से स्पष्ट रूप से और काफी बढ़त के साथ आगे है। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर है, जिसमें पहली नंबर दो पर जाती दिखाई दे रही है।












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